कौन हैं केएल बंसल? रिलायंस जैसी दिग्गज कंपनियों को प्रोसेस पाइपिंग सॉल्यूशन देने वाली DEE के संस्थापक, अब न्यूक्लियर और डेटा सेंटर पर नजर

कारोबार

नई दिल्ली (Action Bharat) | भारत की बड़ी रिफाइनरी, पावर प्लांट, केमिकल और औद्योगिक परियोजनाओं में ऐसी इंजीनियरिंग जरूरतें होती हैं, जो आम लोगों को दिखाई नहीं देतीं, लेकिन पूरी इंडस्ट्री के संचालन के लिए बेहद अहम होती हैं। इन्हीं में से एक है प्रोसेस पाइपिंग, जिसके जरिए तेल, गैस, भाप और अन्य औद्योगिक पदार्थों को सुरक्षित तरीके से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जाता है।

इसी क्षेत्र में DEE Development Engineers ने तीन दशक से ज्यादा समय में अपनी पहचान बनाई है। कंपनी की शुरुआत केएल बंसल ने 1988 में की थी। आज कंपनी के ग्राहकों में रिलायंस इंडस्ट्रीज समेत कई बड़े औद्योगिक नाम शामिल हैं।

1988 में शुरू हुई कंपनी का सफर

केएल बंसल ने DEE Development Engineers की शुरुआत ऐसे समय में की, जब भारत में औद्योगिक और ऊर्जा क्षेत्र का तेजी से विस्तार हो रहा था।

कंपनी ने सामान्य इंजीनियरिंग कारोबार के बजाय धीरे-धीरे कस्टमाइज्ड प्रोसेस पाइपिंग और उससे जुड़ी इंजीनियरिंग में विशेषज्ञता विकसित की। तेल-गैस, पावर, केमिकल और अन्य प्रोसेस इंडस्ट्री के लिए जटिल पाइपिंग सिस्टम तैयार करना कंपनी के मुख्य कारोबार का हिस्सा बन गया।

डिजाइन, फैब्रिकेशन और मैन्युफैक्चरिंग को एक साथ जोड़कर DEE ने खुद को एक इंटीग्रेटेड प्रोसेस पाइपिंग सॉल्यूशन प्रोवाइडर के तौर पर विकसित किया।

रिलायंस समेत कई बड़े ग्राहक

DEE की कारोबारी वृद्धि में बड़े औद्योगिक ग्राहकों के साथ लंबे समय से चले आ रहे कारोबारी संबंधों की भूमिका रही है।

कंपनी के प्रमुख ग्राहकों में Reliance Industries, Mitsubishi Heavy Industries, Toshiba JSW Power Systems, MAN Energy Solutions और John Cockerill जैसे नाम शामिल हैं।

कंपनी के दस्तावेजों के मुताबिक रिलायंस और मित्सुबिशी के साथ उसके कारोबारी संबंध करीब 12 साल पुराने हैं। वहीं Toshiba JSW Power Systems के साथ करीब 10 साल और MAN Energy Solutions के साथ लगभग 11 साल का संबंध बताया गया है।

कई राज्यों और थाईलैंड तक फैला मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क

बड़े ऑर्डरों के साथ कंपनी ने अपनी उत्पादन क्षमता का भी विस्तार किया है। DEE की मैन्युफैक्चरिंग सुविधाएं हरियाणा के पलवल, गुजरात के अंजार, राजस्थान के बाड़मेर, असम के नुमालीगढ़ और थाईलैंड के बैंकॉक में हैं।

कंपनी ने उत्पादन प्रक्रिया में रोबोटिक वेल्डिंग, CNC मशीन और ऑटोमैटिक इंडक्शन बेंडिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाया है।

FY25 में कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू करीब ₹827.4 करोड़ और ऑपरेटिंग EBITDA करीब ₹123.8 करोड़ रहा।

2024 के IPO से मिली नई रफ्तार

DEE Development Engineers ने जून 2024 में IPO लॉन्च किया था। रिपोर्ट के अनुसार IPO को निवेशकों की ओर से करीब 99 गुना सब्सक्रिप्शन मिला।

IPO से जुटाई गई पूंजी का इस्तेमाल कंपनी ने वर्किंग कैपिटल की जरूरतों और कर्ज से संबंधित दायित्वों को पूरा करने के लिए किया।

इसके बाद कंपनी के कारोबार में विस्तार देखने को मिला। FY26 में कंपनी का रेवेन्यू करीब ₹1,142 करोड़, EBITDA करीब ₹191 करोड़ और टैक्स के बाद मुनाफा लगभग ₹77 करोड़ बताया गया है।

जून 2026 तक कंपनी का ऑर्डर बुक करीब ₹2,428 करोड़ था, जो अगस्त 2026 के अंत तक बढ़कर लगभग ₹2,435.61 करोड़ बताया गया।

अब न्यूक्लियर और डेटा सेंटर सेक्टर पर नजर

DEE अब पारंपरिक तेल-गैस और पावर सेक्टर से आगे बढ़कर नए हाई-वैल्यू क्षेत्रों में विस्तार की तैयारी कर रही है।

सितंबर 2026 की रिपोर्टों के अनुसार कंपनी की नजर न्यूक्लियर पावर, थर्मल पावर और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों पर है। इन सेक्टर में विशेष तकनीकी क्षमता और उच्च गुणवत्ता वाले इंजीनियरिंग सॉल्यूशन की जरूरत होती है।

कंपनी के संस्थापक केएल बंसल के मुताबिक DEE का लक्ष्य 2030 तक ₹2,500 करोड़ से अधिक का रेवेन्यू हासिल करना है। कंपनी का मौजूदा ऑर्डर बुक भी करीब ₹2,500 करोड़ के स्तर पर बताया गया है।

छोटे औद्योगिक कारोबार से बड़े इंजीनियरिंग ब्रांड तक

केएल बंसल की कारोबारी यात्रा इस बात का उदाहरण है कि किसी विशेष इंजीनियरिंग क्षेत्र में विशेषज्ञता विकसित करके कंपनी किस तरह बड़े औद्योगिक ग्राहकों के साथ लंबे समय के कारोबारी संबंध बना सकती है।

1988 में शुरू हुई DEE आज प्रोसेस पाइपिंग से जुड़े कारोबार में कई बड़े औद्योगिक समूहों के साथ काम कर रही है और अब न्यूक्लियर पावर तथा डेटा सेंटर जैसे नए क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

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