नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि शीघ्र सुनवाई का अधिकार केवल आरोपी का ही नहीं, बल्कि पीड़ित का भी महत्वपूर्ण अधिकार है। अदालत ने कहा कि मुकदमे में अत्यधिक देरी का समाज पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट का आदेश रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने हत्या मामले की सुनवाई स्थगित रखने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए ललितपुर की ट्रायल कोर्ट को सुनवाई जारी रखने और मामले को दो महीने के भीतर निपटाने का निर्देश दिया।
अदालत ने इस अधिकार को संविधान के अनुच्छेद 21 से जोड़ते हुए तेज सुनवाई को सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
गैंगस्टर्स एक्ट की आड़ में ट्रायल रोकना उचित नहीं
मामले में सात आरोपितों ने ट्रायल कोर्ट में आवेदन देकर हत्या मामले की सुनवाई रोकने की मांग की थी। उनका तर्क था कि वे गैंगस्टर्स एक्ट के तहत भी आरोपी हैं और उस मामले की सुनवाई को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत के अनुसार, अगर ऐसी व्याख्या मान ली जाए तो गैंगस्टर्स एक्ट की धारा 12 का इस्तेमाल दूसरे मामलों की सुनवाई में देरी के लिए किया जा सकता है।
क्या है पूरा मामला?
मृतक के भाई ने सितंबर 2023 में नौ लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। पुलिस ने सात आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। बाद में मामले की सुनवाई को गैंगस्टर्स एक्ट के तहत चल रही कार्यवाही के कारण रोकने की मांग की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी अन्य कानूनी कार्यवाही के लंबित होने को हत्या जैसे गंभीर मामले की सुनवाई अनिश्चितकाल तक टालने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
ACTION BHARAT | LEGAL DESK
सुप्रीम कोर्ट का संदेश साफ: न्याय में देरी सिर्फ आरोपी के अधिकार का सवाल नहीं—पीड़ित को भी शीघ्र सुनवाई का संवैधानिक अधिकार है।
