पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम ने लगाई अदालत में हाजिरी, हाई कोर्ट के आदेश पर अप्रैल में फरदिकोट से चंडीगढ़ ट्रांसफर हुआ था मुकदमा; SIT की जांच और चार्जशीट भी रही है चर्चा में
चंडीगढ़। पंजाब के चर्चित कोटकपूरा गोलीकांड मामले में शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल गुरुवार को चंडीगढ़ जिला अदालत में पेश हुए। करीब 11 साल पुराने इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश के बाद मुकदमे की कार्यवाही फरदिकोट से चंडीगढ़ स्थानांतरित की गई है।
सुखबीर बादल अदालत में अपनी हाजिरी दर्ज कराने पहुंचे। उनके साथ उनके वकील राजेश कुमार राय भी मौजूद रहे। इससे पहले अदालत ने उन्हें विदेश जाने की अनुमति दी थी और विदेश से लौटने के बाद उन्होंने अदालत में पेश होकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
2015 की घटना से जुड़ा है पूरा मामला
कोटकपूरा गोलीकांड की जड़ें वर्ष 2015 में हुई धार्मिक बेअदबी की घटनाओं और उसके बाद हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी हैं।
1 जून 2015 को फरीदकोट के बरगाड़ी और बुर्ज जवाहर सिंह वाला क्षेत्र में श्री गुरु ग्रंथ साहिब से जुड़ी बेअदबी की घटना सामने आई थी। इसके बाद सितंबर और अक्टूबर 2015 में भी बेअदबी से संबंधित घटनाएं हुईं।
इन घटनाओं के विरोध में बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन कर रहे थे। 14 अक्टूबर 2015 को कोटकपूरा और बहिबल कलां में पुलिस कार्रवाई के दौरान गोलीबारी हुई।
बहिबल कलां गोलीकांड में दो प्रदर्शनकारियों की मौत हुई थी, जबकि कोटकपूरा में भी कई प्रदर्शनकारी घायल हुए थे। कोटकपूरा गोलीकांड की पुलिस कार्रवाई और उसके पीछे की परिस्थितियां बाद में पंजाब की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गईं।
सुखबीर बादल समेत कई बड़े नाम आरोपित
मामले की जांच के दौरान तत्कालीन पंजाब सरकार और पुलिस प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में आई। बाद में पंजाब पुलिस की विशेष जांच टीम यानी SIT ने पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, तत्कालीन उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री सुखबीर सिंह बादल, पूर्व DGP सुमेध सिंह सैनी तथा कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के नाम चार्जशीट में शामिल किए।
फरवरी 2023 में ADGP एलके यादव की अगुवाई वाली SIT ने करीब 7,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें सुखबीर बादल और सुमेध सिंह सैनी समेत कई अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए थे।
इसके बाद अप्रैल 2023 में SIT ने करीब 2,400 पन्नों की पूरक चार्जशीट भी दाखिल की थी। इसमें अतिरिक्त साक्ष्यों के साथ अभियोजन के लिए सरकार की मंजूरी से संबंधित दस्तावेज भी शामिल किए गए थे।
SIT ने लगाए थे गंभीर आरोप
2023 की चार्जशीट में SIT ने तत्कालीन उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री सुखबीर सिंह बादल और तत्कालीन DGP सुमेध सिंह सैनी को कथित साजिश में प्रमुख भूमिका वाला बताया था। जांच एजेंसी के आरोपों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया गया।
हालांकि, ये जांच एजेंसी द्वारा लगाए गए आरोप हैं और अदालत में आरोपों का अंतिम न्यायिक निर्धारण होना बाकी है। किसी आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होना अपने आप में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है।
प्रकाश सिंह बादल का निधन, उनके खिलाफ कार्रवाई बंद
इस मामले में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का नाम भी आरोपितों में शामिल था। उनके निधन के बाद उनके खिलाफ चल रही कानूनी कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
वहीं सुखबीर सिंह बादल और अन्य आरोपितों के खिलाफ मामले की कार्यवाही जारी है।
फरदिकोट से चंडीगढ़ क्यों पहुंचा मामला?
कोटकपूरा गोलीकांड से जुड़े मामलों की सुनवाई पहले फरदिकोट में चल रही थी। बाद में आरोपित पुलिस अधिकारियों की ओर से मामले को चंडीगढ़ स्थानांतरित करने की मांग की गई।
अप्रैल 2026 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कोटकपूरा गोलीकांड से जुड़े दो FIR की सुनवाई फरदिकोट से चंडीगढ़ की सेशन कोर्ट में ट्रांसफर करने का आदेश दिया। हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद आरोपितों को चंडीगढ़ अदालत में पेश होने के निर्देश दिए गए।
मई 2026 में फरदिकोट अदालत ने भी सभी आरोपितों को चंडीगढ़ अदालत के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया था। इसके बाद सुखबीर बादल समेत अन्य आरोपित चंडीगढ़ में पेश हुए।
जांच अभी भी बनी हुई है अहम मुद्दा
मामले में केवल ट्रायल का स्थान ही नहीं बदला है, बल्कि जांच की स्थिति को लेकर भी अदालत में सवाल उठ चुके हैं।
जून 2026 में चंडीगढ़ अदालत ने SIT से मामले में किसी भी लंबित जांच के संबंध में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था। अदालत ने रिकॉर्ड की समीक्षा करते हुए पाया था कि आगे की जांच को लेकर पहले भी स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन पूरी स्थिति स्पष्ट करने वाली रिपोर्ट रिकॉर्ड पर नहीं आई थी।
अदालत ने अभियोजन पक्ष को लंबित जांच की स्थिति स्पष्ट करने वाली रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।
विदेश जाने के लिए भी ली थी अदालत की अनुमति
सुखबीर सिंह बादल ने जुलाई 2026 में अदालत से विदेश यात्रा की अनुमति मांगी थी। चंडीगढ़ की अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने उन्हें विदेश जाने की अनुमति दी थी।
विदेश से लौटने के बाद अब उन्होंने अदालत में पेश होकर अपनी हाजिरी दर्ज कराई है।
राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मामला
कोटकपूरा गोलीकांड पंजाब की राजनीति में लंबे समय से संवेदनशील मुद्दा रहा है। धार्मिक बेअदबी की घटनाओं और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर पंजाब में बड़े स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया हुई थी।
मामले में तत्कालीन अकाली-भाजपा सरकार के दौरान सत्ता और पुलिस प्रशासन की भूमिका को लेकर विपक्ष ने लगातार सवाल उठाए। दूसरी ओर, मामले में नामजद नेताओं और अधिकारियों की ओर से आरोपों का विरोध किया जाता रहा है।
अब चूंकि मामले की सुनवाई चंडीगढ़ की अदालत में हो रही है, इसलिए आगे होने वाली प्रत्येक सुनवाई, लंबित जांच की स्थिति और अदालत में पेश होने वाले साक्ष्य पर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर नजर रहेगी।
11 साल बाद भी इंसाफ का इंतजार
2015 की घटना को करीब 11 साल बीत चुके हैं। इस दौरान जांच एजेंसियां बदलीं, SIT ने कई चरणों में चार्जशीट और पूरक चालान पेश किए तथा मामला अलग-अलग अदालतों में आगे बढ़ा। अब हाई कोर्ट के आदेश के बाद इसकी सुनवाई चंडीगढ़ में हो रही है।
सुखबीर सिंह बादल की ताजा पेशी इसी लंबी कानूनी प्रक्रिया की अगली कड़ी है। मामले में आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत द्वारा साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर किया जाना है।
