जन सुराज के इकलौते विधायक को वित्त वर्ष 2026-27 की शेष अवधि के लिए मिली जिम्मेदारी, जदयू विधायक मनोरंजन सिंह उर्फ धूमल सिंह हैं समिति के सभापति
पटना। जन सुराज पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक प्रशांत किशोर को बिहार विधानसभा में नई जिम्मेदारी मिली है। विधानसभा सचिवालय ने उन्हें पर्यटन उद्योग संबंधी समिति का सदस्य मनोनीत किया है। इस संबंध में विधानसभा सचिवालय की ओर से अधिसूचना जारी की गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, प्रशांत किशोर को यह जिम्मेदारी वित्त वर्ष 2026-27 की शेष अवधि यानी करीब सात महीने के लिए मिली है।
प्रशांत किशोर के समिति में शामिल होने के बाद इस पैनल में कुल 10 सदस्य हो गए हैं। समिति की अध्यक्षता जनता दल यूनाइटेड (JDU) के विधायक मनोरंजन सिंह उर्फ धूमल सिंह कर रहे हैं। विधानसभा की विभिन्न समितियों में आम तौर पर सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों पक्षों के विधायकों को शामिल किया जाता है, ताकि संबंधित विभागों और विषयों के कामकाज की समीक्षा की जा सके।
पहली बार विधायक बनने के बाद अहम जिम्मेदारी
प्रशांत किशोर हाल ही में बिहार विधानसभा के सदस्य बने हैं। उन्होंने 17 अगस्त 2026 को विधानसभा सदस्य के रूप में शपथ ली थी। इसके साथ ही जन सुराज पार्टी की बिहार विधानसभा में पहली औपचारिक विधायी मौजूदगी हुई।
बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में जीत हासिल करने के बाद प्रशांत किशोर की विधानसभा की भूमिका शुरू हुई। विधायक बनने के बाद समिति की सदस्यता उन्हें सदन के भीतर विभागीय और नीतिगत मामलों पर काम करने का अवसर देगी।
सात महीने के लिए समिति में शामिल किए गए
विधानसभा की प्रक्रिया और कार्य संचालन से जुड़ी व्यवस्था के तहत प्रशांत किशोर को वित्त वर्ष 2026-27 की बची हुई अवधि के लिए समिति में मनोनीत किया गया है। इसका मतलब है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में करीब सात महीने तक वे इस समिति के कामकाज का हिस्सा रहेंगे।
यह समिति केवल औपचारिक भूमिका तक सीमित नहीं रहती। संबंधित क्षेत्र से जुड़े विषयों पर चर्चा, विभागीय कामकाज की समीक्षा और सुधार से जुड़े सुझावों को सामने रखना इसकी संसदीय प्रक्रिया का हिस्सा है।
कौन-कौन हैं समिति के सदस्य?
प्रशांत किशोर के शामिल होने के बाद पर्यटन उद्योग संबंधी समिति की सूची इस प्रकार है:
- मनोरंजन सिंह उर्फ धूमल सिंह — सभापति
- सुनील कुमार पिंटू — सदस्य
- अनिल सिंह — सदस्य
- वीरेंद्र कुमार सिंह — सदस्य
- संजय कुमार सिंह — सदस्य
- वशिष्ठ सिंह — सदस्य
- रामानंद मंडल — सदस्य
- बबलू कुमार — सदस्य
- गौतम कृष्ण — सदस्य
- प्रशांत किशोर — सदस्य
उपलब्ध रिपोर्टों में समिति की यही संरचना बताई गई है।
पर्यटन क्षेत्र के विकास पर रहेगा फोकस
बिहार में पर्यटन की संभावनाएं काफी व्यापक हैं। राज्य में धार्मिक, ऐतिहासिक, बौद्ध, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन से जुड़े कई महत्वपूर्ण स्थल हैं। पर्यटन उद्योग संबंधी विधानसभा समिति का काम इन क्षेत्रों से जुड़े विषयों पर सरकार और संबंधित विभागों के कामकाज की समीक्षा करना तथा जरूरत के अनुसार सुझाव देना है।
ऐसे में समिति के सदस्य के तौर पर प्रशांत किशोर के सामने बिहार में पर्यटन को रोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था और निवेश से जोड़ने जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखने का अवसर होगा।
प्रशांत किशोर के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह जिम्मेदारी?
प्रशांत किशोर लंबे समय तक चुनावी रणनीतिकार के रूप में सक्रिय रहे हैं और अब सक्रिय राजनीति में विधायक के तौर पर अपनी भूमिका बना रहे हैं। विधानसभा समिति में उनकी नियुक्ति उनके लिए सदन के भीतर काम करने और संसदीय प्रक्रिया को समझने का महत्वपूर्ण अवसर है।
विधायक बनने के बाद यह उनकी शुरुआती विधायी जिम्मेदारियों में से एक है। समिति की बैठकों में भाग लेकर वे संबंधित विभागों के कामकाज, योजनाओं और नीतिगत मुद्दों पर चर्चा का हिस्सा बन सकेंगे।
समिति के सभापति हैं छह बार के विधायक धूमल सिंह
पर्यटन उद्योग संबंधी समिति की अध्यक्षता जदयू विधायक मनोरंजन सिंह उर्फ धूमल सिंह कर रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, धूमल सिंह छह बार विधायक चुने जा चुके हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन के शुरुआती चुनाव सारण जिले की बनियापुर सीट से जीते और बाद में एकमा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
ऐसे में समिति में अनुभवी विधायक के नेतृत्व में प्रशांत किशोर जैसे पहली बार विधायक बने सदस्य की भूमिका भी राजनीतिक और विधायी दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विधानसभा में जन सुराज की पहली पारी
प्रशांत किशोर के विधायक बनने के साथ जन सुराज को बिहार विधानसभा में पहली बार प्रतिनिधित्व मिला है। शपथ लेने के बाद उन्होंने विधानसभा को बिहार के कई बड़े नेताओं की राजनीतिक विरासत से जुड़ा सदन बताते हुए अपनी जिम्मेदारी को महत्वपूर्ण बताया था।
अब समिति की जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रशांत किशोर को सदन के भीतर अपने राजनीतिक एजेंडे और नीतिगत विचारों को रखने का एक संस्थागत मंच भी मिलेगा। आने वाले महीनों में पर्यटन, उद्योग, रोजगार और बिहार के विकास से जुड़े मुद्दों पर उनकी सक्रियता पर राजनीतिक नजर रहेगी।
