महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी चलानी है तो मराठी का ‘वर्किंग नॉलेज’ जरूरी, पहले नोटिस; नहीं सीखी तो लाइसेंस पर कार्रवाई

राज्य

मुंबई। महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ऐप आधारित कैब चलाने वाले ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक यानी ‘वर्किंग नॉलेज’ अनिवार्य कर दिया गया है। राज्य सरकार ने अब इस नियम के अनुपालन की जांच तेज करने का फैसला किया है।

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के मुताबिक जिन ड्राइवरों के पास जरूरी प्रमाणपत्र नहीं है या जिन्हें मराठी का अपेक्षित व्यावहारिक ज्ञान नहीं है, उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाएगी। हालांकि, पहली ही जांच में लाइसेंस रद्द नहीं होगा। पहले नोटिस देकर मराठी सीखने और नियम का पालन करने का अवसर दिया जाएगा।

क्या है नया नियम?

महाराष्ट्र मोटर वाहन नियमों में किए गए संशोधनों के तहत यात्री परिवहन से जुड़े व्यावसायिक वाहन चालकों और परमिटधारकों के लिए मराठी का व्यावहारिक ज्ञान जरूरी किया गया है।

इसमें ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और इलेक्ट्रॉनिक मीटर वाली मोटर कैब समेत ऐप आधारित कैब सेवाओं से जुड़े चालक भी दायरे में आते हैं।

सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य ड्राइवरों और यात्रियों के बीच बेहतर संवाद सुनिश्चित करना है।

मराठी नहीं आती तो क्या होगा?

सरकार की ओर से बताई गई प्रक्रिया के मुताबिक कार्रवाई चरणबद्ध होगी।

पहला चरण: RTO की जांच में अगर चालक के पास जरूरी प्रमाणपत्र नहीं है या मराठी का अपेक्षित व्यावहारिक ज्ञान नहीं पाया जाता है तो उसे नोटिस दिया जाएगा।

दूसरा चरण: चालक को मराठी सीखने और अपनी स्थिति सुधारने के लिए समय दिया जाएगा।

तीसरा चरण: तय अवधि के बाद भी नियम का पालन नहीं करने पर ड्राइविंग लाइसेंस और बैज को निलंबित करने जैसी कार्रवाई हो सकती है। परिवहन मंत्री ने तीन महीने के निलंबन की बात कही है।

आगे: लगातार अनुपालन न होने की स्थिति में परमिट या लाइसेंस पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

यानी ‘मराठी नहीं आती = तुरंत लाइसेंस रद्द’ कहना पूरी प्रक्रिया को सही तरीके से नहीं दर्शाता।

RTO की उड़न टीमें करेंगी जांच

परिवहन विभाग ने पूरे महाराष्ट्र में विशेष जांच अभियान चलाने की घोषणा की है। RTO की उड़न टीमें ड्राइवरों के मराठी ज्ञान और जरूरी प्रमाणपत्रों की जांच करेंगी।

नए बैज जारी करने की प्रक्रिया में भाषा सत्यापन की वीडियोग्राफी भी शुरू की जा रही है, ताकि जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।

करीब छह लाख ड्राइवरों पर असर

इस नियम का असर महाराष्ट्र के बड़े यात्री परिवहन नेटवर्क पर पड़ सकता है। मुंबई महानगर क्षेत्र समेत राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी संख्या में ऑटो और टैक्सी चालक काम करते हैं।

सरकार का कहना है कि ड्राइवरों को नियमों का पालन करने में मदद देने के लिए मराठी सीखने के प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए गए हैं।

रिपोर्टों के अनुसार बड़ी संख्या में ड्राइवर इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल हो चुके हैं, हालांकि कुछ चालक अभी प्रमाणन प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए हैं।

ड्राइवर यूनियनों की क्या चिंता है?

इस नियम को लेकर कुछ ड्राइवर यूनियनों ने चिंता जताई है। उनका सवाल है कि ‘वर्किंग नॉलेज’ की व्यावहारिक परीक्षा किस स्पष्ट मानक के आधार पर होगी।

यूनियनों को आशंका है कि अगर भाषा दक्षता की जांच के लिए स्पष्ट और समान मानक नहीं होंगे तो RTO स्तर पर मनमानी या भ्रष्टाचार की गुंजाइश पैदा हो सकती है।

सरकार की ओर से जांच प्रक्रिया की वीडियोग्राफी जैसे कदमों को इसी तरह की चिंताओं को दूर करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

सरकार का तर्क क्या है?

महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि यह कदम किसी खास भाषा या राज्य से आने वाले लोगों को निशाना बनाने के लिए नहीं है। सरकार इसे यात्री और चालक के बीच बेहतर संवाद तथा सार्वजनिक परिवहन सेवा को सुचारु बनाने से जोड़ रही है।

मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा है कि महाराष्ट्र में व्यावसायिक यात्री परिवहन सेवा देने वालों के लिए स्थानीय भाषा का व्यावहारिक ज्ञान जरूरी है।

नियम से जुड़े 5 बड़े सवाल

1. ‘वर्किंग नॉलेज’ मराठी का स्तर कैसे तय होगा?

2. क्या सभी ड्राइवरों के लिए एक समान भाषा परीक्षा होगी?

3. क्या दूसरे राज्यों से आने वाले ड्राइवरों को पर्याप्त प्रशिक्षण मिलेगा?

4. भाषा जांच में पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित होगी?

5. क्या नियम यात्रियों की सुविधा बढ़ाएगा या ड्राइवरों पर अतिरिक्त दबाव डालेगा?

ACTION BHARAT की सीधी बात

महाराष्ट्र में मराठी का व्यावहारिक ज्ञान अब ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों के लिए गंभीर नियामकीय शर्त बन चुका है। लेकिन कार्रवाई का मतलब तत्काल लाइसेंस रद्द होना नहीं है। पहले जांच, फिर नोटिस और सुधार का अवसर—इसके बाद अनुपालन न होने पर निलंबन या आगे की कार्रवाई की व्यवस्था है।

ACTION BHARAT | नियम समझिए, खबर पूरी पढ़िए।

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