दिल्ली रिज की 2.5 हेक्टेयर वन भूमि पर बनेगा ITBP का नया दफ्तर, 627 पेड़ काटने की मंजूरी

दिल्ली

नई दिल्ली (Action Bharat) | दिल्ली के पर्यावरण और वन क्षेत्र से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। दिल्ली रिज प्रबंधन बोर्ड की स्थायी समिति ने आरके पुरम में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशालय और केंद्रीय रिकॉर्ड कार्यालय के निर्माण को मंजूरी दे दी है। प्रस्तावित परियोजना के लिए करीब 2.5 हेक्टेयर वन क्षेत्र के इस्तेमाल का प्रस्ताव है।

इस परियोजना के तहत 627 पेड़ों की कटाई और 93 पेड़ों के प्रत्यारोपण का प्रस्ताव रखा गया है। परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद रिज क्षेत्र में निर्माण और पर्यावरण संरक्षण को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं।

रिज जैसे संवेदनशील क्षेत्र में निर्माण

दिल्ली रिज राजधानी के महत्वपूर्ण प्राकृतिक क्षेत्रों में शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, इसी साल दिल्ली रिज प्रबंधन बोर्ड का पुनर्गठन रिज को अतिक्रमण और गैर-जरूरी निर्माण से बचाने, उसकी प्राकृतिक स्थिति बनाए रखने और पारिस्थितिकी बहाल करने के उद्देश्य से किया गया था।

ऐसे में उसी रिज क्षेत्र में एक बड़े प्रशासनिक कार्यालय के निर्माण को मंजूरी मिलने से पर्यावरण को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

627 पेड़ों की कटाई पर उठे सवाल

परियोजना को लेकर सबसे प्रमुख सवाल 627 पेड़ों की कटाई से जुड़ा है। रिपोर्ट में यह सवाल उठाया गया है कि क्या दिल्ली रिज जैसे पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र में प्रशासनिक कार्यालय और रिकॉर्ड कार्यालय के लिए इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों को काटना जरूरी है।

परियोजना में 93 पेड़ों के प्रत्यारोपण का भी प्रस्ताव है, लेकिन कटने वाले पेड़ों की संख्या इससे काफी अधिक है। इसी कारण पर्यावरण से जुड़े लोगों की चिंताएं सामने आई हैं।

आरके पुरम सेक्टर-10 में 2.487 एकड़ जमीन

सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, आरके पुरम सेक्टर-10 में 2.487 एकड़ जमीन वर्ष 2022 में गृह मंत्रालय को विभिन्न ITBP कार्यालयों के निर्माण के लिए आवंटित की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तावित भवन भू-आकृतिक रिज क्षेत्र और मानित वन क्षेत्र में आता है।

इस परियोजना को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से 11 दिसंबर 2025 को पहले चरण की सैद्धांतिक मंजूरी भी मिल चुकी है। हालांकि वन भूमि के अंतिम उपयोग के लिए संबंधित कानूनी अनुमतियों और शर्तों का पालन करना होगा। रिज बोर्ड ने भी इन शर्तों के अनुपालन पर जोर दिया है।

क्या रिज के बाहर विकल्प तलाशे गए?

रिपोर्ट में यह सवाल भी उठाया गया है कि क्या इस निर्माण के लिए रिज क्षेत्र के बाहर वैकल्पिक जमीन की तलाश पर्याप्त गंभीरता से की गई। कुछ जानकारों के हवाले से कहा गया है कि ITBP के महानिदेशालय और केंद्रीय रिकॉर्ड कार्यालय के लिए NCR में हरियाणा या उत्तर प्रदेश के किसी क्षेत्र पर भी विचार किया जा सकता था।

हालांकि उपलब्ध रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि वैकल्पिक स्थानों का औपचारिक रूप से कितना और किस स्तर पर मूल्यांकन किया गया।

संरक्षण और निर्माण को लेकर विरोधाभास

रिज क्षेत्र को लेकर एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, DDA करीब 120 हेक्टेयर रिज क्षेत्र में देशज प्रजातियों के पौधे लगाने और आक्रामक वनस्पतियों को हटाने का कार्यक्रम चला रहा है। दूसरी ओर, इसी रिज क्षेत्र में नए कार्यालय के लिए सैकड़ों पेड़ों को हटाने की अनुमति दी जा रही है।

बोर्ड ने रिज की सीमा को लेकर भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) से रिपोर्ट भी मांगी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अलग-अलग पद्धतियों के आधार पर रिज का क्षेत्र लगभग 106.2 से 108.4 वर्ग किलोमीटर सामने आया है। GSI की ओर से यह भी बताया गया कि भू-आकृतिक रिज के समान क्षेत्र भी पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील हैं।

अब आगे क्या?

ITBP देश का महत्वपूर्ण सीमा सुरक्षा बल है और प्रस्तावित परियोजना उसके महानिदेशालय तथा केंद्रीय रिकॉर्ड कार्यालय के निर्माण से जुड़ी है। वहीं, परियोजना के लिए वन क्षेत्र के इस्तेमाल और बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई के कारण पर्यावरणीय पहलू भी महत्वपूर्ण हो गया है।

अब इस परियोजना में मुख्य सवाल कानूनी अनुमतियों, वन भूमि के उपयोग की शर्तों, पेड़ों की कटाई-प्रत्यारोपण और दिल्ली रिज के पर्यावरणीय संरक्षण के बीच संतुलन का है।

रिपोर्ट के अनुसार, रिज में निर्माण की अनुमति देते समय केवल आवश्यक कानूनी स्वीकृतियों ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय जरूरतों को भी ध्यान में रखना महत्वपूर्ण होगा।

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