नई दिल्ली। त्योहारों से पहले बढ़ती चीनी की कीमतों को लेकर उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ी हुई है। इसी बीच इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने दावा किया है कि देश में चीनी की वास्तविक कमी नहीं है और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
ISMA के मुताबिक, मौजूदा स्थिति में घबराकर ज्यादा चीनी खरीदने की जरूरत नहीं है। संगठन का कहना है कि थोक बाजार में कीमतों में गिरावट शुरू हो चुकी है और इसका असर अगले एक सप्ताह में खुदरा बाजार में भी दिखाई दे सकता है।
🎯 देश में कितनी चीनी उपलब्ध है?
ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी के मुताबिक, मौजूदा सीजन में देश में करीब 279 लाख टन नेट चीनी उत्पादन होने का अनुमान है।
दक्षिण कर्नाटक और तमिलनाडु में चल रहा विशेष चीनी उत्पादन सीजन 30 सितंबर तक जारी रहने की उम्मीद है।
ISMA का अनुमान है कि सीजन समाप्त होने तक देश में करीब 35 लाख टन चीनी का क्लोजिंग स्टॉक मौजूद रहेगा।
संगठन का कहना है कि इसलिए देश में चीनी की कमी की स्थिति नहीं है।
🎯 त्योहारों से पहले सरकार ने उठाया बड़ा कदम
सितंबर और अक्टूबर में त्योहारों के दौरान चीनी की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए सरकार ने पहले ही 10 लाख टन रॉ शुगर के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी है।
ISMA के मुताबिक, इससे उपलब्ध स्टॉक में लगभग 25 से 29 प्रतिशत तक अतिरिक्त सपोर्ट मिल सकता है और कीमतों पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी।
यानी सरकार ने त्योहारों की अतिरिक्त मांग को ध्यान में रखते हुए सप्लाई बढ़ाने का इंतजाम पहले ही शुरू कर दिया है।
🎯 क्या इथेनॉल की वजह से महंगी हुई चीनी?
चीनी की कीमतों में तेजी के बीच इथेनॉल नीति पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि ISMA ने साफ किया है कि मौजूदा कीमत वृद्धि के लिए इथेनॉल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।
संगठन के मुताबिक, सरकार की पहली प्राथमिकता घरेलू खपत के लिए पर्याप्त चीनी उपलब्ध कराना है। इसके बाद ही अतिरिक्त चीनी का इस्तेमाल इथेनॉल उत्पादन के लिए किया जाता है।
दिलचस्प बात यह है कि इथेनॉल उत्पादन में अनाज की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है। अनुमान के मुताबिक 2025-26 में कुल इथेनॉल आपूर्ति में अनाज आधारित इथेनॉल की हिस्सेदारी करीब 75 प्रतिशत हो सकती है, जबकि 2021-22 में यह सिर्फ 17 प्रतिशत थी।
🎯 इथेनॉल से किसानों को भी फायदा
ISMA का कहना है कि इथेनॉल कार्यक्रम ने चीनी मिलों की नकदी स्थिति को मजबूत करने में मदद की है।
इससे मिलों को किसानों का गन्ना भुगतान समय पर करने में मदद मिली है। संगठन के मुताबिक, 20 अगस्त 2026 तक 2025-26 सीजन के करीब 97 प्रतिशत गन्ना बकाये का भुगतान किया जा चुका था।
🎯 चीनी के दाम कब कम होंगे?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आम उपभोक्ता को राहत कब मिलेगी?
ISMA के अनुसार, बाजार में चीनी की कमी को लेकर कुछ कृत्रिम कमी की अफवाहों ने भी कीमतों और मांग को प्रभावित किया है। घबराहट में कुछ लोगों ने अतिरिक्त खरीदारी भी की।
हालांकि, मिल स्तर पर थोक कीमतों में गिरावट शुरू हो चुकी है। ISMA का अनुमान है कि इसका असर आने वाले एक सप्ताह में खुदरा बाजार में दिखाई दे सकता है।
🎯 आम आदमी के लिए क्या मतलब?
अगर थोक कीमतों में गिरावट बनी रहती है और आयातित रॉ शुगर की सप्लाई बाजार में पहुंचती है, तो त्योहारों से पहले चीनी की कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है।
फिलहाल ISMA का संदेश साफ है—देश में चीनी की कमी नहीं है, इसलिए घबराकर स्टॉक करने की जरूरत नहीं।
