मोदी कैबिनेट के 5 बड़े फैसले: रेलवे को मिलेगी नई रफ्तार, बिहार में 82 किमी हाईवे होगा 4-लेन; ₹13,041 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी

राष्ट्रीय

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने से जुड़े 5 बड़े फैसलों पर मुहर लगाई गई। इनमें चार मल्टीट्रैकिंग रेल परियोजनाएं और बिहार में नेशनल हाईवे-22 के एक महत्वपूर्ण हिस्से को चार लेन में अपग्रेड करने की योजना शामिल है।

इन परियोजनाओं पर कुल करीब 13,041 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सरकार के मुताबिक इनसे पूर्वी और दक्षिणी भारत में रेल एवं सड़क कनेक्टिविटी मजबूत होगी, माल ढुलाई की क्षमता बढ़ेगी और कई राज्यों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी।

1. चार राज्यों में चार बड़ी रेल परियोजनाएं

कैबिनेट ने करीब 9,450 करोड़ रुपये की लागत वाली चार मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनसे लगभग 410 किलोमीटर अतिरिक्त रेल लाइनें विकसित होंगी।

परियोजनाएं पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु से जुड़ी हैं। इन्हें 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

सरकार के अनुसार इससे यात्री ट्रेनों के साथ-साथ कोयला, लौह अयस्क, स्टील और अन्य माल की आवाजाही भी तेज होगी।

2. खड़गपुर-भद्रक के बीच बनेगी 173 किमी चौथी लाइन

सबसे बड़ी परियोजनाओं में पश्चिम बंगाल के खड़गपुर से ओडिशा के भद्रक/रानीताल के बीच करीब 173 किलोमीटर लंबी चौथी लाइन शामिल है।

इस परियोजना पर लगभग 3,352 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

यह रेल कॉरिडोर बालेश्वर और रूपसा होते हुए भद्रक तक जाता है। नई लाइन बनने से मौजूदा रेल मार्ग पर ट्रेनों का दबाव कम करने और यात्री व मालगाड़ियों की आवाजाही को अधिक सुचारु बनाने में मदद मिलेगी।

परियोजना में दो बड़े, 41 मुख्य और 169 छोटे पुलों का निर्माण भी शामिल है।

3. भद्रक-हरिदासपुर के बीच 75 किमी चौथी लाइन

कैबिनेट ने भद्रक-हरिदासपुर के बीच करीब 75 किलोमीटर लंबी चौथी लाइन को भी मंजूरी दी है।

यह कॉरिडोर कोयला, बिजली, लौह अयस्क, स्टील और चूना पत्थर जैसी वस्तुओं की ढुलाई के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

नई लाइन से कटक और आसपास के व्यस्त रेल हिस्सों पर ट्रेनों का दबाव कम होने की उम्मीद है। इस परियोजना में 18 बड़े और 106 छोटे पुल बनाए जाने का प्रावधान है।

4. आंध्र प्रदेश-तमिलनाडु में 90 किमी रेल विस्तार

आंध्र प्रदेश के गुम्मिडिपुंडी से तमिलनाडु के गुडुर के बीच करीब 90 किलोमीटर की तीसरी और चौथी लाइन विकसित की जाएगी।

इससे दक्षिण भारत के इस महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर की क्षमता बढ़ेगी और बढ़ते यात्री तथा माल यातायात को संभालने में मदद मिलेगी।

5. कटक-पारादीप के बीच 72 किमी अतिरिक्त रेल लाइन

ओडिशा के कटक से पारादीप (बड़ाबंधा) के बीच करीब 72 किलोमीटर की तीसरी और चौथी लाइन भी बनाई जाएगी।

पारादीप बंदरगाह से माल की आवाजाही के लिहाज से यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। अतिरिक्त रेल लाइन बनने से बंदरगाह से आने-जाने वाले माल की ढुलाई क्षमता बढ़ने और लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

