लखनऊ (Action Bharat) | उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने आखिरी समय में अपना रुख बदलते हुए तीसरी सीट पर प्रत्याशी नहीं उतारने का फैसला किया है। पार्टी की ओर से यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब तीसरी सीट के लिए जरूरी अतिरिक्त विधायकों के समर्थन और संभावित क्रॉस वोटिंग को लेकर राजनीतिक गणित चुनौतीपूर्ण माना जा रहा था।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 30 सितंबर को संकेत दिया था कि यदि विधायकों का पर्याप्त गणित बनता है तो पार्टी राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए उम्मीदवार उतार सकती है। पार्टी की ओर से दूसरे खेमे के विधायकों के संपर्क में होने के दावे भी किए गए थे।
लेकिन नामांकन की अंतिम प्रक्रिया से पहले पार्टी ने अपना फैसला बदल दिया।
अखिलेश यादव ने दिया 403 सीटों का संदेश
तीसरी राज्यसभा सीट से पीछे हटने के बाद अखिलेश यादव ने मंगलवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा—
‘अब हमारी निगाह तीन पर नहीं, 403 पर है।’
इस बयान को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। सपा अब राज्यसभा की एक अतिरिक्त सीट के लिए जोखिम लेने के बजाय अपना राजनीतिक फोकस प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर केंद्रित करने का संदेश दे रही है।
तीसरी सीट के लिए क्यों मुश्किल था गणित?
सपा के मौजूदा विधायकों की संख्या के आधार पर पार्टी दो राज्यसभा उम्मीदवारों को जिताने की स्थिति में थी। तीसरी सीट हासिल करने के लिए उसे दूसरे दलों या अन्य खेमों के विधायकों के समर्थन की आवश्यकता पड़ती।
इसके साथ ही पार्टी के सामने अपने विधायकों को एकजुट रखने की चुनौती भी थी। पिछले राज्यसभा चुनावों में सपा के कुछ विधायकों पर क्रॉस वोटिंग करने के आरोप लगे थे।
ऐसे में तीसरे प्रत्याशी के लिए अतिरिक्त वोट जुटाने की कोशिश भाजपा को भी सपा के भीतर सेंधमारी का अवसर दे सकती थी। इस राजनीतिक जोखिम को देखते हुए तीसरे उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतारने का फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विनोद चतुर्वेदी की योगी से मुलाकात के बाद बढ़ी हलचल
नामांकन के अंतिम दिन से पहले सोमवार रात सपा विधायक विनोद चतुर्वेदी, जिन्होंने पिछले राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की थी, ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की।
उनके साथ असंबद्ध विधायक राकेश प्रताप सिंह और अभय सिंह भी मुख्यमंत्री से मिले। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस मुलाकात की तस्वीर एक्स पर साझा की गई और इसे शिष्टाचार भेंट बताया गया।
इस मुलाकात के बाद सियासी हलकों में चर्चाएं तेज हो गईं। इसके बाद ही सपा द्वारा तीसरी सीट पर प्रत्याशी नहीं उतारने का फैसला किए जाने की बात सामने आई।
2027 के विधानसभा चुनाव पर अब पूरा फोकस?
सपा के लिए राज्यसभा की तीसरी सीट के मुकाबले अब 2027 का विधानसभा चुनाव ज्यादा बड़ा राजनीतिक लक्ष्य है। अखिलेश यादव का ‘तीन नहीं, 403’ वाला संदेश साफ तौर पर पार्टी कार्यकर्ताओं और संगठन को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटने का संकेत माना जा रहा है।
तीसरी सीट के लिए मुकाबले में उतरने से जहां सपा को अतिरिक्त विधायकों को साधने की जरूरत पड़ती, वहीं क्रॉस वोटिंग की स्थिति में पार्टी को राजनीतिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता था। तीसरी सीट से पीछे हटकर सपा ने फिलहाल इस जोखिम से खुद को अलग कर लिया है।
अब नजर इस बात पर होगी कि राज्यसभा चुनाव के बाद सपा किस तरह 403 विधानसभा सीटों पर संगठन और चुनावी रणनीति को मजबूत करती है और 2027 के चुनाव में भाजपा के सामने अपनी चुनौती को किस रूप में पेश करती है।
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