यूपी में ‘गोल्डन ऑवर’ में बचेगी जान, 48 घंटे तक मुफ्त इमरजेंसी इलाज की तैयारी; UPTEN नेटवर्क में 173 इमरजेंसी हब

राज्य

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं और गंभीर मेडिकल इमरजेंसी के दौरान होने वाली मौतों को कम करने के लिए योगी सरकार एक बड़े इमरजेंसी हेल्थ नेटवर्क की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित UPTEN (उत्तर प्रदेश ट्रामा एंड इमरजेंसी नेटवर्क) के जरिए प्रदेश में ट्रॉमा, बर्न, हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी आपात स्थितियों के इलाज को एकीकृत व्यवस्था से जोड़ने की योजना है।

इस व्यवस्था का मुख्य फोकस मरीज को घटना के बाद शुरुआती महत्वपूर्ण समय यानी ‘गोल्डन ऑवर’ में जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध कराना है। योजना के तहत अस्पताल पहुंचने में लगने वाले समय को कम करने के साथ-साथ एंबुलेंस, अस्पताल, डॉक्टर और इमरजेंसी बेड के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की तैयारी है।

प्रस्तावित व्यवस्था में आपात स्थिति में मरीज को शुरुआती 48 घंटे तक मुफ्त इमरजेंसी इलाज उपलब्ध कराने की बात कही गई है। हालांकि, इस व्यवस्था के लागू होने पर इसकी पात्रता, उपचार की सीमा और वित्तीय प्रावधानों से जुड़े विस्तृत नियम सरकार की अंतिम गाइडलाइन के बाद स्पष्ट होंगे।

173 इंटीग्रेटेड ट्रॉमा एवं इमरजेंसी यूनिट विकसित करने की योजना

UPTEN नेटवर्क के तहत प्रदेश में कुल 173 एकीकृत ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन यूनिट विकसित करने की योजना बताई गई है।

इन यूनिटों को तीन स्तरों में बांटने का प्रस्ताव है—

  • 11 लेवल-1 एपेक्स हब
  • 36 लेवल-2 रीजनल सेंटर
  • 126 लेवल-3 जिला स्तरीय इमरजेंसी यूनिट

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि दुर्घटना या गंभीर बीमारी की स्थिति में मरीज को उसकी जरूरत के अनुसार नजदीकी और सक्षम चिकित्सा केंद्र तक जल्द पहुंचाया जा सके।

लेवल-1 केंद्रों पर सबसे जटिल और गंभीर मामलों के उपचार की क्षमता विकसित करने की योजना है, जबकि लेवल-2 और लेवल-3 केंद्रों के जरिए क्षेत्रीय और जिला स्तर पर तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

हर साल 10 से 12 हजार जान बचाने का लक्ष्य

स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित घोष के अनुसार, प्रस्तावित नेटवर्क का उद्देश्य हर साल 10 से 12 हजार लोगों की जान बचाना और गंभीर चोटों के कारण होने वाली स्थायी विकलांगता के मामलों में कमी लाना है।

सड़क दुर्घटनाओं में कई बार मरीज की हालत अस्पताल पहुंचने से पहले ही गंभीर हो जाती है। ऐसे मामलों में शुरुआती उपचार में देरी जानलेवा साबित हो सकती है। UPTEN व्यवस्था का फोकस इसी समय को कम करने पर रहेगा।

एंबुलेंस में ही शुरू होगा इलाज

प्रस्तावित नेटवर्क की एक बड़ी विशेषता एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (ALS) एंबुलेंस को इमरजेंसी सिस्टम का सक्रिय हिस्सा बनाना है।

योजना के तहत करीब 1,200 ALS एंबुलेंस को नेटवर्क से जोड़ने की बात कही गई है। इन एंबुलेंस को केवल मरीज को अस्पताल तक पहुंचाने के साधन के बजाय चलते-फिरते आपात चिकित्सा केंद्र की तरह इस्तेमाल करने की तैयारी है।

इसका मतलब यह होगा कि गंभीर मरीज के अस्पताल पहुंचने से पहले ही आवश्यक प्राथमिक और जीवनरक्षक उपचार शुरू किया जा सके।

18 मंडलीय कमांड सेंटर से होगा रियल-टाइम समन्वय

UPTEN नेटवर्क के संचालन के लिए प्रदेश के 18 मंडलों में कमांड सेंटर बनाए जाने की योजना है।

इन कमांड सेंटरों के जरिए एंबुलेंस, अस्पतालों में उपलब्ध बेड और विशेषज्ञ डॉक्टरों के बीच रियल-टाइम समन्वय स्थापित करने का लक्ष्य है।

