कानपुर (Action Bharat) | कानपुर के चमनगंज इलाके में एक रेडीमेड कपड़ा कारोबारी को कथित तौर पर उसकी फर्म के नाम पर हुए करोड़ों रुपये के लेनदेन के आधार पर करीब 5 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी का नोटिस मिलने का मामला सामने आया है। व्यापारी का दावा है कि उसका वास्तविक सालाना कारोबार करीब 10 लाख रुपये है, जबकि कर विभाग के नोटिस में वर्ष 2022-23 के दौरान उसकी फर्म का करीब 5 करोड़ रुपये का टर्नओवर दिखाया गया।
मामले में कारोबारी ने पुलिस से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है। व्यापारी का आरोप है कि उसकी फर्म के नाम पर यह पूरा फर्जीवाड़ा उसके ही कर अधिवक्ता ने किया। पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
रेडीमेड कपड़ों की फर्म को दिखाया लोहे के स्क्रैप का कारोबार
फहीमाबाद कालोनी निवासी फिरदौस अहमद का दलेलपुरवा में रेडीमेड कपड़ों का कारखाना है। उनके मुताबिक उनकी फर्म ‘मेसर्स मदर दुआ’ के नाम से पंजीकृत है।
व्यापारी के अनुसार, 12 अगस्त को उन्हें वाणिज्य कर विभाग की ओर से एक नोटिस मिला। नोटिस में वर्ष 2022-23 के दौरान उनकी फर्म का करीब पांच करोड़ रुपये का टर्नओवर दिखाते हुए कर चोरी का आरोप लगाया गया था।
नोटिस की जानकारी सामने आने के बाद व्यापारी को उस समय और हैरानी हुई जब फर्म के कारोबार को रेडीमेड कपड़ों के बजाय लोहे के स्क्रैप से जुड़ा हुआ दर्शाया गया था।
व्यापारी का दावा- वास्तविक कारोबार करीब 10 लाख रुपये
फिरदौस अहमद के अनुसार, उनका वास्तविक कारोबार रेडीमेड कपड़ों से जुड़ा है और सालाना कारोबार करीब 10 लाख रुपये है।
उनका कहना है कि उन्होंने अपनी फर्म के नाम पर पांच करोड़ रुपये के टर्नओवर या लोहे के स्क्रैप से जुड़े किसी ऐसे कारोबार का संचालन नहीं किया, जैसा कि नोटिस में दर्शाया गया है।
यही वजह है कि व्यापारी ने फर्म के दस्तावेज और कथित लेनदेन की जांच कराने की मांग करते हुए पुलिस से शिकायत की है।
कर अधिवक्ता पर लगाया गंभीर आरोप
पीड़ित व्यापारी ने इस पूरे मामले में अपने ही कर अधिवक्ता फिरोज खान पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया है।
व्यापारी के अनुसार, वह कम पढ़ा-लिखा है और इसी का फायदा उठाकर अधिवक्ता ने उसकी फर्म से जुड़े कामकाज को संभाला। आरोप है कि बैंक खाते में रकम मंगवाकर उसे स्वयं निकाल लिया जाता था।
हालांकि, ये आरोप फिलहाल शिकायतकर्ता के आरोप हैं और इनकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
3200 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड मामले में जेल जा चुका है आरोपी
स्रोत के अनुसार, आरोपी अधिवक्ता फिरोज खान को पुलिस पहले ही करीब 3200 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। उसे नौ मई को जेल भेजे जाने की जानकारी दी गई है।
पुलिस ने इसी मामले से जुड़े कथित सिंडीकेट के एक अन्य व्यक्ति महफूज को भी गिरफ्तार किया है। पूछताछ में महफूज ने कथित तौर पर फिरोज खान को गिरोह का सरगना बताया था।
हालांकि, इस मामले में भी अंतिम कानूनी निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
पुलिस ने शुरू की शिकायत की जांच
चमनगंज थाने के प्रभारी रिकेश कुमार सिंह के अनुसार, व्यापारी की ओर से दिए गए शिकायती पत्र के आधार पर उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
पुलिस ने संबंधित कर अधिकारियों को भी मामले की जानकारी देने की बात कही है, ताकि फर्म के नाम पर दर्ज कारोबार, लेनदेन और कर संबंधी रिकॉर्ड की जांच की जा सके।
जांच में इन बिंदुओं पर रह सकती है नजर
- फर्म के नाम पर दर्ज करीब पांच करोड़ रुपये के कथित टर्नओवर का स्रोत।
- वर्ष 2022-23 के दौरान हुए कथित लेनदेन की वास्तविकता।
- रेडीमेड कपड़ों की फर्म को लोहे के स्क्रैप के कारोबार से जोड़ने का आधार।
- बैंक खातों में हुए लेनदेन और रकम की निकासी।
- फर्म के GST रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेज।
- कर अधिवक्ता की भूमिका और उसके द्वारा किए गए कथित लेनदेन।
- कारोबारी के आरोपों और उपलब्ध दस्तावेजों के बीच संबंध।
आगे क्या होगा?
मामले में पुलिस और संबंधित कर अधिकारियों की जांच के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि व्यापारी की फर्म के नाम पर दर्ज करोड़ों रुपये के कारोबार और कथित GST देनदारी का वास्तविक आधार क्या था।
फिलहाल व्यापारी ने अपने ऊपर आए करोड़ों रुपये के कर चोरी के नोटिस को फर्जी लेनदेन से जोड़ते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की है। वहीं, पुलिस साक्ष्यों और संबंधित विभागीय रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
