वॉशिंगटन (Action Bharat) | अमेरिका के फिलाडेल्फिया क्षेत्र में कई पब्लिक स्कूल डिस्ट्रिक्ट्स ने कक्षाओं में लैपटॉप और टैबलेट के इस्तेमाल को सीमित करना शुरू कर दिया है। खास तौर पर छोटे बच्चों के लिए व्यक्तिगत डिवाइस की व्यवस्था को कम या खत्म किया जा रहा है।
यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब स्कूलों में बढ़ते स्क्रीन टाइम और बच्चों के ध्यान भटकने को लेकर अभिभावकों की चिंताएं सामने आ रही हैं। कुछ स्कूलों ने छात्रों को डिवाइस घर ले जाने पर रोक लगाई है, जबकि कुछ जगहों पर छोटी कक्षाओं में व्यक्तिगत लैपटॉप और टैबलेट का इस्तेमाल सीमित किया गया है।
🏫 छोटे बच्चों के लिए बदले नियम
फिलाडेल्फिया क्षेत्र के अलग-अलग स्कूल डिस्ट्रिक्ट्स ने तकनीक के इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग नीतियां अपनाई हैं।
प्रमुख बदलाव
- कोलोनियल स्कूल डिस्ट्रिक्ट: एलिमेंटरी छात्रों को रात में लैपटॉप घर ले जाने पर रोक।
- ट्रेडीफ्रिन/ईस्टटाउन: किंडरगार्टन के बच्चों को iPad नहीं दिया जा रहा और एलिमेंटरी छात्रों को टैबलेट घर ले जाने की अनुमति नहीं है।
- मेथाक्टन: किंडरगार्टन और पहली कक्षा के बच्चों के लिए व्यक्तिगत डिवाइस के बजाय साझा डिवाइस मॉडल अपनाया गया है। Chromebook केवल केंद्र-आधारित गतिविधियों के लिए उपलब्ध हैं।
- फीनिक्सविल एरिया: किंडरगार्टन से तीसरी कक्षा तक के बच्चों के लिए वन-टू-वन डिवाइस कार्यक्रम समाप्त किया गया है।
- वॉलिंगफोर्ड-स्वार्थमोर: किंडरगार्टन से दूसरी कक्षा तक ऑनलाइन असेसमेंट कम किए जा रहे हैं। पांचवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए YouTube पर सर्च और ब्राउजिंग पर रोक लगाई गई है।
👨👩👧👦 अभिभावक भी कर रहे हैं स्क्रीन टाइम कम करने की मांग
इन बदलावों का कुछ अभिभावकों ने स्वागत किया है। उनका मानना है कि कक्षा में स्क्रीन का इस्तेमाल कम होने से शिक्षक बच्चों को ज्यादा प्रत्यक्ष तरीके से पढ़ा सकेंगे और स्क्रीन से होने वाला ध्यान भटकाव कम किया जा सकेगा।
हालांकि, कुछ माता-पिता का मानना है कि इन बदलावों का प्रभाव सीमित हो सकता है, क्योंकि कई कक्षाओं में छात्र अभी भी डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल करते रहेंगे।
स्क्रीन टाइम कम करने की मांग करने वाले अभिभावक अब स्कूलों से ऊपरी कक्षाओं में भी तकनीक पर निर्भरता की समीक्षा करने की मांग कर रहे हैं।
📚 बड़ी कक्षाओं में चुनौती ज्यादा
पीए अनप्लग्ड से जुड़े अभिभावक एलेक्स बर्ड बेकर के मुताबिक, प्राथमिक स्कूलों में कंप्यूटर का इस्तेमाल कम करना अपेक्षाकृत आसान है, लेकिन मिडिल स्कूल में ऐसा करना ज्यादा मुश्किल है क्योंकि वहां तकनीक पाठ्यक्रम का गहरा हिस्सा बन चुकी है।
वॉलिंगफोर्ड-स्वार्थमोर स्कूल डिस्ट्रिक्ट ने अपनी नई प्रौद्योगिकी सलाहकार परिषद के लिए अभिभावकों से आवेदन भी मांगे हैं। करीब 3,700 छात्रों वाले इस डिस्ट्रिक्ट में यह परिषद छठी से 12वीं कक्षा तक उपकरणों के इस्तेमाल समेत तकनीक से जुड़े बदलावों पर सलाह देगी।
🇺🇸 अमेरिका में बदल रहा डिजिटल क्लासरूम का नजरिया?
कुछ साल पहले तक स्कूलों में हर छात्र को व्यक्तिगत लैपटॉप या टैबलेट उपलब्ध कराना डिजिटल शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता था। अब फिलाडेल्फिया क्षेत्र के कई स्कूलों में छोटे बच्चों के लिए ‘हर बच्चे के हाथ में डिवाइस’ मॉडल पर पुनर्विचार किया जा रहा है।
यह बदलाव इस बहस को भी जन्म दे रहा है कि बच्चों की शिक्षा में तकनीक का इस्तेमाल कितना और किस उम्र में होना चाहिए।
Action Bharat की नजर
मामला सिर्फ लैपटॉप या टैबलेट देने या न देने का नहीं है। असली सवाल यह है कि डिजिटल तकनीक बच्चों की पढ़ाई को बेहतर बना रही है या कहीं-कहीं उनका ध्यान पढ़ाई से हटा भी रही है।
फिलाडेल्फिया क्षेत्र के स्कूलों में हो रहे बदलाव फिलहाल अलग-अलग डिस्ट्रिक्ट्स के फैसले हैं। इन्हें पूरे अमेरिका में तकनीक पर प्रतिबंध के रूप में देखना सही नहीं होगा।
Action Bharat | खबर वही, सवाल जरूरी।
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