मसलन, यदि किसी दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल मरीज को तत्काल ट्रॉमा सेंटर की जरूरत है, तो उपलब्ध जानकारी के आधार पर उसे ऐसे अस्पताल की ओर भेजा जा सकेगा जहां संबंधित विशेषज्ञ, उपकरण और बेड उपलब्ध हों।

इससे मरीज को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल रेफर करने में लगने वाला अतिरिक्त समय कम करने में मदद मिल सकती है।

AI तकनीक से रिस्पांस टाइम घटाने की तैयारी

इमरजेंसी सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल करने की भी योजना है।

प्रस्तावित डिजिटल अलर्ट और AI आधारित ट्रायेज सिस्टम का उद्देश्य मरीज की स्थिति का शुरुआती आकलन कर यह तय करना होगा कि उसे किस प्रकार के विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता है।

योजना के अनुसार इससे आपातकालीन प्रतिक्रिया समय में 30 से 50 प्रतिशत तक कमी लाने का लक्ष्य है।

सिस्टम का मूल सिद्धांत होगा—

‘राइट मरीज, राइट डिपार्टमेंट और राइट टाइम।’

यानी मरीज को अस्पताल पहुंचने के बाद यह तय करने में समय न गंवाना पड़े कि उसे किस विभाग में भेजा जाए। उसकी गंभीरता और जरूरत के आधार पर पहले से तैयारी की जा सके।

48 घंटे तक मुफ्त इमरजेंसी इलाज का प्रस्ताव

UPTEN योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू आपात स्थिति में इलाज को आर्थिक बाधा से मुक्त करने का प्रस्ताव है।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत किसी भी आपात स्थिति में मरीज को शुरुआती 48 घंटे तक मुफ्त इमरजेंसी उपचार उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

इसका उद्देश्य यह है कि सड़क दुर्घटना, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, गंभीर जलने या अन्य मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में पैसे की व्यवस्था न होने के कारण उपचार शुरू करने में देरी न हो।

हालांकि, इस प्रावधान के वास्तविक क्रियान्वयन के लिए सरकार की ओर से विस्तृत दिशा-निर्देश जारी होना जरूरी होगा। इनमें यह स्पष्ट होगा कि मुफ्त उपचार किन परिस्थितियों में लागू होगा और इसके खर्च का भुगतान किस व्यवस्था के तहत किया जाएगा।

आम नागरिक भी बनेंगे फर्स्ट रिस्पॉन्डर

योजना केवल अस्पताल और एंबुलेंस तक सीमित नहीं रहेगी। इसके तहत फर्स्ट रिस्पॉन्डर नेटवर्क तैयार करने की भी तैयारी है।

इस नेटवर्क में पुलिस, फायर सर्विस और हाईवे पेट्रोल से जुड़े कर्मचारियों के साथ आम नागरिकों को भी शुरुआती आपात सहायता की ट्रेनिंग देने का प्रस्ताव है।

दुर्घटना की स्थिति में अक्सर एंबुलेंस पहुंचने से पहले आसपास मौजूद लोग ही घायल व्यक्ति के सबसे करीब होते हैं। ऐसे लोगों को बेसिक इमरजेंसी रिस्पॉन्स की जानकारी मिलने से शुरुआती समय में मरीज की स्थिति बिगड़ने से रोकने में मदद मिल सकती है।

ट्रॉमा के साथ हार्ट अटैक और स्ट्रोक पर भी फोकस

UPTEN का दायरा केवल सड़क दुर्घटनाओं तक सीमित रखने की योजना नहीं है। इसमें कई तरह की गंभीर मेडिकल इमरजेंसी को शामिल किया जाएगा।

प्रमुख रूप से—

  • सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर चोट
  • ट्रॉमा
  • गंभीर जलने के मामले
  • हार्ट अटैक
  • स्ट्रोक
  • अन्य जीवन-घातक मेडिकल इमरजेंसी

को एकीकृत इमरजेंसी सिस्टम से जोड़ने की योजना है।

इसका मकसद मरीज को अलग-अलग स्वास्थ्य सेवाओं के बीच भटकने के बजाय जरूरत के अनुसार तत्काल विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराना है।

विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए अलग कैडर और वेतनमान की तैयारी

इमरजेंसी सेवाओं में विशेषज्ञ डॉक्टरों और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता बनाए रखना भी इस नेटवर्क की अहम जरूरत होगी।

इसके लिए प्रस्तावित व्यवस्था में एम्स की तर्ज पर अलग कैडर और वेतनमान विकसित करने की बात कही गई है।

इससे ट्रॉमा और इमरजेंसी मेडिसिन के विशेषज्ञों को इस क्षेत्र में बनाए रखने तथा जिला और क्षेत्रीय स्तर पर विशेषज्ञ सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने का लक्ष्य है।

क्यों जरूरी है ‘गोल्डन ऑवर’?

