11 साल पहले आए भूकंप से भी कठिन था नेपाल का रेस्क्यू ऑपरेशन, पहली महिला हेलीकॉप्टर पायलट ने 6 दिन में किए 100 से ज्यादा मिशन

विदेश

काठमांडू। नेपाल में भारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद राहत एवं बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। इस मुश्किल अभियान के बीच नेपाल की पहली महिला हेलीकॉप्टर कैप्टन प्रिया अधिकारी ने महज छह दिनों में 100 से अधिक रेस्क्यू मिशन पूरे कर प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने और शवों को बरामद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

41 वर्षीय प्रिया अधिकारी हाई-एल्टीट्यूड रेस्क्यू ऑपरेशन की अनुभवी पायलट हैं। उन्होंने रसुवा जिले के बाढ़ प्रभावित तिमुरे सहित कई दुर्गम और जोखिम भरे इलाकों में लगातार हेलीकॉप्टर उड़ाकर बचाव अभियान चलाया।

2015 के भूकंप से भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण बताया अभियान

प्रिया अधिकारी ने इस रेस्क्यू अभियान को अपने पूरे करियर के सबसे कठिन अभियानों में से एक बताया है। उनके मुताबिक मौजूदा आपदा से निपटना वर्ष 2015 के नेपाल भूकंप के दौरान किए गए बचाव कार्य से भी अधिक चुनौतीपूर्ण रहा।

इसकी बड़ी वजह प्रभावित क्षेत्रों का भौगोलिक स्वरूप है। मौजूदा तबाही का बड़ा हिस्सा संकरी घाटियों और ऐसे दुर्गम इलाकों में हुआ है, जहां जमीन के रास्ते राहत पहुंचाना बेहद मुश्किल है। ऐसे में हेलीकॉप्टर ही कई स्थानों तक पहुंचने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम बने हुए हैं।

तिमुरे में करीब 20 हेलीकॉप्टरों ने संभाला मोर्चा

रसुवा जिले के तिमुरे और आसपास के इलाकों में बचाव अभियान के दौरान करीब 20 हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया गया। कई बार छोटे से क्षेत्र में एक साथ कई हेलीकॉप्टरों को उड़ान और लैंडिंग करनी पड़ी।

प्रिया अधिकारी के अनुसार, कुछ परिस्थितियों में पांच से छह हेलीकॉप्टरों को लगभग एक साथ उतरना पड़ता था। ऐसे में पायलटों के बीच लगातार रेडियो संपर्क बनाए रखना बेहद जरूरी था।

रेस्क्यू टीमों को यह सुनिश्चित करना पड़ता था कि सभी हेलीकॉप्टर एक ही स्थान पर न पहुंच जाएं। टकराव का खतरा न हो और अलग-अलग स्थानों पर फंसे लोगों तक जल्द से जल्द मदद पहुंच सके, इसके लिए पायलट लगातार आपस में समन्वय करते रहे।

जमीन भी बन रही बड़ी चुनौती

बाढ़ और भूस्खलन के बाद प्रभावित इलाकों में हेलीकॉप्टरों की लैंडिंग भी आसान नहीं है। कई स्थानों पर जमीन पर कीचड़ और मलबे की मोटी परत जमा हो गई है।

हवाई नजर से देखने पर जमीन भले ही मजबूत दिखाई दे, लेकिन पायलट के लिए यह पता लगाना मुश्किल होता है कि वह हेलीकॉप्टर का वजन सह पाएगी या नहीं। ऐसे में लैंडिंग के दौरान बेहद सावधानी बरतनी पड़ती है।

अचानक जमीन खिसकने या कीचड़ धंसने का खतरा बचाव दल के लिए लगातार बना हुआ है। यही वजह है कि इन इलाकों में राहत अभियान चलाना सामान्य परिस्थितियों की तुलना में कहीं अधिक जोखिम भरा है।

कौन हैं कैप्टन प्रिया अधिकारी?

प्रिया अधिकारी नेपाल की पहली महिला हेलीकॉप्टर कैप्टन के रूप में जानी जाती हैं और कई वर्षों से हिमालयी क्षेत्रों में हाई-एल्टीट्यूड सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन का हिस्सा रही हैं।

उनके अनुभव में बेहद ऊंचाई वाले इलाकों में घायल पर्वतारोहियों को हेलीकॉप्टर से सुरक्षित निकालना भी शामिल है। कुछ अभियानों में उन्हें करीब 6,200 मीटर तक की ऊंचाई पर उड़ान भरनी पड़ी है।

हालांकि, एविएशन में उनका सफर सीधे हेलीकॉप्टर पायलट बनने से शुरू नहीं हुआ था।

केबिन क्रू से शुरू हुआ एविएशन का सफर

प्रिया अधिकारी ने पर्यावरण विज्ञान की पढ़ाई की थी। इसके बाद उन्होंने अपने करियर की शुरुआत केबिन क्रू के तौर पर की।

एक हेलीकॉप्टर जॉयराइड के दौरान उन्हें उड़ान के प्रति विशेष रुचि पैदा हुई। इसके बाद उन्होंने हेलीकॉप्टर पायलट बनने का फैसला किया और प्रशिक्षण के लिए फिलीपींस चली गईं।

फ्लाइंग के जरूरी घंटे पूरे करने के बाद वह वर्ष 2017 में पूर्णकालिक हेलीकॉप्टर पायलट बनीं। आगे चलकर उन्होंने हाई-एल्टीट्यूड रेस्क्यू ऑपरेशन में विशेषज्ञता हासिल की।

बाढ़ और भूस्खलन के बीच लगातार जारी है बचाव

नेपाल में मौजूदा आपदा के दौरान कई इलाके बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित हुए हैं। सड़क और जमीन के रास्ते संपर्क बाधित होने के कारण हेलीकॉप्टरों के जरिए राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

ऐसे में कैप्टन प्रिया अधिकारी की लगातार उड़ानें और 100 से अधिक रेस्क्यू मिशन प्रभावित लोगों तक पहुंचने के प्रयासों में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

दुर्गम पहाड़ी इलाकों, अस्थिर जमीन, सीमित लैंडिंग स्थान और एक साथ कई हेलीकॉप्टरों के संचालन के बीच यह अभियान पायलटों और बचाव दल के लिए बेहद जोखिम भरा बना हुआ है। फिर भी राहत एवं बचाव टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने और लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटी हैं।

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