60 लाख लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी

सरकार के अनुसार चारों रेल परियोजनाएं आठ जिलों को कवर करेंगी और करीब 6,448 गांवों की लगभग 60 लाख आबादी को बेहतर रेल कनेक्टिविटी का लाभ मिल सकता है।

इन परियोजनाओं से सालाना करीब 7.6 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता बनने का अनुमान है।

रेल परिवहन की क्षमता बढ़ने से सड़कों पर भारी वाहनों का दबाव और लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

बिहार को भी बड़ा तोहफा—NH-22 होगा 4-लेन

कैबिनेट ने बिहार के लिए भी बड़ा फैसला किया है। एनएच-22 के मुजफ्फरपुर-सितामढ़ी-सोनबरसा खंड के करीब 82.578 किलोमीटर हिस्से को चार लेन में अपग्रेड करने की मंजूरी दी गई है।

इस परियोजना पर करीब 3,590.73 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

इससे मुजफ्फरपुर, रुन्नी सैदपुर, डुमरा, भुतही और सोनबरसा सहित कई इलाकों में यातायात व्यवस्था बेहतर होने और जाम कम होने की उम्मीद है।

बागमती नदी पर बनेगा 340 मीटर लंबा पुल

NH-22 परियोजना में सात बड़े पुल, तीन रेलवे ओवरब्रिज और दो फ्लाईओवर बनाए जाने का प्रावधान है।

इनमें बागमती नदी पर प्रस्तावित करीब 340 मीटर लंबा पुल भी शामिल है।

सरकारी योजना के मुताबिक इस मार्ग को करीब 80 किलोमीटर प्रति घंटे की औसत गति को ध्यान में रखकर विकसित किया जाएगा।

उद्योग और बंदरगाहों को भी फायदा

नई रेल लाइनों का सबसे बड़ा लाभ सिर्फ यात्रियों को नहीं, बल्कि औद्योगिक और माल परिवहन क्षेत्र को भी मिलने की उम्मीद है।

झारखंड के खनिज और औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला कोयला, लौह अयस्क और स्टील ओडिशा तथा पश्चिम बंगाल के औद्योगिक केंद्रों और बंदरगाहों तक पहुंचता है।

अतिरिक्त रेल लाइनें बनने से मालगाड़ियों को यात्री ट्रेनों के कारण कम इंतजार करना पड़ेगा। इससे माल ढुलाई की गति और औद्योगिक सप्लाई चेन बेहतर हो सकती है।

पर्यावरण को भी फायदा होने का अनुमान

सरकार के मुताबिक इन रेल परियोजनाओं से हर साल करीब 13 करोड़ लीटर तेल की बचत और लगभग 65 करोड़ किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन में कमी का अनुमान है।

सरकारी आकलन में यह कमी करीब 2.6 करोड़ पौधे लगाने के बराबर बताई गई है।

एक नजर में कैबिनेट के बड़े फैसले

  • कुल अनुमानित लागत: ₹13,041 करोड़
  • रेल परियोजनाएं: 4
  • अतिरिक्त रेल लाइनें: करीब 410 किमी
  • बिहार NH-22: 82.578 किमी, चार लेन
  • लक्ष्य: रेल और सड़क नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना
  • फायदा: यात्री परिवहन, माल ढुलाई, उद्योग और लॉजिस्टिक्स
  • बिहार: मुजफ्फरपुर-सितामढ़ी-सोनबरसा कॉरिडोर को बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर बूस्ट

ACTION BHARAT की नजर

मोदी कैबिनेट के इन फैसलों में खास फोकस पूर्वी भारत की कनेक्टिविटी, माल ढुलाई और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता बढ़ाने पर दिखाई देता है। बिहार में NH-22 का चार-लेन विस्तार जहां उत्तर बिहार की सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत कर सकता है, वहीं बंगाल-ओडिशा के नए रेल कॉरिडोर औद्योगिक और बंदरगाह आधारित माल ढुलाई के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

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