नई दिल्ली | (Action Bharat) यमुनापार के कई इलाकों में रात के समय पेड़ों की कटाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि बिल्डरों को फायदा पहुंचाने के लिए पेड़ों की अवैध कटाई कराई जा रही है, जबकि वन विभाग, नगर निगम और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि, सरकारी विभागों और अधिकारियों पर मिलीभगत तथा पैसे लेने के आरोप फिलहाल आरोप मात्र हैं और इनकी स्वतंत्र जांच से पुष्टि होना बाकी है।
🌳 प्रीत विहार में रात 2 बजे काटा गया पेड़
प्रीत विहार डी-ब्लॉक में अधिवक्ता आदित्य जैन की शिकायत के मुताबिक, उनके पड़ोस में डी-110 के बाहर वर्षों पुराना पेड़ था। 12 अगस्त की रात करीब 2 बजे कुछ लोगों ने कथित तौर पर पेड़ काट दिया।
पेड़ की टहनियां बिजली के तारों पर जा गिरीं। इससे बिजली का खंभा भी क्षतिग्रस्त हुआ और इलाके में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई।
शिकायत के अनुसार, वहां मौजूद सुरक्षा गार्ड बाल-बाल बच गया। पेड़ गिरने से मकान के बाहर लगा शेड और लोहे का जाल भी क्षतिग्रस्त हुआ।
🚨 पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया
घटना की शिकायत के बाद प्रीत विहार थाना पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
शिकायतकर्ता का सवाल है कि 12 अगस्त को घटना होने के बावजूद 21 अगस्त तक पेड़ काटने वालों की पहचान क्यों नहीं हो सकी।
उनका दावा है कि इलाके में लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग सीमित अवधि तक ही सुरक्षित रहती है। ऐसे में जांच में देरी होने पर महत्वपूर्ण साक्ष्य मिटने की आशंका जताई गई है।
💰 चार लाख रुपये में पेड़ काटने का दावा
रिपोर्ट में पुलिस सूत्रों के हवाले से विवेक विहार सी-ब्लॉक में एक नीम के पेड़ को चार लाख रुपये में कटवाने का दावा किया गया है।
रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि रकम सरकारी विभागों के अधिकारियों के बीच बांटे जाने की बात कही गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही जांच के बाद ही तय हो सकती है।
📍 कई इलाकों में सामने आ रही शिकायतें
रिपोर्ट के मुताबिक पेड़ों की कटाई को लेकर विवेक विहार, प्रीत विहार, चांदबाग, मयूर विहार और आनंद विहार सहित यमुनापार के कई इलाकों में शिकायतें सामने आई हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर पेड़ सरकारी जमीन, सड़क किनारे या सार्वजनिक स्थान पर लगे हैं तो उनकी कटाई के लिए अनुमति किसने दी और मौके पर जिम्मेदार विभागों की निगरानी कहां थी?
🏗️ बिल्डरों से जुड़ा एंगल भी जांच के घेरे में
स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ स्थानों पर निर्माण और प्रॉपर्टी गतिविधियों को आसान बनाने के लिए पेड़ों को हटाया जा रहा है।
ऐसे मामलों में यह जांच जरूरी है कि—
- पेड़ काटने की अनुमति ली गई थी या नहीं?
- अनुमति किस विभाग ने दी?
- पेड़ सरकारी जमीन पर था या निजी संपत्ति में?
- कटाई किस व्यक्ति या एजेंसी ने कराई?
- कटाई के बाद लकड़ी कहां ले जाई गई?
- CCTV फुटेज और कॉल/वाहन रिकॉर्ड से आरोपियों की पहचान हुई या नहीं?
🏛️ जिम्मेदारी किसकी?
पूर्वी जोन के उद्यान विभाग प्रमुख रजित के अनुसार, पेड़ों की छंटाई का काम निगम और उनकी देखरेख वन विभाग से संबंधित है।
ऐसे में किसी सार्वजनिक स्थान पर पेड़ काटे जाने की स्थिति में संबंधित विभागों के बीच जिम्मेदारी और अनुमति की प्रक्रिया की जांच अहम हो जाती है।
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