मानव तस्करी मामले में बड़ा फैसला: हैदराबाद की NIA कोर्ट ने आठ बांग्लादेशियों समेत नौ दोषियों को सुनाई उम्रकैद

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नई दिल्ली (Action Bharat) | हैदराबाद की विशेष एनआईए अदालत ने वर्ष 2019 के मानव तस्करी से जुड़े एक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आठ बांग्लादेशी नागरिकों समेत कुल नौ दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषियों पर कुल 1.37 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत के आदेश के अनुसार, जुर्माना नहीं भरने की स्थिति में दोषियों को तीन महीने की साधारण कैद भी भुगतनी होगी।

यह मामला बांग्लादेशी महिलाओं को भारत में अच्छी नौकरी और बेहतर वेतन का लालच देकर लाने और इसके बाद उन्हें कथित तौर पर वेश्यावृत्ति में धकेलने से जुड़ा है। मामले की जांच बाद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अपने हाथ में ले ली थी।

क्या है पूरा मामला?

एनआईए के अनुसार, वर्ष 2019 में मानव तस्करी का यह मामला हैदराबाद में सामने आया था। आरोप था कि बांग्लादेश की महिलाओं को रोजगार और अच्छे वेतन का लालच देकर भारत लाया गया।

भारत लाने के बाद इन महिलाओं को कथित तौर पर ऐसी परिस्थितियों में धकेला गया, जहां उनसे वेश्यावृत्ति कराई जाती थी।

मामले की शुरुआत तेलंगाना पुलिस की कार्रवाई से हुई थी। सितंबर 2019 में पुलिस ने एक ऑपरेशन के दौरान हैदराबाद में कार्रवाई की थी।

जलपल्ली गांव में हुई कार्रवाई

तेलंगाना पुलिस ने सितंबर 2019 में जलपल्ली गांव में कार्रवाई की। वहां कथित तौर पर चल रहे एक वेश्यालय से तीन बांग्लादेशी महिलाओं को बचाया गया।

जांच के दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि हैदराबाद के बालापुर इलाके की महमूद कॉलोनी स्थित एक घर में भी एक अन्य बांग्लादेशी महिला मौजूद थी।

पुलिस ने वहां से भी महिला को बचाया।

इस तरह शुरुआती कार्रवाई के दौरान कुल चार बांग्लादेशी महिलाओं को बचाया गया।

NIA ने अपने हाथ में ली जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने जांच अपने हाथ में ले ली।

एनआईए ने 12 अक्टूबर 2019 को इस मामले को दोबारा दर्ज किया और इसके बाद पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू की।

जांच एजेंसी के अनुसार, जांच के दौरान मानव तस्करी से जुड़े नेटवर्क और आरोपितों की भूमिका की पड़ताल की गई।

अलग-अलग राज्यों से हुई गिरफ्तारियां

जांच के दौरान आरोपितों को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया गया।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आरोपितों की गिरफ्तारियां 2019 और 2020 के दौरान हुईं। इनमें पश्चिम बंगाल और तेलंगाना समेत अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई की गई।

मामले में कुल नौ लोगों को दोषी ठहराया गया, जिनमें:

  • आठ बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं।
  • एक भारतीय नागरिक भी दोषियों में शामिल है।
  • अदालत ने सभी नौ दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
  • दोषियों पर कुल 1.37 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
  • जुर्माना नहीं भरने पर तीन महीने की साधारण कैद का प्रावधान किया गया है।

नौकरी और अच्छे वेतन का दिया गया लालच

एनआईए के अनुसार, मामले में महिलाओं को भारत लाने के लिए उन्हें अच्छी नौकरी और बेहतर वेतन का लालच दिया गया था।

आरोप यह था कि भारत पहुंचने के बाद महिलाओं को उनकी इच्छा के विरुद्ध वेश्यावृत्ति में धकेला गया।

यही आरोप इस मामले को मानव तस्करी के गंभीर मामलों में शामिल करता है और इसी आधार पर जांच एजेंसी ने पूरे नेटवर्क की जांच की।

पुलिस की कार्रवाई से सामने आया मामला

यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब तेलंगाना पुलिस ने सितंबर 2019 में एक ऑपरेशन चलाया।

पुलिस की कार्रवाई के दौरान:

  • जलपल्ली गांव से तीन बांग्लादेशी महिलाएं बचाई गईं।
  • बालापुर की महमूद कॉलोनी स्थित एक घर से एक अन्य महिला को बचाया गया।
  • इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ाई गई।
  • एनआईए ने अक्टूबर 2019 में जांच अपने हाथ में लेकर मामला फिर से दर्ज किया।
  • जांच के दौरान 2019 और 2020 में अलग-अलग स्थानों से आरोपितों को गिरफ्तार किया गया।

अदालत के फैसले का महत्व

हैदराबाद की NIA अदालत का यह फैसला मानव तस्करी के मामले में आया है, जिसमें महिलाओं को रोजगार के नाम पर भारत लाने और फिर उन्हें वेश्यावृत्ति में धकेलने का आरोप था।

अदालत द्वारा नौ दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के साथ ही मामले में दोषियों पर आर्थिक दंड भी लगाया गया है।

यह फैसला उस जांच प्रक्रिया का परिणाम है, जो तेलंगाना पुलिस की शुरुआती कार्रवाई से शुरू हुई और बाद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी तक पहुंची।

Action Bharat की नजर में मुख्य तथ्य

मामला: 2019 का मानव तस्करी मामला
स्थान: हैदराबाद, तेलंगाना
जांच एजेंसी: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA)
दोषी: 9
बांग्लादेशी नागरिक: 8
भारतीय नागरिक: 1

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