ब्रुसेल्स। बेल्जियम के डेंडरमोनडे इलाके में सीवर लाइन बिछाने के दौरान एक पुरानी इमारत के तहखाने से कथित तौर पर 1 करोड़ डॉलर से अधिक मूल्य का सोना मिलने की खबर सामने आई है। भारतीय मुद्रा में इसकी कीमत करीब 85 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
जमीन में चमकी चीज को समझा सिक्का
रिपोर्ट के मुताबिक, सीवर पाइप डालने के लिए पुरानी इमारत के फर्श और नींव की खुदाई की जा रही थी। इसी दौरान 18 वर्षीय छात्र कोबे और साइट मैनेजर मारियो की नजर जमीन में चमकती वस्तुओं पर पड़ी।
शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद वहां कुछ 1 यूरो के सिक्के पड़े हैं। लेकिन करीब से देखने पर पता चला कि जमीन के भीतर सोने के सिक्के और सोने के बिस्कुट दबे हुए थे।
मारियो, जो करीब 33 वर्षों से निर्माण कार्य से जुड़े हैं, ने इस खोज को अपने जीवन का बेहद हैरान करने वाला अनुभव बताया।
मजदूरों ने नहीं छिपाया खजाना
इतनी बड़ी मात्रा में सोना मिलने के बावजूद मजदूरों ने उसे अपने पास रखने के बजाय पुलिस को सूचना दी और खजाना सौंप दिया।
मारियो के मुताबिक, सोने को छिपाना कानूनन गलत होता और इससे उनके लिए गंभीर परेशानी खड़ी हो सकती थी।
आखिर किसका है करोड़ों का सोना?
सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि इतना सोना जमीन के नीचे किसने छिपाया था?
स्थानीय इतिहासकारों के अनुसार, यह खजाना संभवतः इलाके के पुराने ‘वान अशे’ शराब बनाने वाले परिवार से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, अभी तक इसके वास्तविक मालिक की आधिकारिक पहचान नहीं हो पाई है।
मालिक नहीं मिला तो क्या होगा?
रिपोर्ट में बेल्जियम के कानून का हवाला देते हुए कहा गया है कि संभावित वास्तविक मालिक को खजाने पर दावा करने के लिए पांच वर्ष तक का समय मिल सकता है।
यदि निर्धारित अवधि में कोई मालिक सामने नहीं आता और खजाने का किसी अपराध से संबंध नहीं पाया जाता, तो कानून के तहत इसे खोजने वाले व्यक्ति और संपत्ति के मालिक के बीच बांटने की स्थिति बन सकती है।
इसी वजह से 18 वर्षीय छात्र कोबे को उम्मीद है कि भले ही पूरा सोना उसके हाथ न आए, लेकिन इतनी बड़ी खोज के लिए उसे कानूनी रूप से कोई Finder’s Fee या इनाम मिल सकता है।
सबसे बड़ा रहस्य अभी बाकी
सीवर लाइन की सामान्य खुदाई से सामने आया यह कथित खजाना अब इतिहास, कानून और संपत्ति के अधिकार से जुड़े सवाल खड़े कर रहा है।
करोड़ों का सोना आखिर किसने छिपाया था, कितने वर्षों से जमीन के नीचे दबा था और इसका असली मालिक कौन है—इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।
नोट: ऊपर की खबर आपके दिए गए स्रोत-पाठ के आधार पर तैयार की गई है। 85 करोड़ रुपये, पांच साल की दावा अवधि और खजाने के संभावित मालिक से जुड़े दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि के बिना इन्हें निश्चित तथ्य के बजाय रिपोर्ट में बताए गए विवरण के रूप में देखना उचित होगा।
