2020 से लापता है 14 वर्षीय किशोरी, घटनास्थल से मिली थी साइकिल, चप्पल और किताबें; सोशल मीडिया अकाउंट से मिले सुराग के बाद अब CBI जांच की मांग
रांची। झारखंड के बोकारो जिले से वर्ष 2020 में लापता हुई 14 वर्षीय किशोरी का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। करीब छह साल से लंबित इस मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से पूछा कि क्या उसे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपे जाने पर कोई आपत्ति है।
अदालत ने राज्य सरकार को इस संबंध में शपथ पत्र दाखिल कर अपना पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को होगी।
छह साल बाद भी नहीं मिला किशोरी का सुराग
बोकारो जिले की 14 वर्षीय किशोरी 16 अक्टूबर 2020 से लापता है। उसके लापता होने के बाद परिजनों की शिकायत पर पिंडराजोरा थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
जांच के दौरान पुलिस की सुपरविजन रिपोर्ट में मामले को अपहरण का मामला माना गया। घटनास्थल के आसपास से किशोरी की साइकिल, चप्पल और किताबें भी बरामद हुई थीं। इसके बावजूद इतने लंबे समय बाद भी किशोरी का पता नहीं चल पाया।
हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है कि यदि इस मामले को CBI को सौंपा जाता है तो सरकार को कोई आपत्ति है या नहीं।
अदालत ने सरकार को शपथ पत्र के माध्यम से अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 20 अगस्त को होगी, जिसमें सरकार का रुख सामने आ सकता है।
सोशल मीडिया अकाउंट से मिले अहम सुराग
पिछली सुनवाई में CID की ओर से अदालत को बताया गया था कि जांच के दौरान लापता किशोरी के सोशल मीडिया अकाउंट से कुछ सुराग मिले हैं।
जांच एजेंसी के मुताबिक, किशोरी का फेसबुक अकाउंट अब भी सक्रिय है। इन गतिविधियों से जुड़े डिजिटल डेटा की पड़ताल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
CID ने अदालत को बताया कि आगे की जांच के लिए Meta से संबंधित डेटा हासिल करना जरूरी हो सकता है।
क्रॉस-बॉर्डर एंगल की भी आशंका
जांच के दौरान CID ने मामले को संभावित रूप से क्रॉस-बॉर्डर मामला भी बताया है। यानी जांच एजेंसी को आशंका है कि मामले की कड़ी राज्य या देश की सीमा से बाहर तक जा सकती है।
इसी वजह से डिजिटल साक्ष्यों और सोशल मीडिया गतिविधियों की विस्तृत जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
CBI जांच पर क्यों बढ़ी उम्मीद?
पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की गंभीरता और लंबे समय से लंबित जांच को देखते हुए इसे CBI को सौंपने पर विचार करने की बात कही थी।
अदालत ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता प्रशांत पल्लव से भी CBI जांच के संबंध में केंद्र सरकार से निर्देश लेने को कहा था। साथ ही यह भी संकेत दिया गया था कि यदि CBI जांच करती है तो उसे राज्य पुलिस की सहायता की आवश्यकता पड़ सकती है।
अब 20 अगस्त पर नजर
छह साल से लापता किशोरी के मामले में अब अगली सुनवाई 20 अगस्त 2026 को होगी। फिलहाल हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि मामले की जांच CBI को सौंपने पर उसे कोई आपत्ति है या नहीं।
यदि सरकार की ओर से आपत्ति नहीं होती और अदालत CBI जांच का रास्ता साफ करती है, तो इतने वर्षों से लंबित इस मामले में जांच की दिशा बदल सकती है।
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