तेल अवीव (Action Bharat) | UAE से इजरायल जा रही Flydubai की फ्लाइट में हुई घटना के बाद इजरायल की हवाई सुरक्षा व्यवस्था और विदेशी एयरलाइंस से यात्रा करने वाले यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं। घटना की पूरी जानकारी और सुरक्षा में संभावित चूक की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने आना बाकी है।
इजरायल लंबे समय से अपनी नागरिक उड़ानों की सुरक्षा के लिए कई स्तरों पर जांच और निगरानी की व्यवस्था अपनाता रहा है। इनमें यात्रियों की सुरक्षा जांच, विमान में सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और विमान की सुरक्षा से जुड़े विशेष प्रोटोकॉल शामिल हैं। हालांकि, अलग-अलग एयरलाइंस और मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्थाएं एक जैसी नहीं होतीं।
इजरायल का विमानन सुरक्षा इतिहास
इजरायल की उड़ानों को पहले भी अपहरण और मिसाइल हमलों जैसे खतरों का सामना करना पड़ा है। वर्ष 2002 में केन्या के मोम्बासा में इजरायली पर्यटकों को निशाना बनाए जाने के दौरान एक विमान पर मिसाइल हमले की कोशिश हुई थी, जो सफल नहीं हो पाई थी। 1976 का एंटेबे विमान अपहरण और 1972 में सबेना फ्लाइट का अपहरण भी इजरायल के विमानन सुरक्षा इतिहास की प्रमुख घटनाएं हैं।
इजरायल की राष्ट्रीय एयरलाइन एल अल ने अपने विमानों और यात्रियों की सुरक्षा के लिए विशेष उपाय अपनाए हैं। इनमें कड़े यात्री जांच प्रोटोकॉल और कुछ विमानों में मिसाइल-रोधी तकनीक शामिल है। ये व्यवस्थाएं हर विदेशी एयरलाइन पर समान रूप से लागू हों, यह जरूरी नहीं है।
विदेशी एयरलाइंस की सुरक्षा पर सवाल
Flydubai की घटना के बाद यह चर्चा तेज हुई है कि इजरायल जाने वाली विदेशी एयरलाइंस में सुरक्षा की जिम्मेदारी किस तरह तय होती है और अलग-अलग देशों के सुरक्षा प्रोटोकॉल के बीच समन्वय कितना प्रभावी है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि घटना में किस स्तर पर चूक हुई या किसी विशेष एजेंसी की जिम्मेदारी थी। इसकी स्पष्ट तस्वीर जांच और आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही मिल सकेगी।
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