उत्तराखंड में 2027 की तैयारी तेज, नितिन नवीन 9-10 सितंबर को कुमाऊं दौरे पर; हारी और कम अंतर वाली सीटों पर भाजपा का फोकस

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देहरादून। उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने संगठन और चुनावी रणनीति को जमीन पर मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 9 और 10 सितंबर को कुमाऊं के दौरे पर रहेंगे। उनके दौरे को पार्टी की चुनावी तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नितिन नवीन के प्रवास के दौरान सीटवार राजनीतिक स्थिति, संगठन की सक्रियता, बूथ स्तर की कमजोरियां और पिछली बार हारने वाली सीटों को लेकर फीडबैक लिया जा सकता है। पार्टी की रणनीति केवल कांग्रेस के कब्जे वाली सीटों पर वापसी तक सीमित नहीं है, बल्कि जिन सीटों पर भाजपा बहुत कम अंतर से जीती थी, उन्हें भी मजबूत करने पर जोर रहेगा।

29 विधानसभा सीटों वाले कुमाऊं पर भाजपा की खास नजर

कुमाऊं क्षेत्र में विधानसभा की कुल 29 सीटें हैं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इनमें से 18 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस को 11 सीटों पर सफलता मिली थी।

2027 के चुनाव को देखते हुए भाजपा के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ कांग्रेस के कब्जे वाली सीटों पर दोबारा जीत हासिल करने की कोशिश होगी, वहीं दूसरी ओर पिछली बार कम अंतर से जीती गई सीटों पर अपनी स्थिति मजबूत करना पार्टी की प्राथमिकता रहेगी।

इसी रणनीति के तहत राष्ट्रीय अध्यक्ष का कुमाऊं दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हल्द्वानी में संगठन की बैठकों के बीच होगा दौरा

नितिन नवीन का कुमाऊं दौरा हल्द्वानी में प्रदेश कार्यसमिति और कोर कमेटी की बैठक के बीच हो रहा है। ऐसे में संगठनात्मक गतिविधियों के साथ चुनावी रणनीति पर भी व्यापक चर्चा की संभावना है।

पार्टी नेतृत्व कुमाऊं की उन सीटों की स्थिति का आकलन कर सकता है जहां भाजपा को पिछले चुनाव में हार मिली थी या जहां जीत का अंतर बहुत कम रहा था।

इस दौरान स्थानीय संगठन से यह जानने की कोशिश की जाएगी कि संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी की जमीनी स्थिति क्या है और किन क्षेत्रों में संगठन को और मजबूत करने की जरूरत है।

अल्मोड़ा और द्वाराहाट पर विशेष नजर

भाजपा के लिए अल्मोड़ा और द्वाराहाट ऐसी सीटें हैं, जहां पिछली विधानसभा में बेहद मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा था।

वर्ष 2022 में भाजपा अल्मोड़ा सीट पर महज 127 वोट से चुनाव हार गई थी। वहीं द्वाराहाट में हार का अंतर 182 वोट रहा था।

इतने कम अंतर से मिली हार ने इन दोनों सीटों को भाजपा के लिए महत्वपूर्ण बना दिया है। पार्टी इन सीटों पर बूथ स्तर की कमियों, स्थानीय राजनीतिक समीकरण और संभावित उम्मीदवारों की स्वीकार्यता का आकलन कर सकती है।

2027 में इन सीटों पर मामूली वोटों का अंतर भी परिणाम बदल सकता है। इसलिए संगठन स्तर पर अभी से माइक्रो मैनेजमेंट की तैयारी की जा रही है।

धारचूला और बाजपुर में भी वापसी की उम्मीद

भाजपा की नजर केवल अल्मोड़ा और द्वाराहाट पर नहीं है। धारचूला और बाजपुर जैसी सीटों को भी पार्टी संभावनाओं वाली सीटों के रूप में देख रही है।

वर्ष 2022 में धारचूला में भाजपा की हार का अंतर करीब 1100 वोट था, जबकि बाजपुर में यह अंतर करीब 1600 वोट रहा।

हालांकि इन सीटों पर अल्मोड़ा और द्वाराहाट की तरह बेहद मामूली अंतर नहीं था, लेकिन पार्टी के लिए यहां भी वापसी की गुंजाइश मानी जा रही है।

