जन्माष्टमी से बाजार में बढ़ी रौनक, 40 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा कारोबार का अनुमान

दिल्ली

नई दिल्ली। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के त्योहार ने देशभर के बाजारों में रौनक बढ़ा दी है। मंदिरों से लेकर बाजारों तक तैयारियां तेज हैं और पूजा सामग्री, मिठाई, सजावटी सामान, भगवान श्रीकृष्ण की पोशाक और मूर्तियों की मांग बढ़ी है। व्यापारियों के संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अनुमान के मुताबिक, इस साल जन्माष्टमी के दौरान देशभर में 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार हो सकता है।

कैट के अनुसार, पिछले वर्षों की तुलना में इस बार जन्माष्टमी के कारोबार में करीब 30 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। संगठन ने इसके पीछे उपभोक्ता मांग में बढ़ोतरी, धार्मिक पर्यटन के विस्तार और स्वदेशी उत्पादों की बढ़ती लोकप्रियता को प्रमुख कारण बताया है।

2024 में 25 हजार करोड़, 2025 में 30 हजार करोड़ का कारोबार

कैट के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में जन्माष्टमी के दौरान करीब 25 हजार करोड़ रुपये का व्यापार हुआ था। वर्ष 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 30 हजार करोड़ रुपये रहा।

अब 2026 में इसके 40 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो पिछले दो वर्षों की तुलना में त्योहार से जुड़े कारोबार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज होगी।

मिठाई और डेयरी उत्पादों की सबसे ज्यादा मांग

जन्माष्टमी के दौरान सबसे अधिक मांग मिठाई, माखन-मिश्री और डेयरी उत्पादों की रहती है। कैट के अनुमानित व्यापार वितरण में इस श्रेणी की हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत बताई गई है।

इसके बाद धार्मिक पर्यटन, होटल और परिवहन सेवाओं का हिस्सा करीब 15 प्रतिशत, फूल-मालाओं और सजावट सामग्री का 12 प्रतिशत तथा पूजा सामग्री का करीब 10 प्रतिशत अनुमानित है।

अनुमानित कारोबार में प्रमुख क्षेत्र

कारोबार क्षेत्र अनुमानित हिस्सेदारी
मिठाई, माखन-मिश्री व डेयरी उत्पाद 20%
धार्मिक पर्यटन, होटल व परिवहन 15%
फूल, मालाएं व सजावट सामग्री 12%
पूजा सामग्री, धूप-अगरबत्ती व पंचामृत किट 10%
पारंपरिक परिधान व वस्त्र 10%
फल, सूखे मेवे व प्रसाद सामग्री 10%
अन्य उपभोक्ता वस्तुएं 10%
लड्डू गोपाल की मूर्तियां, झूले व श्रृंगार 8%
उपहार, खिलौने व घरेलू सजावटी सामान 5%

‘वोकल फॉर लोकल’ से स्थानीय कारोबार को फायदा

जन्माष्टमी की खरीदारी में स्थानीय और स्वदेशी उत्पादों की मांग भी बढ़ी है। बाजारों में लड्डू गोपाल की मूर्तियां, झूले, मुकुट, बांसुरी, पोशाक, पूजा सामग्री और सजावटी सामान की बिक्री बढ़ने की उम्मीद है।

इससे स्थानीय कारीगरों, हस्तशिल्प से जुड़े लोगों, कुटीर उद्योगों और छोटे कारोबारियों को फायदा मिल सकता है। त्योहार के दौरान स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों की बिक्री बढ़ने से छोटे व्यापारियों और निर्माताओं को अतिरिक्त आय का अवसर मिलता है।

धार्मिक पर्यटन से होटल और परिवहन कारोबार को भी फायदा

जन्माष्टमी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु कृष्ण से जुड़े प्रमुख धार्मिक स्थलों का रुख करते हैं। मथुरा-वृंदावन, द्वारका, नाथद्वारा, दिल्ली, मुंबई, जयपुर और अहमदाबाद जैसे शहरों में धार्मिक पर्यटन से जुड़े कारोबार में तेजी आने की उम्मीद है।

श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही का सीधा असर होटल, रेस्त्रां, कैब, स्थानीय परिवहन, गाइड और हस्तशिल्प कारोबार पर पड़ता है।

त्योहार से बनती है बड़ी आर्थिक श्रृंखला

कैट का कहना है कि भारतीय त्योहार केवल धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन नहीं हैं, बल्कि इनके साथ बड़ी आर्थिक गतिविधियां भी जुड़ी होती हैं। जन्माष्टमी के दौरान मंदिरों की सजावट से लेकर मिठाई, फूल, कपड़े, पूजा सामग्री, परिवहन और पर्यटन तक कई क्षेत्रों में मांग बढ़ती है।

इससे छोटे दुकानदारों से लेकर कारीगरों, परिवहन संचालकों, होटल-रेस्त्रां और अन्य सेवा प्रदाताओं तक को कारोबार मिलता है।

ऐसे में इस वर्ष जन्माष्टमी के दौरान 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक के संभावित कारोबार का अनुमान त्योहार की धार्मिक महत्ता के साथ-साथ इसके व्यापक आर्थिक प्रभाव को भी सामने रखता है।

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