लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों को पर्यटन और विरासत संरक्षण से जोड़ने की योजना पर काम तेज हो गया है। राज्य सरकार प्रदेश के अलग-अलग जिलों में स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े महत्वपूर्ण स्थानों को ‘स्वतंत्रता संग्राम सर्किट’ के रूप में विकसित कर रही है।
इस पहल का उद्देश्य केवल पुराने स्मारकों का सौंदर्यीकरण करना नहीं, बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान की कहानी को आधुनिक माध्यमों से नई पीढ़ी और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों तक पहुंचाना है।
संग्रहालय से लेकर म्यूरल पार्क तक
स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े स्थलों पर स्मारक, संग्रहालय, म्यूरल पार्क, सूचना केंद्र और पर्यटक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इनमें स्थानीय इतिहास, स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान और महत्वपूर्ण घटनाओं को चित्रों तथा अन्य माध्यमों से प्रदर्शित करने की योजना है।
सरकार का मानना है कि ऐतिहासिक स्थलों को पर्यटन से जोड़ने से इनकी पहचान मजबूत होगी और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
मेरठ में 1857 की क्रांति से जुड़े स्थलों का विकास
मेरठ को इस सर्किट के प्रमुख केंद्रों में शामिल किया गया है। यहां 1857 की क्रांति से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों और शहीद स्मारक के पर्यटन विकास पर करीब 4.53 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
ग्राम भामौरी में बलिदानियों के स्मारक परिसर के सुंदरीकरण के साथ संग्रहालय विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य मेरठ के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े इतिहास को व्यवस्थित तरीके से पर्यटकों के सामने प्रस्तुत करना है।
वाराणसी में म्यूरल पार्क से दिखाई जाएगी वीरगाथा
वाराणसी के पिंडरा क्षेत्र के करखियांव गांव में शहीद हुए 26 लोगों की स्मृति में म्यूरल पार्क विकसित किया जा रहा है।
इस पार्क में चित्रों और दृश्य माध्यमों के जरिए बलिदानियों की कहानी और उनके योगदान को प्रदर्शित किया जाएगा। इससे आने वाले पर्यटक स्थानीय इतिहास को केवल पढ़ेंगे नहीं, बल्कि उसे दृश्य रूप में भी समझ सकेंगे।
मंगल पांडेय और वीर कुंवर सिंह से जुड़े स्थल भी सर्किट में
बलिया में मंगल पांडेय स्मारक और वीर कुंवर सिंह स्मारक को भी पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने की योजना पर काम किया जा रहा है।
इसके अलावा लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जन्मस्थली के विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य स्वतंत्रता आंदोलन और उससे जुड़े सामाजिक-राजनीतिक आंदोलनों की महत्वपूर्ण स्मृतियों को एक व्यापक पर्यटन नेटवर्क से जोड़ना है।
दूसरे जिलों में भी ऐतिहासिक स्थलों का विकास
स्वतंत्रता संग्राम सर्किट के तहत प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी स्मारकों और ऐतिहासिक स्थलों का विकास किया जा रहा है।
- शाहजहांपुर: जसवंतपुर में बलिदानी करतम सिंह पार्क का विकास।
- हरदोई: सेमरिया शहीद स्थल का विकास।
- बुलंदशहर: शहीद नाईक तुला सिंह स्मारक का सुंदरीकरण।
- लखनऊ: उमरिया मजरे मुसपिपरी में अमर शहीद राजा दिग्विजय सिंह स्मारक के विकास का प्रस्ताव।
- सहारनपुर: चकवाली गांव में ‘सुभाष चंद्र बोस भारत सरोवर’ को इको-टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित करने की योजना।
सहारनपुर के इस स्थल के विकास पर करीब 2.43 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
इतिहास के साथ पर्यटन और रोजगार पर जोर
उत्तर प्रदेश में धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन के साथ अब ऐतिहासिक पर्यटन को भी बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। स्वतंत्रता संग्राम सर्किट इसी रणनीति का हिस्सा है।
राज्य सरकार का मानना है कि यदि स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े स्थलों को बेहतर पर्यटक सुविधाओं के साथ विकसित किया जाए तो स्थानीय स्तर पर गाइड, परिवहन, खान-पान, हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं से जुड़े रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
युवा पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने की कोशिश
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े स्थलों को नया स्वरूप देने का उद्देश्य युवा पीढ़ी को स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान से परिचित कराना है।
स्मारकों, संग्रहालयों और म्यूरल पार्कों के जरिए इतिहास को ज्यादा रोचक और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश की जा रही है।
विरासत संरक्षण के साथ पर्यटन को बढ़ावा
‘स्वतंत्रता संग्राम सर्किट’ की योजना उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक स्थलों को एक व्यापक पर्यटन नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में कदम है। यदि परियोजनाएं पूरी होती हैं, तो प्रदेश के कई ऐसे स्थान पर्यटन मानचित्र पर प्रमुखता से उभर सकते हैं, जो अब तक स्थानीय स्तर तक ही सीमित रहे हैं।
News for Action Bharat के लिए यह रिपोर्ट उपलब्ध सार्वजनिक और विभागीय जानकारी के आधार पर तैयार की गई है।
