नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने देश में चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार की इथेनॉल नीति पर सवाल उठाए हैं। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि गन्ने का इस्तेमाल चीनी के बजाय इथेनॉल बनाने में किए जाने से चीनी का उत्पादन प्रभावित हुआ और इसका असर कीमतों पर पड़ा है।
केजरीवाल के मुताबिक, 17 दिन पहले चीनी करीब ₹46 प्रति किलो थी, जो बढ़कर ₹65 प्रति किलो तक पहुंच गई है। उन्होंने दावा किया कि गन्ने को इथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ने से चीनी की उपलब्धता प्रभावित हुई।
इथेनॉल नीति पर उठाए सवाल
केजरीवाल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य पेट्रोल में इथेनॉल मिलाकर कच्चे तेल के आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा को बचाना था। लेकिन उनका आरोप है कि इसके कारण घरेलू स्तर पर चीनी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ा।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि गन्ने का एक हिस्सा इथेनॉल के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था, तो चीनी की भविष्य की जरूरत को लेकर सरकार ने क्या योजना बनाई थी।
केजरीवाल ने यह भी दावा किया कि भारत, जो पहले चीनी का निर्यात करता था, अब आयात की स्थिति में पहुंच रहा है। हालांकि, ये आंकड़े और इसके पीछे के कारण सरकार तथा अन्य विशेषज्ञों के आंकड़ों से अलग हो सकते हैं।
E20 पेट्रोल पर भी निशाना
केजरीवाल ने पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण की नीति पर भी सवाल उठाते हुए दावा किया कि इससे कुछ वाहनों में माइलेज और प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है। उन्होंने कहा कि एक तरफ ईंधन में इथेनॉल मिलाने की नीति लागू की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ उपभोक्ताओं को महंगी चीनी खरीदनी पड़ रही है।
गौर करने वाली बात: चीनी की कीमतों में बदलाव केवल इथेनॉल नीति से नहीं, बल्कि गन्ने का उत्पादन, चीनी मिलों की खरीद, सरकारी स्टॉक, निर्यात-आयात नीति और वैश्विक कीमतों जैसे कई कारकों से भी प्रभावित हो सकता है।
