नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक चांदनी चौक इलाके में स्थित गौरी शंकर मंदिर आस्था और इतिहास दोनों के लिहाज से खास माना जाता है। मान्यता है कि यहां भगवान शिव और माता पार्वती के गौरी-शंकर स्वरूप के दर्शन और पूजा से विवाह एवं दांपत्य जीवन से जुड़ी बाधाओं के लिए श्रद्धालु प्रार्थना करते हैं।
करीब 800 वर्ष पुराना बताया जाता है मंदिर
दिल्ली पर्यटन से जुड़ी जानकारी के अनुसार, गौरी शंकर मंदिर को करीब 800 वर्ष पुराना बताया जाता है। मंदिर में स्थापित शिवलिंग को लेकर मान्यता है कि यह स्वयं प्रकट हुआ था। शिवलिंग के चारों ओर चांदी के नाग दिखाई देते हैं।
मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती की सुंदर प्रतिमा भी स्थापित है। इसी गौरी-शंकर स्वरूप के कारण मंदिर का नाम गौरी शंकर मंदिर पड़ा।
विवाह की मनोकामना लेकर पहुंचते हैं श्रद्धालु
धार्मिक मान्यता में भगवान शिव और माता पार्वती को आदर्श दंपती माना जाता है। इसी वजह से कई श्रद्धालु विवाह में आ रही अड़चनों या दांपत्य जीवन से जुड़ी मनोकामनाओं के लिए यहां पूजा-अर्चना करते हैं।
श्रद्धालु शिवलिंग पर जल चढ़ाकर भगवान शिव का स्मरण करते हैं और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हैं। हालांकि विवाह संबंधी लाभ धार्मिक आस्था और मान्यता का विषय हैं, इसकी कोई वैज्ञानिक गारंटी नहीं है।
मंदिर का इतिहास भी है खास
मान्यता के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना मराठा सैनिक आपा गंगाधर से जुड़ी है। कहा जाता है कि युद्ध में गंभीर रूप से घायल होने के बाद स्वस्थ होने पर उन्होंने ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के उद्देश्य से मंदिर का निर्माण कराया।
मंदिर की वर्तमान संरचना बाद के जीर्णोद्धार का परिणाम है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 1959 में सेठ जयपुरा ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था।
सावन में बढ़ जाती है श्रद्धालुओं की भीड़
सावन के महीने में भगवान शिव के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है। ऐसे में चांदनी चौक स्थित गौरी शंकर मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
मंदिर की धार्मिक महत्ता के साथ-साथ इसका ऐतिहासिक स्थान भी इसे दिल्ली आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाता है।
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चांदनी चौक का यह प्राचीन मंदिर दिल्ली की धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां श्रद्धालु आस्था के साथ भगवान शिव और माता पार्वती के दर्शन करने पहुंचते हैं।
