7 साल पुराने मामले में पूर्व विधायक नितिन त्यागी को बड़ी राहत, राउज एवेन्यू कोर्ट ने सभी आरोपों से किया बरी

क्राइम

नई दिल्ली। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने लक्ष्मी नगर के पूर्व विधायक नितिन त्यागी को सात साल पुराने आपराधिक मामले में बड़ी राहत देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया है। मामला दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की पुनर्स्थापन परियोजना के दौरान सरकारी कार्य में बाधा डालने, मारपीट करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपों से जुड़ा था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा, इसलिए आरोपी को संदेह का लाभ दिया जाना उचित है।

 

यह मामला करीब सात वर्ष पुराना है, जब डीडीए अपनी पुनर्स्थापन (Rehabilitation) परियोजना के तहत कार्रवाई कर रहा था। आरोप था कि उस दौरान तत्कालीन विधायक नितिन त्यागी ने सरकारी कार्य में बाधा डाली, अधिकारियों के साथ मारपीट की और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। इन आरोपों के आधार पर उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।

मामले की सुनवाई लंबे समय तक अदालत में चलती रही, जहां अभियोजन पक्ष ने अपने साक्ष्य और गवाह पेश किए। वहीं बचाव पक्ष ने आरोपों को निराधार बताते हुए अदालत से राहत की मांग की।

अदालत ने क्या कहा?

मामले की सुनवाई के बाद अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) नेहा मित्तल ने अपने फैसले में कहा कि किसी भी आपराधिक मुकदमे में दोष सिद्ध करने के लिए आरोपों का संदेह से परे साबित होना आवश्यक होता है। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर यह साबित नहीं कर सका कि आरोपी ने वास्तव में सरकारी कार्य में बाधा डाली, मारपीट की या नुकसान पहुंचाया।

अदालत ने स्पष्ट कहा कि प्रस्तुत साक्ष्य आरोपों की पुष्टि करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में भारतीय न्याय व्यवस्था के सिद्धांतों के अनुसार आरोपी को संदेह का लाभ (Benefit of Doubt) दिया जाना चाहिए।

सभी आरोपों से किया दोषमुक्त

कोर्ट ने अपने फैसले में नितिन त्यागी को सरकारी कार्य में बाधा डालने, मारपीट करने और नुकसान पहुंचाने सहित सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में असफल रहा है, इसलिए आरोपी को बरी किया जाता है।

जमानत बांड भी रद्द

फैसले के साथ ही अदालत ने नितिन त्यागी के जमानत बांड रद्द करने तथा उनके जमानती को मुक्त करने का आदेश दिया। हालांकि, भविष्य में यदि इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की जाती है, तो कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें नए मुचलके भरने के निर्देश भी दिए गए हैं।

सात साल बाद मिला फैसला

यह मामला करीब सात वर्षों तक अदालत में लंबित रहा। लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने अंततः यह निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष आरोपों को आवश्यक कानूनी मानकों के अनुरूप सिद्ध नहीं कर पाया। इसी आधार पर पूर्व विधायक नितिन त्यागी को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।

न्यायिक प्रक्रिया पर जोर

अदालत के इस फैसले में एक बार फिर यह सिद्धांत दोहराया गया कि किसी भी व्यक्ति को तब तक दोषी नहीं माना जा सकता जब तक उसके खिलाफ लगाए गए आरोप ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर संदेह से परे साबित न हो जाएं। अदालत ने इसी सिद्धांत का पालन करते हुए नितिन त्यागी को दोषमुक्त घोषित किया।

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