नई दिल्ली: दिल्ली के अगले दो दशकों के विकास का रोडमैप सामने आ गया है। दिल्ली मास्टर प्लान 2047 (MPD-2047) में राजधानी को 2047 तक आधुनिक, टिकाऊ, समावेशी और वैश्विक शहर बनाने की योजना रखी गई है। योजना में करीब 3.20 करोड़ आबादी को ध्यान में रखते हुए आवास, परिवहन, रोजगार, पर्यावरण और शहरी पुनर्विकास पर बड़ा फोकस किया गया है।
🏠 40 लाख किफायती घर, बढ़ेगी वर्टिकल ग्रोथ
मास्टर प्लान में करीब 40 लाख नए किफायती घरों का लक्ष्य रखा गया है। जमीन की सीमित उपलब्धता को देखते हुए दिल्ली में वर्टिकल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने की योजना है।
विशेष क्षेत्रों को छोड़कर कई रिहायशी प्लॉटों में ऊंचाई संबंधी प्रावधानों में बदलाव किया गया है।
लुटियंस बंगला जोन, सिविल लाइंस, कनॉट प्लेस, यमुना बाढ़ मैदान, अरावली रिज और ASI संरक्षित क्षेत्रों में मौजूदा निर्माण प्रतिबंध लागू रहेंगे।
💻 डेटा सेंटर से क्लाउड किचन तक नई इकोनॉमी
दिल्ली की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के लिए डेटा सेंटर, को-वर्किंग स्पेस, क्लाउड किचन, ई-कॉमर्स और डिजिटल सेवाओं को नई आर्थिक गतिविधियों के रूप में बढ़ावा देने का प्रावधान है।
इसका उद्देश्य निवेश, रोजगार और डिजिटल अर्थव्यवस्था को राजधानी में विस्तार देना है।
🚇 695 KM मेट्रो और 6 नए RRTS कॉरिडोर
दिल्ली का मेट्रो नेटवर्क मौजूदा करीब 416 KM से बढ़ाकर 695 KM तक करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके साथ:
- 6 नए RRTS कॉरिडोर
- आनंद विहार में मल्टीमॉडल ट्रांजिट हब
- सराय काले खां में मल्टीमॉडल हब
- कश्मीरी गेट में मल्टीमॉडल हब
- एकीकृत पार्किंग व्यवस्था
जैसी योजनाएं शामिल हैं।
🌙 कुछ इलाके 24 घंटे रहेंगे एक्टिव
मास्टर प्लान में चुनिंदा क्षेत्रों को 24-hour economy zones के रूप में विकसित करने की अवधारणा रखी गई है। इन इलाकों में रात के समय भी व्यापार, मनोरंजन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सकता है।
🏚️ अनधिकृत कॉलोनियों के पुनर्विकास पर भी फोकस
दिल्ली के पुराने और कम विकसित क्षेत्रों के पुनर्विकास की योजना है। अनधिकृत कॉलोनियों में Area-Based Redevelopment का प्रावधान किया गया है।
कम से कम 2,000 वर्ग मीटर क्षेत्र के प्लॉटों को मिलाकर पुनर्विकास की संभावना रखी गई है, जिसमें अधिकतम 350 FAR की अनुमति का प्रावधान बताया गया है।
🌊 यमुना और अरावली को लेकर क्या?
मास्टर प्लान में करीब 180 वर्ग किलोमीटर यमुना बाढ़ मैदान (O-Zone) और अरावली रिज के संरक्षण पर जोर दिया गया है।
बाढ़ और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण को नियंत्रित रखने का प्रावधान है। यमुना के आसपास लगभग 1,700 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए नियोजित गतिविधियों और उपयोग से जुड़े प्रावधान भी किए गए हैं।
🚲 200 KM साइकिल नेटवर्क
दिल्ली में लगभग 200 किलोमीटर का साइकिलिंग नेटवर्क विकसित करने का लक्ष्य है। इसका उद्देश्य छोटी दूरी की यात्राओं में निजी वाहनों पर निर्भरता कम करना और पैदल तथा साइकिल परिवहन को बढ़ावा देना है।
🏛️ पुरानी दिल्ली में विरासत के साथ विकास
पुरानी दिल्ली की ऐतिहासिक इमारतों के लिए Adaptive Reuse की अवधारणा अपनाई जाएगी। विरासत संरचनाओं की पहचान बरकरार रखते हुए उन्हें कैफे, रेस्तरां, क्राफ्ट शॉप और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
🔴 सबसे बड़ा सवाल—जमीन पर कब उतरेगा प्लान?
MPD-2047 में दिल्ली के भविष्य की बड़ी तस्वीर दिखाई गई है, लेकिन असली चुनौती इसके क्रियान्वयन की होगी। दिल्ली में जमीन, अनधिकृत कॉलोनियां, यातायात, प्रदूषण, यमुना बाढ़ मैदान और अलग-अलग एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र जैसे मुद्दे पहले से मौजूद हैं।
इसलिए आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, DDA, MCD और अन्य एजेंसियां इस 2047 के विजन को जमीन पर किस तरह लागू करती हैं।
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