असम (Action Bharat) | जन्माष्टमी के बाद अब भक्तों की नजर भगवान श्रीकृष्ण की छठी पर है। हर साल जन्माष्टमी के कुछ दिन बाद बाल गोपाल यानी लड्डू गोपाल की छठी मनाने की परंपरा है। इस दिन भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप का विशेष श्रृंगार किया जाता है और उन्हें तरह-तरह के भोग लगाए जाते हैं।
इस वर्ष जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाई गई थी। ऐसे में भगवान श्रीकृष्ण की छठी 9 सितंबर 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विशेष पूजा-अर्चना करने से भक्तों को भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
🕉️ 9 सितंबर को मनाई जाएगी लड्डू गोपाल की छठी
हिंदू परंपरा में बच्चे के जन्म के छठे दिन छठी मनाने की परंपरा है। इसी मान्यता के आधार पर जन्माष्टमी के छह दिन बाद लड्डू गोपाल की छठी मनाई जाती है।
इस वर्ष 9 सितंबर को बाल कृष्ण की छठी मनाई जाएगी। इस दिन कई घरों और मंदिरों में भगवान कृष्ण का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। इस अवसर पर इस वर्ष भद्रा, मालव्य और हंस राजयोग का संयोग बनने की बात भी कही गई है।
🪔 कैसे करें लड्डू गोपाल की छठी की पूजा?
छठी के दिन भक्त सबसे पहले भगवान लड्डू गोपाल को स्नान और श्रृंगार कराते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार पूजा की शुरुआत देसी गाय के घी से भगवान की मालिश करके की जा सकती है।
इसके बाद दूध से भगवान को स्नान कराया जाता है और फिर गंगाजल से अभिषेक किया जाता है। स्नान के बाद बाल गोपाल को साफ और नए वस्त्र पहनाए जाते हैं।
👶 पीले या लाल वस्त्र पहनाकर करें श्रृंगार
लड्डू गोपाल को स्नान कराने के बाद उन्हें पीले या लाल रंग के नए वस्त्र पहनाने की परंपरा बताई गई है। इसके बाद काजल लगाया जा सकता है और नजर से बचाने के लिए नजर का धागा पहनाने की मान्यता है।
भगवान के झूले को फूलों से सजाकर उन्हें झुलाया जाता है और इस दौरान श्रीकृष्ण के भजन गाए जाते हैं।
🍚 छठी पर लगाएं विशेष भोग
छठी के अवसर पर बाल गोपाल को उनकी पसंद के विभिन्न व्यंजनों का भोग लगाने की परंपरा है। इसमें कढ़ी-चावल, माखन, खीर-पूरी और हलवा जैसे पकवान शामिल किए जा सकते हैं।
पूजा के बाद भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार दान-पुण्य भी करते हैं। दी गई जानकारी में 11, 21 या 51 रुपये लेकर नजर उतारने और किन्नरों को दान करने की परंपरा का उल्लेख किया गया है।
🌸 शाम के समय पूजा का विशेष महत्व
लड्डू गोपाल की छठी खास तौर पर शाम के समय मनाने की परंपरा बताई गई है। इस दौरान भगवान के झूले को फूलों से सजाकर दीप जलाए जाते हैं और भजन-कीर्तन किया जाता है।
⚠️ जरूरी बात
पूजा की विधि और शुभ समय क्षेत्रीय पंचांग और स्थानीय परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी विशेष मुहूर्त में पूजा करनी हो तो अपने क्षेत्र के पंचांग या स्थानीय विद्वान से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।
#ActionBharat #Krishna #LadduGopal #KrishnaChhathi #KrishnaJanmashtami #SanatanDharma #HinduFestival #PujaVidhi #Dharm #Spirituality
