धीरूभाई अंबानी का L&T सपना क्यों नहीं हुआ पूरा? शेयरों से बोर्डरूम की जंग तक, ऐसे हाथ से निकली कंपनी

कारोबार

नई दिल्ली: एक समय Reliance Industries के संस्थापक धीरूभाई अंबानी की नजर देश की दिग्गज इंजीनियरिंग कंपनी L&T (Larsen & Toubro) पर थी। 1988 में अंबानी परिवार ने L&T में हिस्सेदारी बढ़ानी शुरू की और जल्द ही मुकेश अंबानी, अनिल अंबानी और धीरूभाई अंबानी कंपनी के बोर्ड तक पहुंच गए। अप्रैल 1989 में धीरूभाई अंबानी L&T के चेयरमैन भी बने।

1986 से शुरू हुई थी L&T में उथल-पुथल

1986 में L&T के शीर्ष नेतृत्व के बीच सत्ता संघर्ष चल रहा था। कंपनी की शिपिंग डिविजन, फ्लैट बिक्री और वित्तीय मामलों को लेकर विवाद सामने आए। कंपनी की शेयरहोल्डिंग भी काफी बिखरी हुई थी और उसके मूल विदेशी प्रमोटर भारत छोड़ चुके थे।

इसी कमजोर स्थिति के बीच 1988 में अंबानी परिवार ने L&T में अपनी मौजूदगी बढ़ाई। रिपोर्ट के अनुसार, मुकेश अंबानी और एमएल भक्ता बोर्ड में शामिल हुए और दिसंबर 1988 में अनिल अंबानी भी डायरेक्टर बने। कुछ महीनों बाद धीरूभाई अंबानी L&T के चेयरमैन बने।

लेकिन बोर्डरूम की लड़ाई यहीं से शुरू हुई

धीरूभाई के चेयरमैन बनने के बाद L&T के तत्कालीन चेयरमैन एनएम निक्की देसाई और अंबानी परिवार के बीच रिश्ते बिगड़ने लगे। कंपनी के प्रबंधन और कारोबारी फैसलों को लेकर भी मतभेद बढ़े।

इसके बाद L&T के शेयरों की खरीद और वित्तीय संस्थाओं से जुड़े लेनदेन को लेकर सवाल उठे। इंडियन एक्सप्रेस में एस. गुरुमूर्ति ने इस अधिग्रहण की जांच को लेकर कई रिपोर्ट प्रकाशित कीं। मामला बाद में बॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।

सरकार भी इस लड़ाई में उतरी

1989 के राजनीतिक बदलाव के बाद L&T को लेकर विवाद और गहरा गया। 1990 में सरकार ने LIC के जरिए L&T के चार निदेशकों—धीरूभाई अंबानी, मुकेश अंबानी, अनिल अंबानी और एमएल भक्ता—को हटाने की दिशा में कदम बढ़ाया।

इसके बाद धीरूभाई अंबानी ने अप्रैल 1990 में L&T के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया।

1991 के बाद फिर वापसी की कोशिश

आर्थिक उदारीकरण के दौर में अंबानी परिवार ने L&T में दोबारा प्रभाव बढ़ाने की कोशिश की। हालांकि कंपनी के भीतर मौजूद कुछ वरिष्ठ लोगों ने बाहरी कारोबारी समूहों के बजाय L&T को पेशेवर तरीके से चलाने पर जोर दिया।

1994 तक बोर्ड में अंबानी समर्थक संख्या मजबूत होती दिखाई दी, लेकिन वित्त मंत्रालय की मंजूरी निर्णायक बनी रही। आखिरकार अंबानी परिवार ने तत्काल नियंत्रण हासिल करने के बजाय बेहतर समय का इंतजार करना उचित समझा।

कहानी का सार

L&T को अपने कारोबारी साम्राज्य का बड़ा हिस्सा बनाने की धीरूभाई अंबानी की कोशिश शेयर खरीद, बोर्डरूम की राजनीति, सरकारी हस्तक्षेप और कानूनी विवादों के बीच आगे बढ़ी, लेकिन अंततः यह सपना पूरा नहीं हो सका।

Action Bharat News | बिजनेस डेस्क

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