‘मैं RSS को सपोर्ट करूंगा… लेकिन’, राहुल गांधी ने क्यों कही ये बात? अभिव्यक्ति की आजादी पर सरकार को घेरा

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नई दिल्ली। कांग्रेस के ‘रचनात्मक कांग्रेस प्रकोष्ठ’ के राष्ट्रीय अधिवेशन में गुरुवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।

राहुल गांधी ने कहा कि अगर कभी RSS की अभिव्यक्ति की आजादी को रोकने की कोशिश की गई तो वह RSS की भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करेंगे। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी की आवाज दबाना नहीं, बल्कि हर व्यक्ति और संगठन को अपनी बात रखने का अधिकार देना है।

‘मैं RSS की रक्षा करूंगा’

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि यदि RSS की अभिव्यक्ति को देश से बाहर करने की कोशिश होती है तो वह उस दिन RSS की भी रक्षा करेंगे, क्योंकि उसके सदस्यों को भी अपनी बात कहने का अधिकार है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस का काम किसी की आवाज रोकना नहीं है। उनके मुताबिक, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सभी के लिए होनी चाहिए, चाहे विचार कांग्रेस के पक्ष में हों या उसके विरोध में।

यही बयान अब राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।

‘भारत अपनी बात कहने से नहीं रुकेगा’

राहुल गांधी ने कहा कि भारत अब अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि डर के कारण देश में बड़ी संख्या में लोग खुलकर अपनी बात रखने से बच रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आज के भारत को समझने के लिए केवल हजारों साल पुराने इतिहास को देखने के बजाय यह समझना जरूरी है कि आज देश में क्या हो रहा है और लोग किन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं।

जंतर-मंतर के छात्र आंदोलन का किया जिक्र

राहुल गांधी ने अपने भाषण में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि छात्र अपनी परेशानियों और मांगों को लेकर अपनी बात रखना चाहते थे, लेकिन उन्हें प्रदर्शन करने से रोका गया।

उनके अनुसार, सरकार व्यवस्था बनाए रखने की बात कहकर लोगों को अपनी बात रखने से रोक रही है।

राहुल गांधी ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए कहा कि कांग्रेस का उद्देश्य लोगों को अपनी बात कहने का अवसर देना है।

पीड़ित महिला का भी सुनाया उदाहरण

राहुल गांधी ने एक महिला का उदाहरण देते हुए कहा कि वह उनके पास अपनी बेटी के साथ हुई कथित घटना को लेकर अपनी पीड़ा बताने आई थी।

राहुल गांधी के मुताबिक, महिला की बेटी के साथ चार साल पहले उत्तराखंड में दुष्कर्म हुआ और उसकी हत्या कर दी गई। उन्होंने कहा कि महिला अपनी बात रखना चाहती थी, लेकिन व्यवस्था की ओर से उसे यह कहकर रोका गया कि इससे अव्यवस्था पैदा हो सकती है।

उन्होंने इस उदाहरण के जरिए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया और कहा कि लोगों को अपनी बात रखने का अधिकार मिलना चाहिए।

सरकार पर लगाया ‘आवाज दबाने’ का आरोप

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था लोगों की आवाज और राजनीतिक अभिव्यक्ति को सीमित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का काम ऐसी व्यवस्था को चुनौती देना है, जिसमें आम लोगों के लिए अपनी बात कहना मुश्किल हो जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष सरकार से सवाल पूछना जारी रखेगा और लोगों की आवाज को सामने लाने की कोशिश करेगा।

दो दिवसीय अधिवेशन में कई मुद्दों पर चर्चा

कांग्रेस का यह राष्ट्रीय अधिवेशन 12 अगस्त को नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में शुरू हुआ। इसमें सामाजिक संगठनों, कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों, कलाकारों, समुदाय प्रतिनिधियों और नागरिक समाज से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया।

अधिवेशन में अर्थव्यवस्था, रोजगार, गरीबी और असमानता के साथ-साथ पर्यावरण, विकास, विस्थापन, प्रदूषण, शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय, अधिकार, संस्कृति और शोध जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

RSS पर बयान से क्यों बढ़ी राजनीतिक हलचल?

राहुल गांधी का RSS को लेकर दिया गया बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कांग्रेस और RSS-BJP के बीच वैचारिक मतभेद लंबे समय से राजनीतिक बहस का हिस्सा रहे हैं।

ऐसे में राहुल गांधी का यह कहना कि विचारों में विरोध होने के बावजूद RSS की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा की जानी चाहिए, उनके भाषण का महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।

हालांकि, राहुल गांधी ने साथ ही सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि लोगों और छात्रों को अपनी बात रखने से रोका जा रहा है। ऐसे में उनके भाषण का केंद्रीय मुद्दा राजनीतिक विरोध से अधिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और असहमति के अधिकार पर केंद्रित रहा।

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राहुल गांधी के बयान ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि लोकतंत्र में राजनीतिक असहमति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा क्या होनी चाहिए। RSS को लेकर उनका बयान जहां राजनीतिक रूप से चर्चा में है, वहीं जंतर-मंतर के छात्र आंदोलन को लेकर उनकी सरकार पर की गई आलोचना आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक मंचों पर मुद्दा बन सकती है।

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