मुंबई (Action Bharat) | प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दो अधिकारियों के खिलाफ मुंबई में जबरन वसूली और धमकी देने के आरोप में FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि दोनों अधिकारियों ने एक आईटी कंपनी से जुड़े व्यवसायी को मनी लॉन्ड्रिंग की जांच का डर दिखाकर कथित तौर पर 2.25 करोड़ रुपये की रकम वसूली।
मामले में शिकायतकर्ता का आरोप है कि अधिकारियों ने शुरुआत में कथित तौर पर 5 करोड़ रुपये में मामला “सुलझाने” का प्रस्ताव दिया था। बाद में बातचीत के बाद यह रकम 2.25 करोड़ रुपये तय हुई और व्यवसायी ने इसे दो किश्तों में देने का दावा किया है।
किन ED अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ?
FIR में जिन दो अधिकारियों के नाम दर्ज किए गए हैं, उनकी पहचान:
- मोहित गर्ग — असिस्टेंट डायरेक्टर
- देवेंद्र कुमार गुप्ता — एनफोर्समेंट ऑफिसर
के रूप में बताई गई है।
दोनों अधिकारी जयपुर स्थित जांच एजेंसी के कार्यालय में तैनात बताए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इनके खिलाफ 31 अगस्त को मुंबई के बांगुर नगर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई थी।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
FIR के अनुसार, मामला तब सामने आया जब मुंबई में स्थित एक आईटी कंपनी के व्यवसायी ने ED को ही दोनों अधिकारियों के कथित व्यवहार और जबरन वसूली की शिकायत दी।
इसके बाद ED के मुंबई कार्यालय ने पुलिस को शिकायत भेजी, जिसके आधार पर पुलिस ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शिकायत सीधे उस एजेंसी के अधिकारियों के खिलाफ है, जो देश में मनी लॉन्ड्रिंग और आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों की जांच करती है।
20 जुलाई को व्यवसायी के कार्यालय पहुंचे थे अधिकारी
शिकायत के अनुसार, दोनों अधिकारी 20 जुलाई को मुंबई के मलाड पश्चिम इलाके में व्यवसायी के कार्यालय पहुंचे थे।
शुरुआत में अधिकारियों ने कथित तौर पर कहा कि वे वहां सर्वे करने के लिए आए हैं। लेकिन शिकायतकर्ता के अनुसार, इसके बाद बातचीत का रुख बदल गया और अधिकारियों ने व्यवसायी पर कथित तौर पर “अपराध से मिली रकम” के लेन-देन से जुड़े आरोप लगाए।
सर्वे को रेड में बदलने की धमकी का आरोप
शिकायत में व्यवसायी ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों ने उसे धमकी दी कि अगर वह उनकी मांग पूरी नहीं करता है तो उनके द्वारा किया जा रहा सर्वे पूरी रेड यानी तलाशी कार्रवाई में बदल दिया जाएगा।
शिकायतकर्ता के अनुसार, इसी दौरान अधिकारियों ने कथित तौर पर मामले को 5 करोड़ रुपये में “सुलझाने” का प्रस्ताव रखा।
बाद में कथित बातचीत के बाद यह रकम घटाकर 2.25 करोड़ रुपये तय किए जाने का आरोप है।
दो किश्तों में 2.25 करोड़ रुपये देने का दावा
व्यवसायी ने शिकायत में दावा किया है कि उसने अधिकारियों को दो किश्तों में कुल 2.25 करोड़ रुपये दिए।
हालांकि, बाद में व्यवसायी को कथित तौर पर पता चला कि उसके खिलाफ वास्तव में कोई मामला नहीं था। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि अधिकारियों ने उनके द्वारा लगाए गए आरोपों को साबित करने वाला कोई दस्तावेज उसे उपलब्ध नहीं कराया।
यानी शिकायतकर्ता के अनुसार, पहले उस पर मनी लॉन्ड्रिंग और अपराध से प्राप्त रकम के लेन-देन का आरोप लगाया गया और बाद में इसी कार्रवाई को रोकने या मामले को “सुलझाने” के नाम पर रकम मांगी गई।
ED ने भी शुरू की कार्रवाई
मामला सामने आने के बाद ED ने पुलिस द्वारा दर्ज FIR का संज्ञान लिया है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ED ने PMLA के तहत भी आपराधिक मामला दर्ज किया है। इस मामले में शिकायतकर्ता से पूछताछ भी की गई है।
इससे मामले की जांच अब केवल पुलिस की FIR तक सीमित नहीं है, बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत भी इसकी जांच की जा रही है।
FIR में क्या आरोप हैं?
शिकायत और उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पूरे मामले में मुख्य आरोप इस प्रकार हैं:
- दो ED अधिकारियों पर व्यवसायी को मनी लॉन्ड्रिंग जांच का डर दिखाने का आरोप।
- सर्वे को कथित तौर पर रेड में बदलने की धमकी देने का आरोप।
- शुरुआत में 5 करोड़ रुपये में मामला “सुलझाने” का कथित प्रस्ताव।
- बातचीत के बाद कथित रकम 2.25 करोड़ रुपये तय होने का दावा।
- व्यवसायी द्वारा दो किश्तों में 2.25 करोड़ रुपये देने का आरोप।
- बाद में व्यवसायी द्वारा यह दावा कि उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने वाले दस्तावेज उसे नहीं दिए गए।
अब जांच में किन पहलुओं पर नजर होगी?
मामले की जांच में शिकायतकर्ता के आरोपों की पुष्टि के लिए अलग-अलग पहलुओं की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। इनमें कथित भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड, अधिकारियों की व्यवसायी के कार्यालय में मौजूदगी, बातचीत से संबंधित उपलब्ध साक्ष्य और शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि शामिल हो सकती है।
हालांकि, उपलब्ध स्रोत में जांच के दौरान बरामद किसी विशेष दस्तावेज, रिकॉर्डिंग या अन्य साक्ष्य का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के बारे में फिलहाल कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
आरोप साबित होना अभी बाकी
यह मामला फिलहाल FIR और शिकायत में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। FIR दर्ज होना अपने आप में आरोपों के अदालत में साबित होने का प्रमाण नहीं है।
अब पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि किस हद तक होती है और मामले में आगे क्या कानूनी कार्रवाई होती है।
मामले के मुख्य तथ्य
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| मामला | कथित जबरन वसूली और धमकी |
| कथित रकम | ₹2.25 करोड़ |
| शुरुआती कथित मांग | ₹5 करोड़ |
| आरोपी अधिकारी | मोहित गर्ग और देवेंद्र कुमार गुप्ता |
| पद | असिस्टेंट डायरेक्टर और एनफोर्समेंट ऑफिसर |
| तैनाती | जयपुर स्थित ED कार्यालय |
| FIR | 31 अगस्त |
| पुलिस स्टेशन | बांगुर नगर, मुंबई |
| कथित घटना | 20 जुलाई |
| स्थान | मलाड पश्चिम, मुंबई |
| शिकायतकर्ता | मुंबई का आईटी व्यवसायी |
| भुगतान | दो किश्तों में, शिकायतकर्ता के अनुसार |
| अतिरिक्त कार्रवाई | ED ने PMLA के तहत भी मामला दर्ज किया |
Action Bharat | National Desk