गंभीर दुर्घटना या मेडिकल इमरजेंसी के बाद शुरुआती समय मरीज के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। गंभीर रक्तस्राव, सिर की चोट, सांस की समस्या, हार्ट अटैक या स्ट्रोक जैसे मामलों में समय पर चिकित्सा सहायता मिलने से मरीज की स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

इसी वजह से UPTEN में घटना स्थल से अस्पताल तक की पूरी प्रक्रिया को एक नेटवर्क में जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

घटना → फर्स्ट रिस्पॉन्डर → ALS एंबुलेंस → कमांड सेंटर → उपयुक्त अस्पताल → विशेषज्ञ उपचार

इस पूरी श्रृंखला को तेज और समन्वित बनाने की कोशिश की जाएगी।

योजना लागू होने के बाद क्या बदलेगा?

यदि प्रस्तावित व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है तो दुर्घटना या मेडिकल इमरजेंसी के दौरान मरीज के लिए कई स्तरों पर बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

सबसे पहले घटनास्थल से एंबुलेंस तक पहुंचने का समय कम करने पर जोर होगा। इसके बाद एंबुलेंस में ही जरूरी उपचार शुरू किया जा सकेगा। कमांड सेंटर मरीज की जरूरत के मुताबिक अस्पताल का चयन करने में मदद करेगा और अस्पताल पहुंचने से पहले ही संबंधित मेडिकल टीम को अलर्ट किया जा सकेगा।

इससे अस्पताल पहुंचने के बाद उपचार शुरू होने में लगने वाला समय भी कम किया जा सकता है।

सरकार के सामने होगी क्रियान्वयन की बड़ी चुनौती

UPTEN जैसी व्यापक व्यवस्था को जमीन पर उतारना आसान नहीं होगा। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में अस्पतालों की क्षमता, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता, एंबुलेंस नेटवर्क, प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ और इमरजेंसी बेड की संख्या में अंतर है।

इसलिए 173 केंद्रों, 1,200 ALS एंबुलेंस और 18 कमांड सेंटरों को एक ही डिजिटल नेटवर्क में प्रभावी ढंग से जोड़ना बड़ी प्रशासनिक और तकनीकी चुनौती होगी।

साथ ही 48 घंटे के मुफ्त उपचार की व्यवस्था को लगातार वित्तीय सहायता देना भी महत्वपूर्ण होगा।

लक्ष्य सिर्फ इलाज नहीं, समय पर इलाज है

UPTEN की प्रस्तावित व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य इमरजेंसी मरीज को सिर्फ अस्पताल उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि सही समय पर सही उपचार उपलब्ध कराना है।

यदि गोल्डन ऑवर के दौरान एंबुलेंस, प्रशिक्षित फर्स्ट रिस्पॉन्डर, विशेषज्ञ डॉक्टर और अस्पताल के संसाधनों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होता है, तो गंभीर मरीजों के इलाज के परिणामों में सुधार की संभावना है।

फिलहाल इस प्रस्तावित नेटवर्क की विस्तृत कार्ययोजना और अंतिम नियमों का इंतजार है। इसके लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि मुफ्त 48 घंटे के उपचार, AI आधारित ट्रायेज, एंबुलेंस नेटवर्क और इमरजेंसी हब की व्यवस्था किस तरह जमीन पर काम करती है।

UPTEN योजना के प्रमुख प्रस्ताव एक नजर में

व्यवस्था प्रस्तावित लक्ष्य
इमरजेंसी हब 173
लेवल-1 एपेक्स हब 11
लेवल-2 रीजनल सेंटर 36
लेवल-3 जिला इकाइयां 126
ALS एंबुलेंस 1,200
मंडलीय कमांड सेंटर 18
वार्षिक जान बचाने का लक्ष्य 10-12 हजार
रिस्पॉन्स टाइम में कमी का लक्ष्य 30-50 प्रतिशत
प्रस्तावित मुफ्त इमरजेंसी इलाज शुरुआती 48 घंटे
फर्स्ट रिस्पॉन्डर पुलिस, फायर, हाईवे पेट्रोल और प्रशिक्षित नागरिक

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