पटना सिटी। श्री गुरु गोविंद सिंह के 350वें प्रकाश पर्व के दौरान देश-विदेश से आने वाली संगत की सुविधा के लिए पटना सिटी के चौक थाना को बिहार के पहले पर्यटक थाने के रूप में विकसित किया गया था। थाना भवन को पटना साहिब गुरुद्वारे की शैली में तैयार किया गया, ताकि श्रद्धालुओं को पुलिसिंग के साथ बेहतर सहायता और अतिथि सत्कार की सुविधा मिल सके।
करीब 6 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस भवन का निर्माण लगभग 24,756 वर्गफीट क्षेत्र में किया गया था। करीब 50 फीट ऊंचे भवन में पुलिसकर्मियों के लिए 150 बेड की बैरक भी बनाई गई। भवन की डिजाइन में सुरक्षा और निगरानी को भी विशेष महत्व दिया गया था।
भवन के चौथे तल पर गुरुद्वारे की अनुकृति में संतरी के लिए मोर्चा बनाया गया था। इसके ऊपर नियंत्रण कक्ष से पुलिस और दंडाधिकारी दूरबीन के जरिए शहर की सड़कों, गलियों और कंगन घाट पर जुटने वाली भीड़ पर नजर रख सकें, ऐसी व्यवस्था की गई थी। सीसीटीवी कैमरों से निगरानी के लिए मॉनिटरिंग सिस्टम भी लगाया गया था। महिला पुलिसकर्मियों और अन्य पुलिस बल के लिए अलग बैरक की व्यवस्था थी।
• श्रद्धालुओं के लिए एक छत के नीचे सुविधाओं की योजना
पर्यटक थाने में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बैंक, एटीएम, मिठाई की दुकान, टूरिस्ट गाइड और सहायता केंद्र जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई थी। महिला श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रत्येक तल पर अलग प्रसाधन कक्ष और प्रतीक्षालय की व्यवस्था का भी प्रावधान था।
महिला पीड़ितों की सहायता के लिए अलग काउंटर और बंदियों के लिए अलग हाजत भी बनाया गया। इसके अलावा 40 से 50 पुलिस अधिकारियों के एक साथ बैठक और विचार-विमर्श के लिए कॉन्फ्रेंस हॉल तैयार किया गया था। रात में विश्राम के लिए तीन कमरे और एक सुइट भी बनाए गए।
• प्रकाश पर्व के नौ साल बाद सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, प्रकाश पर्व के दौरान जिस पर्यटक थाने को श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधा केंद्र के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई थी, उसकी कई योजनाएं नौ वर्ष बाद भी कागजों तक सीमित रह गई हैं। इससे करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस विशेष भवन के उद्देश्य और उसके मौजूदा उपयोग को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
