नई दिल्ली। राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने आतंकवाद, कट्टरपंथ, घुसपैठ और साइबर खतरों के खिलाफ कार्रवाई और तेज करने का संकेत दिया है। राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन के पहले दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सुरक्षा एजेंसियों को आतंकवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ ‘अंतिम प्रहार’ की दिशा में काम करने के निर्देश दिए।
गृह मंत्रालय के अनुसार, इसी वर्ष फरवरी में आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के उद्देश्य से ‘प्रहार’ योजना तैयार की गई थी। अब इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों के प्रशिक्षण, खुफिया सूचनाओं के बेहतर इस्तेमाल और आतंकवाद से जुड़े मामलों में तेज कार्रवाई पर जोर दिया गया है।
🔴 भगोड़ों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी
सम्मेलन में अमित शाह ने विदेशों में मौजूद भगोड़ों को भारत वापस लाने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज करने पर जोर दिया।
इसके साथ ही ऐसे मामलों में जहां आरोपी जानबूझकर देश से बाहर रहकर न्यायिक प्रक्रिया से बच रहे हैं, वहां ‘ट्रायल इन एब्सेंशिया’ यानी आरोपी की अनुपस्थिति में मुकदमे की कानूनी व्यवस्था के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया।
आतंकवाद से जुड़े UAPA मामलों की जांच में भी विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने की बात कही गई।
🤖 AI से होगा खुफिया सूचनाओं का विश्लेषण
राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल को भी बढ़ाने की तैयारी है।
गृह मंत्री ने निर्देश दिया कि मल्टी एजेंसी सेंटर यानी **MAC** पर उपलब्ध सूचनाओं का AI आधारित विश्लेषण किया जाए, ताकि अलग-अलग एजेंसियों के बीच उपलब्ध जानकारी को बेहतर तरीके से जोड़कर संभावित सुरक्षा खतरों की पहचान की जा सके।
उद्देश्य यह है कि खुफिया सूचनाओं के आधार पर समय रहते मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की जा सके और संभावित खतरों पर तेजी से कार्रवाई हो।
🚨 घुसपैठ और अवैध प्रवासियों पर ‘जीरो टॉलरेंस’
सम्मेलन में अवैध प्रवासियों की पहचान और उन्हें वापस भेजने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा।
अमित शाह ने अवैध प्रवासियों को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने और घुसपैठ की चुनौती से निपटने के लिए एक व्यापक ढांचा तैयार करने का निर्देश दिया।
सुरक्षा एजेंसियों को घुसपैठ के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए भी कहा गया।
🔐 सिर्फ आतंकवाद नहीं, साइबर सुरक्षा भी एजेंडे में
राष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन में चर्चा का दायरा आतंकवाद तक सीमित नहीं रहा। इसमें साइबर क्राइम, पाकिस्तान के प्रॉक्सी वार, नशीले पदार्थों की तस्करी और खुफिया सूचनाओं के एकीकरण जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
नशीले पदार्थों की समस्या से निपटने के लिए विजन डॉक्यूमेंट और साइबर खतरों के खिलाफ नीति तैयार करने पर भी जोर दिया गया।
🛡️ दूसरे दिन किन मुद्दों पर चर्चा?
सम्मेलन के दूसरे दिन ड्रोन और अन्य हवाई प्रणालियों से पैदा होने वाले खतरे, समुद्री सुरक्षा और ब्लू इकोनमी, इंफॉर्मेशन वारफेयर तथा बायो-सिक्योरिटी जैसे विषयों पर चर्चा प्रस्तावित है।
🎯 क्या है बड़ी बात?
सरकार की रणनीति अब केवल आतंकी हमले के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं दिख रही, बल्कि खुफिया सूचनाओं को पहले से जोड़कर खतरे की पहचान, तकनीक के इस्तेमाल और एजेंसियों के बीच समन्वय के जरिए प्री-एम्प्टिव सिक्योरिटी सिस्टम मजबूत करने पर जोर है।
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