वहीं हल्द्वानी, किच्छा और नानकमत्ता जैसी सीटों पर पिछली हार का अंतर अपेक्षाकृत अधिक रहा था। इन विधानसभा क्षेत्रों के लिए पार्टी को अलग और अधिक प्रभावी रणनीति तैयार करनी होगी।

कम अंतर से जीती सीटें भी भाजपा की चिंता

2027 की तैयारी में भाजपा केवल उन सीटों पर ध्यान नहीं दे रही जहां उसे हार मिली थी। पार्टी के सामने उन विधानसभा क्षेत्रों को बचाने की भी चुनौती है, जहां पिछली बार जीत का अंतर बहुत कम रहा था।

गदरपुर इसका प्रमुख उदाहरण है। वर्ष 2022 में भाजपा प्रत्याशी अरविंद पांडे ने कांग्रेस प्रत्याशी को करीब 1120 वोटों के अंतर से हराया था।

गदरपुर में भाजपा को 52,841 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी को 51,721 वोट मिले। यानी दोनों दलों के बीच मुकाबला काफी करीबी रहा था।

ऐसी सीटों पर पार्टी को आशंका है कि यदि स्थानीय समीकरण में मामूली बदलाव भी हुआ तो मुकाबला कड़ा हो सकता है। इसलिए भाजपा इन सीटों पर अभी से संगठनात्मक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

रानीखेत, डीडीहाट और सल्ट समेत कई सीटों पर माइक्रो मैनेजमेंट

कुमाऊं में रानीखेत, डीडीहाट, सल्ट और कपकोट जैसी सीटों पर भी पिछली जीत का अंतर बहुत बड़ा नहीं रहा था।

ऐसे विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा के सामने अपनी जीत को दोहराने के साथ-साथ जीत का अंतर बढ़ाने की चुनौती होगी।

पार्टी की रणनीति में बूथ स्तर तक संगठन की सक्रियता, स्थानीय नेताओं की भूमिका, मतदाताओं के बीच संपर्क और विधानसभा क्षेत्र के स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता दिए जाने की संभावना है।

भाजपा के सामने दोहरा लक्ष्य

कुमाऊं में भाजपा की मौजूदा रणनीति को broadly दो हिस्सों में देखा जा सकता है—

पहला लक्ष्य: कांग्रेस के कब्जे वाली सीटों पर वापसी करना।

दूसरा लक्ष्य: पिछली बार कम अंतर से जीती गई सीटों को सुरक्षित करना और वहां जीत का अंतर बढ़ाना।

इस लिहाज से अल्मोड़ा, द्वाराहाट, धारचूला, बाजपुर, गदरपुर, रानीखेत, डीडीहाट, सल्ट, कपकोट, हल्द्वानी, किच्छा और नानकमत्ता जैसी सीटें पार्टी की प्राथमिकता में रह सकती हैं।

उम्मीदवार और स्थानीय समीकरण भी होंगे अहम

चुनावी रणनीति बनाते समय केवल संगठन की मजबूती ही नहीं, बल्कि स्थानीय समीकरण और संभावित प्रत्याशी की स्वीकार्यता भी महत्वपूर्ण होगी।

खासकर अल्मोड़ा और द्वाराहाट जैसी सीटों पर जहां पिछले चुनाव में हार का अंतर कुछ सौ वोटों तक सीमित रहा, वहां प्रत्याशी चयन और बूथ प्रबंधन का सीधा असर चुनाव परिणाम पर पड़ सकता है।

भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे के दौरान इन सभी पहलुओं पर स्थानीय नेताओं और संगठन से फीडबैक लेने की कोशिश कर सकती है।

2027 के लिए अभी से चुनावी मोड में संगठन

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन भाजपा ने संगठन को धीरे-धीरे चुनावी मोड में लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नितिन नवीन का कुमाऊं दौरा इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

कुमाऊं में पार्टी की कोशिश होगी कि जहां पिछली बार कुछ वोटों के कारण सीट हाथ से निकल गई, वहां इस बार कोई कमी न रह जाए। साथ ही जिन सीटों पर जीत मिली थी लेकिन मुकाबला करीबी रहा, वहां संगठन और वोट बैंक को और मजबूत किया जाए।

नितिन नवीन के 9 और 10 सितंबर के दौरे के बाद कुमाऊं की सीटवार रणनीति को लेकर भाजपा की आगामी तैयारियों की दिशा और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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