नई दिल्ली। संसद से MMDR Amendment Bill 2026 पारित होने के बाद भारत के खनन क्षेत्र में बड़े बदलाव का रास्ता साफ हो गया है। राज्यसभा ने 13 अगस्त को विधेयक को मंजूरी दी थी, जबकि इससे एक दिन पहले लोकसभा से इसे पास किया गया था। अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून का रूप लेगा।
वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने भी इस बदलाव का स्वागत किया है।
सबसे बड़ा बदलाव—कैप्टिव माइंस से बिक्री की 50% सीमा खत्म
नए प्रावधानों में कैप्टिव माइंस से निकाले गए खनिजों की बिक्री पर लगी 50% सीमा हटाने का प्रावधान है।
इसका मतलब है कि अपनी जरूरत के लिए खदान चलाने वाली कंपनियों को अतिरिक्त उत्पादन के इस्तेमाल और बिक्री में पहले की तुलना में ज्यादा लचीलापन मिलेगा। इससे माइनिंग कंपनियों के लिए कारोबार बढ़ाने और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
क्रिटिकल मिनरल्स पर भी जोर
नए कानून में लिथियम, ग्रेफाइट, निकेल, कोबाल्ट, सोना और चांदी जैसे खनिजों को मौजूदा माइनिंग लीज में शामिल करने का रास्ता आसान किया गया है।
खास बात यह है कि कुछ निर्धारित क्रिटिकल मिनरल्स को मौजूदा लीज में जोड़ने पर अतिरिक्त रकम नहीं देनी होगी। दूसरे खनिजों के लिए संबंधित रॉयल्टी और नीलामी वाली खदानों में लागू ऑक्शन प्रीमियम के नियम लागू होंगे।
एक्सप्लोरेशन फंड का दायरा बढ़ेगा
विधेयक में National Mineral Exploration Trust का दायरा बढ़ाने का भी प्रावधान है। इसे अब सिर्फ खनिजों की खोज तक सीमित रखने के बजाय खदानों और खनिजों के विकास से जुड़ी गतिविधियों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।
इसके लिए इसका नाम National Mineral Exploration and Development Trust किए जाने का प्रस्ताव है।
गहरी खदानों के लिए लीज क्षेत्र बढ़ाने का रास्ता
200 मीटर से ज्यादा गहराई में मिलने वाले खनिजों के मामले में लीज क्षेत्र को एक बार बढ़ाने की अनुमति देने का प्रावधान भी है।
- कंपोजिट लाइसेंस: क्षेत्र में 30% तक वृद्धि
- माइनिंग लीज: क्षेत्र में 10% तक वृद्धि
इससे गहरे और मुश्किल इलाकों में खनिज खोजने वाली परियोजनाओं को विस्तार की गुंजाइश मिल सकती है।
Mineral Exchange का भी प्रस्ताव
खनिजों और धातुओं की इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग के लिए Mineral Exchange को रजिस्टर और रेगुलेट करने वाली अथॉरिटी बनाने का प्रस्ताव है।
सरकार का तर्क है कि इससे खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता, कारोबार और बाजार आधारित व्यवस्था को बढ़ावा मिल सकता है।
क्यों खुश हैं अनिल अग्रवाल?
वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि भारत के भूमिगत संसाधनों में बड़ी क्षमता है और इन संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल से उत्पादन, रोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सकता है।
माइनिंग कंपनियों के लिए क्या बदलेगा?
MMDR Amendment Bill 2026 के बाद संभावित रूप से:
✅ कैप्टिव माइंस के अतिरिक्त खनिज की बिक्री में ज्यादा स्वतंत्रता
✅ क्रिटिकल मिनरल्स की खोज और उत्पादन को बढ़ावा
✅ मौजूदा लीज में कुछ नए खनिज जोड़ना आसान
✅ गहरी खदानों में लीज क्षेत्र बढ़ाने का विकल्प
✅ एक्सप्लोरेशन और मिनरल डेवलपमेंट के लिए बड़ा फंड
✅ इलेक्ट्रॉनिक मिनरल ट्रेडिंग के लिए नई व्यवस्था
Action Bharat News
MMDR Amendment Bill 2026 माइनिंग सेक्टर के लिए बड़ा नीतिगत बदलाव माना जा रहा है। खास तौर पर कैप्टिव माइंस से खनिज बिक्री की 50% सीमा हटने से बड़ी माइनिंग कंपनियों को अतिरिक्त उत्पादन के व्यावसायिक इस्तेमाल की ज्यादा गुंजाइश मिल सकती है। हालांकि वास्तविक असर कानून लागू होने के बाद नियमों और सरकार की अधिसूचनाओं पर निर्भर करेगा।
