नई दिल्ली (Action Bharat) | भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 13 कंपनियों के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट रद्द कर दिए हैं। इनमें पश्चिम बंगाल में पंजीकृत 11 कंपनियां और तमिलनाडु की दो कंपनियां शामिल हैं। RBI के इस फैसले के बाद संबंधित कंपनियां अब गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान के रूप में कारोबार नहीं कर सकेंगी।
केंद्रीय बैंक के अनुसार, यह कार्रवाई RBI अधिनियम, 1934 की धारा 45-IA(6) के तहत की गई। रजिस्ट्रेशन रद्द करने के आदेश सितंबर 2026 में अलग-अलग तारीखों पर जारी किए गए थे, जबकि इनसे संबंधित प्रेस विज्ञप्तियां 9 अक्टूबर को जारी की गईं।
किन 13 कंपनियों के रजिस्ट्रेशन रद्द हुए?
RBI की कार्रवाई के दायरे में शामिल कंपनियों के नाम इस प्रकार बताए गए हैं:
- नकोदर फाइनेंस
- अजीतनाथ स्टील्स
- एस्ट्रोल डीलकॉम
- भाग्यश्री ट्रेडिंग
- बू फाइनेंस कंपनी
- ब्राइटेक्स फाइनेंशियल सर्विसेज
- सजीली विनिमय
- भूमिका फिस्कल सर्विसेज
- ब्लू माउंट एक्सपोर्ट्स
- डेल्टा कैपिटल मार्केट
- राजेश फिस्कल सर्विसेज
- सरला फाइनेंस
- श्रेयांस व्यापार
रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से 11 कंपनियों के पंजीकृत कार्यालय पश्चिम बंगाल में हैं, जबकि दो कंपनियां तमिलनाडु में स्थित हैं।
रजिस्ट्रेशन रद्द होने के बाद क्या होगा?
RBI के अनुसार, जिन कंपनियों के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट रद्द किए गए हैं, वे अब RBI अधिनियम की धारा 45-I में परिभाषित गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान का कारोबार नहीं कर सकतीं।
NBFC ऐसी कंपनियां होती हैं जो बैंक नहीं होने के बावजूद ऋण, वित्तपोषण और अन्य निर्धारित वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराती हैं। इनके कामकाज पर RBI नियामकीय नियमों के तहत निगरानी रखता है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी कंपनी का रजिस्ट्रेशन रद्द होना अपने आप में धोखाधड़ी या किसी आपराधिक गतिविधि का प्रमाण नहीं है। कार्रवाई के कारण और प्रत्येक कंपनी की स्थिति को RBI के संबंधित आदेशों के आधार पर अलग-अलग समझना चाहिए।
10 अन्य NBFC कंपनियों ने भी सरेंडर किए प्रमाणपत्र
RBI ने एक अलग घोषणा में बताया कि 10 NBFC कंपनियों के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट भी सरेंडर किए जाने के बाद रद्द किए गए हैं। इन मामलों में कारोबार बंद करना, नियामकीय वर्गीकरण में बदलाव और कंपनियों का कानूनी अस्तित्व समाप्त होना जैसे कारण शामिल हैं।
इनमें छह कंपनियों ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कारोबार से बाहर निकलने के कारण अपने प्रमाणपत्र सरेंडर किए।
रिपोर्ट में प्रगति फिनकैप, राजलक्ष्मी वाणिज्य, विवृति कैपिटल, MSJ कोलोनाइजिंग एंड लीजिंग कंपनी, PKSL इन्वेस्टमेंट और HCL कॉर्पोरेशन के नाम शामिल हैं।
इसके अलावा, PCR इन्वेस्टमेंट्स और अपर्णा इन्वेस्टमेंट ने संबंधित नियामकीय शर्तें पूरी करने के बाद अपने वर्गीकरण में बदलाव के आधार पर प्रमाणपत्र सरेंडर किए। वहीं, वंदना गृह निर्माण और रामसिसारिया बिल्डर्स के मामले कंपनियों के कानूनी अस्तित्व समाप्त होने से संबंधित बताए गए हैं।
वित्तीय क्षेत्र में नियामकीय निगरानी का महत्व
NBFC क्षेत्र भारतीय वित्तीय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में कंपनियों का पंजीकरण, नियामकीय अनुपालन और कारोबार की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। RBI की कार्रवाई से संबंधित कंपनियों की नियामकीय स्थिति में बदलाव आया है।
ग्राहकों, निवेशकों और संबंधित पक्षों को किसी कंपनी के साथ वित्तीय लेनदेन करने से पहले उसका वर्तमान पंजीकरण और नियामकीय दर्जा RBI के आधिकारिक रिकॉर्ड से जांचना चाहिए।
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