2027 से पहले पश्चिमी यूपी में सुभासपा की एंट्री की तैयारी, ओम प्रकाश राजभर ने 9 सीटों पर प्रभारी घोषित किए

राजनीति

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सियासी दलों ने अपनी जमीन मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। इसी कड़ी में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) ने अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी अपना संगठनात्मक विस्तार शुरू कर दिया है।

सुभासपा अध्यक्ष और योगी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने पश्चिमी यूपी की 9 विधानसभा सीटों पर पार्टी प्रभारी नियुक्त किए हैं। इसे आगामी विधानसभा चुनाव में इन सीटों पर पार्टी की दावेदारी मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

इन 9 सीटों पर बनाई पकड़

सुभासपा ने जिन पश्चिमी यूपी की सीटों पर प्रभारी घोषित किए हैं, उनमें शामिल हैं—

  • मुरादाबाद ग्रामीण
  • शिकोहाबाद
  • थाना भवन
  • नजीबाबाद
  • बेहट
  • असमोली
  • मैनपुरी सदर
  • भोगांव
  • किशनी (सुरक्षित)

खास बात यह है कि मैनपुरी की तीनों सीटों पर संगठनात्मक जिम्मेदारी तय की गई है। मैनपुरी को समाजवादी पार्टी का मजबूत राजनीतिक आधार माना जाता है।

BJP से इन सीटों की मांग करेंगे राजभर

ओम प्रकाश राजभर का कहना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी इन सीटों पर भाजपा से गठबंधन के तहत टिकट की मांग करेगी

सुभासपा पहले से ही NDA का हिस्सा है और उत्तर प्रदेश में भाजपा के साथ गठबंधन में सरकार का हिस्सा है। ऐसे में पश्चिमी यूपी में संगठन का विस्तार गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे की बातचीत में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

पूर्वांचल के बाद पश्चिमी यूपी पर फोकस

सुभासपा का पारंपरिक राजनीतिक प्रभाव मुख्य रूप से पूर्वांचल में माना जाता है। पार्टी ने अब तक प्रदेश की 62 विधानसभा सीटों पर प्रभारी घोषित किए हैं, जिनमें सबसे ज्यादा 42 सीटें पूर्वांचल की हैं।

अब पश्चिमी यूपी की 9 सीटों पर प्रभारी नियुक्त करना यह संकेत देता है कि पार्टी अपने प्रभाव क्षेत्र को पूर्वांचल से आगे बढ़ाना चाहती है।

राजभर ने पश्चिमी यूपी में शुरू की सक्रियता

ओम प्रकाश राजभर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में राजनीतिक कार्यक्रम और रैलियां भी कर चुके हैं। पार्टी का लक्ष्य इन क्षेत्रों में संगठन खड़ा करने के साथ स्थानीय सामाजिक समीकरणों में अपनी जगह बनाना है।

राजभर की रणनीति केवल चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं है। पार्टी भाजपा नेतृत्व को यह संदेश देना चाहती है कि वह पश्चिमी यूपी में भी कुछ सीटों पर चुनावी ताकत खड़ी करने की क्षमता रखती है।

RLD के लिए भी बदल रहा है राजनीतिक समीकरण

दिलचस्प बात यह है कि NDA के एक अन्य सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल (RLD) ने भी पूर्वांचल में अपना आधार बढ़ाने की दिशा में गतिविधियां शुरू की हैं।

यानी 2027 से पहले NDA के सहयोगी दल अपने पारंपरिक क्षेत्रों से बाहर निकलकर नए इलाकों में राजनीतिक जमीन तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं।

2027 में सीट शेयरिंग बनेगी बड़ा मुद्दा

अब असली परीक्षा सीट बंटवारे को लेकर होगी।

सुभासपा ने 9 पश्चिमी यूपी सीटों पर प्रभारी नियुक्त करके अपनी संभावित दावेदारी का संकेत दे दिया है। लेकिन अंतिम तौर पर भाजपा गठबंधन में कितनी सीटें सहयोगी दलों को मिलेंगी, यह चुनाव से पहले होने वाली सीट शेयरिंग की बातचीत से तय होगा।

Action Bharat Political Take

ओम प्रकाश राजभर की रणनीति साफ दिखाई दे रही है—पूर्वांचल की अपनी पहचान को बनाए रखते हुए पश्चिमी यूपी में भी संगठन खड़ा करना और 2027 से पहले भाजपा के सामने ज्यादा सीटों की दावेदारी पेश करना।

अब देखना होगा कि भाजपा और उसके सहयोगी दलों के बीच सीटों का बंटवारा किस फॉर्मूले पर होता है और सुभासपा को पश्चिमी यूपी में वास्तव में कितनी सीटें मिलती हैं।

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