सिंगापुर: सिंगापुर में 400 से अधिक प्रवासी श्रमिकों के वेतन बकाया रहने के मामले में भारतीय मूल के कारोबारी और सात कंपनियों के निदेशक रामू पलानी वेलु को दिवालिया घोषित कर दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, उनके खिलाफ 13 अगस्त 2026 को दिवालियापन आदेश जारी किया गया।
रामू पलानी वेलु सिंगापुर के स्थायी निवासी हैं और एयर-कंडीशनिंग, प्लंबिंग तथा निर्माण क्षेत्र से जुड़ी सात कंपनियों में निदेशक के तौर पर सूचीबद्ध हैं। इनमें KPA Engineering, SK Industries और VVR Plant Engineering शामिल हैं।
407 श्रमिकों ने किया वेतन का दावा
सिंगापुर के मानवशक्ति मंत्रालय (MOM) के अनुसार, इन तीन कंपनियों के खिलाफ कुल 407 वेतन दावे दर्ज किए गए थे। प्रभावित श्रमिकों में भारत और बांग्लादेश के प्रवासी कामगार शामिल हैं। कुछ श्रमिकों ने दो महीने से अधिक समय तक वेतन नहीं मिलने की शिकायत की थी।
यह मामला जून 2026 में उस समय सामने आया जब 100 से अधिक प्रवासी श्रमिक वेतन संबंधी शिकायत लेकर सिंगापुर के मानवशक्ति मंत्रालय के कार्यालय पहुंचे थे। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ा और तीन कंपनियों के सैकड़ों कर्मचारियों के वेतन बकाया होने की जानकारी सामने आई।
मानवशक्ति मंत्रालय कर रहा है जांच
सिंगापुर के अधिकारियों ने संबंधित कंपनियों के खिलाफ Employment Act और Employment of Foreign Manpower Act के तहत जांच शुरू की थी। रामू पलानी वेलु भी जांच में सहयोग कर रहे हैं। जून में उनके सिंगापुर लौटने के बाद उनका पासपोर्ट जब्त किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।
मंत्रालय के मुताबिक, प्रभावित श्रमिकों के लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था की गई और उन्हें सिंगापुर में नए रोजगार की तलाश के लिए विशेष पास भी दिए गए। जुलाई तक 130 से अधिक श्रमिकों को नए रोजगार मिलने की जानकारी दी गई थी। अगस्त में उपलब्ध अपडेट के अनुसार, सिंगापुर में रुकने वाले प्रभावित श्रमिकों में से लगभग सभी को नया रोजगार मिल चुका था।
वेतन नहीं देने पर हो सकती है सजा
सिंगापुर के नियमों के तहत कर्मचारियों का वेतन नहीं देने या वेतन भुगतान में गंभीर उल्लंघन करने वाले नियोक्ताओं पर कार्रवाई हो सकती है। अधिकारियों के अनुसार, दोष सिद्ध होने पर प्रत्येक आरोप के लिए 3,000 से 15,000 सिंगापुर डॉलर तक जुर्माना और छह महीने तक की जेल का प्रावधान हो सकता है।
रामू पलानी वेलु के खिलाफ दिवालियापन की कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब उनकी कंपनियों से जुड़े वेतन बकाया मामले की सरकारी जांच भी जारी है। हालांकि, दिवालिया घोषित किया जाना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उन्होंने जानबूझकर श्रमिकों का वेतन नहीं दिया था; इस संबंध में संबंधित एजेंसियों की जांच और कानूनी प्रक्रिया अलग से चल रही है।
स्रोत: The Straits Times, Singapore Ministry of Manpower, CNA
