नकली जैव खाद बेचने वालों पर कसेगा शिकंजा! मोहाली में खुली पंजाब की तीसरी हाईटेक लैब, गुणवत्ता की होगी जांच

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मोहाली (Action Bharat) | किसानों को नकली और घटिया जैव उर्वरक बेचने वालों पर कार्रवाई की दिशा में पंजाब सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। जैव उर्वरकों की गुणवत्ता की जांच और निगरानी मजबूत करने के लिए मोहाली में प्रदेश की तीसरी हाईटेक जैव उर्वरक परीक्षण प्रयोगशाला शुरू की गई है। सरकार का उद्देश्य किसानों तक गुणवत्तापूर्ण उत्पाद पहुंचाना और खेती में जैव उर्वरकों के इस्तेमाल को अधिक भरोसेमंद बनाना है।

कृषि मंत्री ने किया तीसरी प्रयोगशाला का उद्घाटन

मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने सोमवार को मोहाली के कलाकट भवन में इस प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। इससे पहले बठिंडा और गुरदासपुर में भी जैव उर्वरक परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं।

प्रदेश में इन तीनों प्रयोगशालाओं को स्थापित करने पर कुल 4.50 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इनके माध्यम से जैव उर्वरकों की गुणवत्ता जांचने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।

सालाना 15 से 16 हजार मीट्रिक टन जैव उर्वरकों की खपत

पंजाब में जैव उर्वरकों की सालाना खपत लगभग 15,000 से 16,000 मीट्रिक टन अथवा किलोलीटर बताई गई है। जैविक और टिकाऊ खेती की ओर बढ़ते रुझान के बीच इन उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण हो गया है।

नई प्रयोगशाला से कृषि विभाग को उत्पादों की जांच करने, उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करने तथा उत्पाद बनाने वाली इकाइयों और विक्रेताओं की निगरानी में मदद मिलेगी।

कृषि मंत्री के अनुसार, प्रयोगशालाओं का प्रमुख उद्देश्य किसानों को प्रमाणित और प्रभावी जैव उर्वरक उपलब्ध कराना तथा उन्हें नकली उत्पादों से बचाना है।

रासायनिक खाद पर निर्भरता घटाने पर जोर

पंजाब सरकार खेती में रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए जैव उर्वरकों को बढ़ावा देना चाहती है। हालांकि, इसका लाभ तभी मिलेगा जब किसानों को मिलने वाले उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरें।

प्रयोगशालाओं से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर पंजाब की जलवायु और कृषि परिस्थितियों के अनुकूल जैव उर्वरकों की गुणवत्ता तथा उनकी प्रभावशीलता को बेहतर बनाने में भी सहायता मिल सकती है।

पंजाब में 30 हजार एकड़ में प्रमाणित जैविक खेती

रिपोर्ट के अनुसार, कृषि मंत्री ने बताया कि वर्ष 2025-26 तक पंजाब में लगभग 30,000 एकड़ क्षेत्र में प्रमाणित जैविक खेती की जा रही थी। उन्होंने कहा कि गेहूं और चावल के उत्पादन में पंजाब का देश में महत्वपूर्ण योगदान है, इसलिए मिट्टी की उर्वरता, प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण का संरक्षण भी जरूरी है।

अब अहम सवाल यह है कि नई प्रयोगशालाओं की जांच के आधार पर नकली या घटिया जैव उर्वरक बेचने वालों के खिलाफ कितनी प्रभावी कार्रवाई होती है। यदि गुणवत्ता जांच और निगरानी नियमित रूप से की जाती है, तो इससे किसानों का भरोसा बढ़ाने और टिकाऊ खेती को प्रोत्साहन देने में मदद मिल सकती है।

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