चंडीगढ़। शहर में संपत्ति से जुड़ी सेवाओं के लिए आवेदन करने वाले लोगों को अब नो ड्यूज सर्टिफिकेट यानी NDC के लिए अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। चंडीगढ़ एस्टेट ऑफिस ने संपत्ति सेवाओं की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी की है।
नई व्यवस्था के तहत लीज राइट्स के ट्रांसफर और लीजहोल्ड संपत्ति को फ्रीहोल्ड में बदलने जैसी सेवाओं के लिए आवेदक सीधे मुख्य सेवा के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। संपत्ति पर किसी तरह का सरकारी बकाया है या नहीं, इसकी जांच अब उसी आवेदन की प्रक्रिया के दौरान की जाएगी।
एस्टेट ऑफिस के इस बदलाव से संपत्ति मालिकों और खरीदारों को एक ही काम के लिए अलग-अलग आवेदन करने और बार-बार दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया से राहत मिलने की उम्मीद है।
पहले क्या थी व्यवस्था?
अब तक संपत्ति से जुड़ी कुछ सेवाओं के लिए आवेदक को पहले नो ड्यूज सर्टिफिकेट (NDC) के लिए अलग आवेदन करना पड़ता था।
NDC की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित व्यक्ति को मुख्य संपत्ति सेवा के लिए दोबारा आवेदन करना पड़ता था। इस तरह एक ही संपत्ति से संबंधित जानकारी और दस्तावेजों की जांच अलग-अलग चरणों में होती थी।
इस दोहरी प्रक्रिया के कारण आवेदन के निपटारे में अतिरिक्त समय लग सकता था और आवेदक को अलग-अलग चरणों में कार्यालय या ऑनलाइन पोर्टल पर प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी।
अब एस्टेट ऑफिस ने इसी व्यवस्था को बदल दिया है।
अब एक ही आवेदन में होगी बकाया राशि की जांच
नई SOP के तहत आवेदक को मुख्य संपत्ति सेवा के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन मिलने के बाद संबंधित अधिकारी संपत्ति के रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच करेंगे।
इसके बाद संपत्ति से संबंधित सरकारी बकाया और सेवा शुल्क की गणना की जाएगी। जरूरत पड़ने पर इस गणना की जांच ऑडिट सेक्शन द्वारा भी की जाएगी।
इसका मतलब यह है कि NDC को अलग दस्तावेज के रूप में हासिल करने के बजाय उसकी जरूरत से जुड़ी जांच मुख्य आवेदन में ही शामिल होगी।
एक ही नोटिस में बताई जाएंगी सभी कमियां
नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि आवेदन में यदि किसी तरह की कमी या बकाया सामने आता है तो आवेदक को अलग-अलग चरणों में कई नोटिस जारी करने के बजाय एक डिस्क्रेपेंसी मेमो-कम-डिमांड नोटिस के जरिए जानकारी देने की व्यवस्था की गई है।
इस नोटिस में संबंधित आवेदन की कमियों और भुगतान किए जाने वाले बकाये की जानकारी एक साथ दी जाएगी।
इससे आवेदक को यह पता चल सकेगा कि आवेदन को आगे बढ़ाने के लिए उसे किन दस्तावेजों या औपचारिकताओं को पूरा करना है और कितनी राशि का भुगतान करना है।
बकाया जमा करने के बाद दोबारा NDC की जरूरत नहीं
नई प्रक्रिया के तहत यदि संपत्ति पर कोई सरकारी बकाया पाया जाता है तो आवेदक को निर्धारित राशि का भुगतान करना होगा और बताई गई कमियों को दूर करना होगा।
इसके बाद उसे दोबारा अलग से NDC के लिए आवेदन नहीं करना पड़ेगा।
यानी प्रक्रिया का उद्देश्य यह है कि एक ही आवेदन के भीतर रिकॉर्ड की जांच, बकाया की गणना, कमी की जानकारी, भुगतान और अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया पूरी की जाए।
15 कार्य दिवस में निपटाने का लक्ष्य
एस्टेट ऑफिस ने संबंधित सेवाओं के लिए समय-सीमा भी निर्धारित की है। कार्यालय के अनुसार, पूर्ण आवेदन प्राप्त होने के बाद मामले का निपटारा 15 कार्य दिवस के भीतर किया जाएगा।
हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण शर्त भी रखी गई है।
यदि आवेदक को डिस्क्रेपेंसी मेमो-कम-डिमांड नोटिस जारी किया जाता है, तो उसके अनुपालन के लिए आवेदक द्वारा लिया गया समय 15 कार्य दिवस की समय-सीमा में शामिल नहीं किया जाएगा।
अर्थात आवेदन में कोई कमी या बकाया सामने आने पर उसे पूरा करने और भुगतान करने में लगने वाला समय अलग माना जाएगा।
ऑनलाइन आवेदन की चेकलिस्ट में भी होगा बदलाव
नई SOP लागू करने के लिए एस्टेट ऑफिस संबंधित ऑनलाइन सेवाओं की चेकलिस्ट में भी बदलाव करेगा।
अब NDC को अनिवार्य दस्तावेज के रूप में शामिल नहीं किया जाएगा। इसके स्थान पर आवेदन प्रक्रिया में ही संपत्ति से संबंधित सरकारी देनदारियों का आकलन किए जाने की जानकारी दी जाएगी।
आवेदक द्वारा निर्धारित बकाया राशि का भुगतान और आवश्यक कमियां दूर करने के बाद मामला अंतिम मंजूरी के लिए आगे बढ़ाया जाएगा।
किन सेवाओं में लागू होगी नई व्यवस्था?
