‘देश में अघोषित आपातकाल जैसे हालात’, खरगे का केंद्र पर हमला; राहुल गांधी के साथ CJI से मिलेंगे

राजनीति

बेंगलुरु (Action Bharat) | कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर देश में ‘अघोषित आपातकाल’ जैसे हालात पैदा करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की तैनाती और गिरफ्तारियों से युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। खरगे ने घोषणा की कि वह लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से मुलाकात कर संवैधानिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों से जुड़ी अपनी चिंताएं सामने रखेंगे।

‘विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल’

बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत के दौरान खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल कर रही है। उनके मुताबिक, हालिया प्रदर्शनों के दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती और लोगों को हिरासत में लिए जाने की घटनाएं चिंता का विषय हैं।

खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियां अघोषित आपातकाल जैसी हैं। हालांकि, ये कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक आरोप हैं; इनका उल्लेख सरकार की ओर से दिए गए जवाब या स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।

राहुल गांधी के साथ CJI से मुलाकात की तैयारी

खरगे के अनुसार, वह और राहुल गांधी संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज और चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताएं मुख्य न्यायाधीश के सामने रखेंगे। उन्होंने बताया कि मुलाकात के लिए शाम चार से पांच बजे के बीच का समय निर्धारित किया गया था और इस संबंध में उन्होंने तथा राहुल गांधी ने पत्र भी भेजे हैं।

खरगे ने स्पष्ट किया कि प्रतिनिधिमंडल किसी विशेष कार्रवाई की मांग करने के बजाय अपनी चिंताएं सामने रखना चाहता है। उन्होंने कहा कि वे मुख्य न्यायाधीश से अपनी बात रखने और संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े सवालों पर ध्यान देने का अनुरोध करेंगे।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

कांग्रेस अध्यक्ष ने चुनाव आयोग सहित संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग को स्वतंत्र रूप से काम नहीं करने दिया जा रहा है और भाजपा चुनावी अनियमितताओं के जरिए सत्ता में पहुंची है।

कांग्रेस लंबे समय से चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को उठाती रही है। खरगे ने कहा कि उनकी पार्टी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगी। हालांकि, चुनावी अनियमितताओं और कथित ‘वोट चोरी’ से संबंधित आरोपों का अंतिम निष्कर्ष संबंधित तथ्यों, साक्ष्यों और सक्षम संस्थाओं की जांच के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

चुनाव आयुक्तों को कानूनी संरक्षण पर भी सवाल

खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों से संबंधित वर्ष 2023 के कानून की भी आलोचना की। उन्होंने चुनाव आयुक्तों को आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान मिलने वाले कानूनी संरक्षण पर सवाल उठाते हुए पूछा कि ऐसी व्यवस्था की जरूरत क्यों पड़ी।

उनका आरोप है कि इस तरह का संरक्षण जवाबदेही को कमजोर कर सकता है। कांग्रेस ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है। वहीं, इस कानूनी व्यवस्था के वास्तविक प्रभाव का आकलन उसके प्रावधानों और न्यायिक व्याख्या के आधार पर किया जाना चाहिए।

संवैधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक जवाबदेही पर बहस तेज

खरगे के बयान ने केंद्र सरकार, विपक्ष और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस को फिर तेज कर दिया है। कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और संस्थागत स्वतंत्रता का मुद्दा बता रही है, जबकि लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए स्वतंत्र तथ्यों और संबंधित पक्षों के जवाब महत्वपूर्ण होंगे।

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