वाशिंगटन (Action Bharat) | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के हालिया प्रस्तावों ने अमेरिका की चुनावी राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप ने रिपब्लिकन पार्टी को कांग्रेस में दोबारा सत्ता में लाने पर वयस्क अमेरिकी नागरिकों को 5,000 डॉलर का डिविडेंड देने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही वह संघीय चुनावों में सख्त फोटो पहचान पत्र (Photo ID) की व्यवस्था लागू करने पर भी जोर दे रहे हैं।
इन प्रस्तावों की तुलना भारत में लागू प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी DBT जैसी योजनाओं से की जा रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक ट्रंप का प्रस्ताव भारत की DBT व्यवस्था से पूरी तरह समान नहीं है।
• रिपब्लिकन को सत्ता में लाने पर 5,000 डॉलर का वादा
ट्रंप ने डलास में रिपब्लिकन मिडटर्म कन्वेंशन के दौरान अपने समर्थकों के सामने 5,000 डॉलर के डिविडेंड का प्रस्ताव रखा। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस में रिपब्लिकन पार्टी को वापस सत्ता में लाया जाता है तो हर वयस्क अमेरिकी नागरिक को 5,000 डॉलर मिल सकते हैं।
इस प्रस्ताव को अमेरिकी राजनीति में मतदाताओं को सीधे आर्थिक लाभ से जोड़ने वाली रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, इस तरह के भुगतान के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी और प्रस्ताव को लेकर वहां सहमति स्पष्ट नहीं है।
• भारत की DBT योजनाओं से की जा रही तुलना
रिपोर्ट में ट्रंप के प्रस्ताव की तुलना भारत की डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर व्यवस्था से की गई है। भारत में DBT के जरिए सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचाई जाती है।
पिछले वर्षों में प्रत्यक्ष नकद सहायता वाली योजनाओं ने सरकार और मतदाताओं के बीच आर्थिक संबंध को भी प्रभावित किया है। राज्यों में महिलाओं और लड़कियों के लिए नकद सहायता जैसी योजनाएं भी चुनावी राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हैं।
हालांकि, रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि ट्रंप का 5,000 डॉलर वाला प्रस्ताव भारत की DBT योजना जैसा नहीं है। यह किसी खास वर्ग को लक्षित नहीं करता और इसे लागू करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक होगी।
• ट्रंप के एजेंडे में वोटर ID भी बड़ा मुद्दा
आर्थिक लाभ के प्रस्ताव के साथ ट्रंप संघीय चुनावों में मतदाताओं की पहचान को लेकर भी सख्त नियमों की वकालत कर रहे हैं।
मार्च 2025 में संघीय चुनाव प्रक्रिया में बदलाव से जुड़े अपने कार्यकारी आदेश में ट्रंप ने भारत और ब्राजील का उल्लेख किया था। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने इन देशों में मतदाता पहचान को लेकर मौजूद व्यवस्थाओं का हवाला दिया।
• नागरिकता प्रमाण और सरकारी फोटो ID पर जोर
ट्रंप ने ‘द सेव अमेरिका एक्ट’ पारित करने की जरूरत पर जोर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तावित व्यवस्था के तहत संघीय चुनावों में मतदान के लिए नागरिकता का प्रमाण और सरकार द्वारा जारी फोटो पहचान पत्र जरूरी होगा।
इससे अमेरिका में चुनाव के दौरान मतदाता की पहचान और पात्रता की जांच को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है।
• क्या अमेरिका में बदल रही है चुनावी राजनीति?
ट्रंप के 5,000 डॉलर के प्रस्ताव और वोटर ID पर जोर को अमेरिकी चुनावी राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। एक तरफ मतदाताओं को सीधे आर्थिक लाभ देने की बात सामने आ रही है, वहीं दूसरी तरफ मतदान प्रक्रिया में पहचान और नागरिकता के कड़े नियमों की मांग की जा रही है।
हालांकि, इन प्रस्तावों को लागू करने के लिए अमेरिकी संवैधानिक और विधायी प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसलिए फिलहाल इन्हें प्रस्ताव और राजनीतिक घोषणा के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि लागू हो चुकी नीतियों के रूप में।
