नई दिल्ली (Action Bharat)। पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक हिंदू, ईसाई और अहमदी समुदायों के लोग भेदभाव, पूजा स्थलों पर हमलों, अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और बाल विवाह जैसी समस्याओं का सामना करने का आरोप लगा रहे हैं।
अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि ईशनिंदा कानूनों के कथित दुरुपयोग से भी अल्पसंख्यक समुदायों में असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
सड़कों पर उतरे अल्पसंख्यक
पाकिस्तान के कई बड़े शहरों में हाल ही में अल्पसंख्यक समुदायों और सिविल सोसाइटी से जुड़े लोगों ने अल्पसंख्यक अधिकार मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से जबरन धर्म परिवर्तन को अपराध बनाने और ऐसे मामलों में पीड़ितों को कानूनी सुरक्षा देने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने 11 सूत्रीय मांगें भी रखीं। इनमें जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ मजबूत कानूनी सुरक्षा और ईशनिंदा कानून के कथित दुरुपयोग से अल्पसंख्यकों की रक्षा प्रमुख मांगों में शामिल रही।
शाहबाज भट्टी की हत्या का भी जिक्र
रिपोर्ट में पाकिस्तान के पूर्व संघीय अल्पसंख्यक मंत्री शाहबाज भट्टी का भी जिक्र किया गया है, जिनकी 2011 में हत्या कर दी गई थी। उनके समर्थकों का कहना रहा है कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता की उनकी लड़ाई के बावजूद पाकिस्तान में इन समुदायों की समस्याएं खत्म नहीं हुई हैं।
Action Bharat का बड़ा सवाल:
जिन्ना के समान नागरिकता के वादे से लेकर आज तक—क्या पाकिस्तान अपने अल्पसंख्यकों को वास्तविक सुरक्षा और समान अधिकार देने में नाकाम रहा है?