फिलहाल नई प्रक्रिया को दो प्रमुख संपत्ति सेवाओं में लागू किए जाने की बात कही गई है—
- लीज राइट्स का ट्रांसफर
- लीजहोल्ड संपत्ति का फ्रीहोल्ड में कन्वर्जन
भविष्य में एस्टेट ऑफिस की अन्य संपत्ति संबंधी सेवाओं को भी इसी तरह सरल प्रक्रिया के दायरे में लाया जा सकता है।
‘एक आवेदन, एक जांच’ पर जोर
एस्टेट ऑफिस की नई व्यवस्था का मूल उद्देश्य संपत्ति सेवाओं को कम जटिल बनाना है। इसके लिए प्रक्रिया को मोटे तौर पर इस तरह तैयार किया गया है—
एक आवेदन → एक रिकॉर्ड जांच → एक डिस्क्रेपेंसी/डिमांड नोटिस → बकाया भुगतान → अंतिम निपटारा
इससे अलग-अलग आवेदन और समान दस्तावेजों की बार-बार जांच की जरूरत कम हो सकती है।
प्रॉपर्टी मालिकों को क्या फायदा होगा?
नई व्यवस्था का सीधा फायदा उन लोगों को मिलने की उम्मीद है जो चंडीगढ़ में संपत्ति के हस्तांतरण या लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड कन्वर्जन जैसी सेवाओं के लिए आवेदन करते हैं।
पहले जहां NDC और मुख्य सेवा के लिए अलग-अलग प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी, वहीं अब संबंधित व्यक्ति एक ही मुख्य आवेदन के माध्यम से प्रक्रिया शुरू कर सकेगा।
इससे आवेदन प्रक्रिया सरल होने के साथ-साथ दस्तावेजों की दोहराई जाने वाली जांच और अनावश्यक देरी को कम करने में मदद मिल सकती है।
समय और कार्यालयी प्रक्रिया दोनों में कमी का प्रयास
संपत्ति से जुड़े सरकारी कामों में अक्सर दस्तावेजों की जांच, बकाया की पुष्टि और अलग-अलग प्रमाणपत्र हासिल करने में समय लगता है। नई SOP इसी प्रक्रिया को एकीकृत करने की कोशिश है।
यदि आवेदन पूरी तरह सही है और किसी अतिरिक्त कमी या बकाया की स्थिति नहीं है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत 15 कार्य दिवस के भीतर निपटाने का लक्ष्य रखा गया है।
हालांकि, जिन मामलों में रिकॉर्ड में विसंगति, दस्तावेजों की कमी या सरकारी बकाया सामने आएगा, उनमें अंतिम निपटारे में अतिरिक्त समय लग सकता है।
क्या बदला, एक नजर में
| पुरानी प्रक्रिया | नई प्रक्रिया |
|---|---|
| NDC के लिए अलग आवेदन | अलग NDC आवेदन की जरूरत नहीं |
| फिर मुख्य सेवा के लिए आवेदन | सीधे मुख्य सेवा के लिए आवेदन |
| अलग-अलग स्तर पर जांच | मुख्य आवेदन में ही जांच |
| अलग-अलग कमियों की जानकारी | एक डिस्क्रेपेंसी-कम-डिमांड नोटिस |
| NDC के बाद आगे की प्रक्रिया | बकाया भुगतान के बाद सीधे अंतिम मंजूरी |
| प्रक्रिया में अतिरिक्त समय | पूर्ण आवेदन के लिए 15 कार्य दिवस का लक्ष्य |
आम आवेदक के लिए सबसे बड़ा बदलाव
चंडीगढ़ एस्टेट ऑफिस की नई व्यवस्था का सबसे अहम पहलू यह है कि संपत्ति संबंधी काम के लिए NDC को अलग चरण के रूप में हटाकर उसे मुख्य आवेदन की जांच प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है।
इससे प्रॉपर्टी ट्रांसफर और लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड कन्वर्जन जैसे मामलों में आवेदन की प्रक्रिया पहले की तुलना में आसान और कम दोहराव वाली हो सकती है। अब इस व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन पर नजर रहेगी कि निर्धारित समय-सीमा और एकीकृत जांच की प्रक्रिया व्यवहार में कितनी तेजी से लागू होती है।
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