दिल्ली की 1511 अनधिकृत कॉलोनियों में मालिकाना हक की फीस 75% घटी, फिर भी आवेदन से कतरा रहे लोग

दिल्ली

नई दिल्ली, Action Bharat | दिल्ली की 1511 अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले संपत्ति मालिकों को मालिकाना हक देने के लिए चल रही पीएम उदय योजना में लोगों की भागीदारी अब भी बेहद कम है। शुल्क में बड़ी कटौती के बावजूद एक प्रतिशत से भी कम संपत्ति मालिक इस प्रक्रिया के लिए आगे आए हैं।

सरकार ने लोगों को योजना से जोड़ने और प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए नियमों में कई बदलाव किए हैं। इसी क्रम में एमसीडी और डीडीए ने मालिकाना हक देने से जुड़े शुल्क में 75 प्रतिशत तक की कटौती की है। यह रियायती शुल्क 31 अक्टूबर 2026 तक आने वाले आवेदनों पर लागू होगा।

20 लाख से ज्यादा संपत्ति मालिकों को मिलना है लाभ

दिल्ली की 1511 अनधिकृत कॉलोनियों में 20 लाख से अधिक संपत्ति मालिकों को मालिकाना हक देने का लक्ष्य है। वर्ष 2019 में पीएम उदय योजना शुरू की गई थी। इसके तहत अब तक करीब 37 हजार लोगों को इसका लाभ मिलने की जानकारी दी गई है।

हालांकि, 2026 में प्रक्रिया की जिम्मेदारी एमसीडी को दिए जाने के बाद नए आवेदनों की संख्या काफी कम रही है। एमसीडी के पास आई नई प्रक्रिया में केवल सात आवेदन आए, जिनमें से पांच आवेदन दस्तावेजों में कमी के कारण खारिज हो गए और केवल दो नए लाभार्थी जुड़ सके।

फीस में क्यों की गई 75% तक कटौती?

पहले मालिकाना हक की प्रक्रिया में विभिन्न प्रकार के शुल्क शामिल होने के कारण लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता था। इनमें यूनिफाइड बिल्डिंग बायलाज के तहत शुल्क, परमिट शुल्क, सुधार शुल्क, लेबर सेस, मलबा निस्तारण शुल्क, कंपलसेटरी रेगुलेटरी चार्ज, डेवलपमेंट चार्ज और आईटी एवं प्रशासनिक शुल्क शामिल थे।

इन सभी शुल्कों को मिलाकर कुल राशि कई मामलों में एक लाख रुपये से अधिक पहुंच सकती थी। इसी को देखते हुए एमसीडी और डीडीए ने अपने हिस्से के शुल्क में 75 प्रतिशत तक की कटौती की है।

आवेदन कम होने की क्या वजह?

योजना में कम भागीदारी के पीछे कई व्यवहारिक समस्याएं भी बताई जा रही हैं। दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों को विशेष कानूनी संरक्षण मिलने के कारण कई संपत्ति मालिकों को तत्काल मालिकाना हक की प्रक्रिया पूरी कराने की जरूरत महसूस नहीं होती।

इसके अलावा, दिल्ली में बिल्डर फ्लोर सिस्टम के कारण एक ही संपत्ति पर चार से पांच अलग-अलग मालिक हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में सभी सह-मालिकों का एकमत होकर आवेदन करना भी चुनौती बन जाता है।

31 अक्टूबर तक रियायती शुल्क का लाभ

एमसीडी और डीडीए द्वारा शुल्क में की गई कटौती फिलहाल 31 अक्टूबर 2026 तक आने वाले आवेदनों के लिए लागू बताई गई है। प्रशासन को उम्मीद है कि कम शुल्क से अधिक संपत्ति मालिक पीएम उदय योजना के तहत आवेदन करेंगे।

हालांकि, योजना की सफलता केवल शुल्क कम करने पर निर्भर नहीं होगी। दस्तावेजों की प्रक्रिया को सरल बनाना, सह-मालिकों से जुड़े मामलों का समाधान करना और संपत्ति मालिकों में योजना को लेकर स्पष्ट जानकारी पहुंचाना भी महत्वपूर्ण होगा।

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