दिल्ली (Action Bharat) | सर्दियों की दस्तक से पहले ही राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण का खतरा गहराने लगा है। सरकार के विंटर एक्शन प्लान और प्रदूषण नियंत्रण के दावों के बीच दिल्ली के 12 प्रमुख प्रदूषण हॉटस्पॉट ऐसे हैं, जहां एक साल बाद भी हालात में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। अक्टूबर शुरू होते ही प्रदूषण और स्मॉग की आशंका ने दिल्लीवासियों की चिंता बढ़ा दी है।
दिल्ली में कुल 62 प्रदूषण हॉटस्पॉट चिह्नित किए गए थे। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इनमें से 42 स्थानों पर सुधारात्मक कार्रवाई पूरी हो चुकी है, जबकि 20 हॉटस्पॉट अब भी प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं। इनमें से 8 स्थानों पर अक्टूबर तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती उन 12 हॉटस्पॉट की है, जहां लंबे समय से प्रदूषण के मूल कारण बने हुए हैं।
दिल्ली के इन 12 इलाकों में प्रदूषण की चुनौती
प्रमुख प्रभावित इलाकों में आयानगर, नजफगढ़, वजीरपुर, जहांगीरपुरी, ख्याला, शास्त्री पार्क, विश्वास नगर, हरकेश नगर, हरि नगर, दिल्ली गेट, सावदा-मुबारकपुर डबास और भलस्वा-नंद नगरी-गोकुलपुरी-बक्करवाला क्लस्टर शामिल हैं।
इन क्षेत्रों में कहीं औद्योगिक गतिविधियां, कहीं भारी वाहनों का दबाव, तो कहीं कच्ची सड़कों और खुले में कचरा जलाने से प्रदूषण की समस्या बनी हुई है।
आखिर क्यों नहीं सुधर रहे हालात?
जहांगीरपुरी: कबाड़ और स्क्रैप मार्केट में कथित अवैध कचरा जलाने, भलस्वा लैंडफिल की निकटता और अत्यधिक ट्रैफिक से प्रदूषण का दबाव बना हुआ है।
वजीरपुर: पुरानी औद्योगिक इकाइयों, धातु और केमिकल से जुड़ी गतिविधियों तथा संकरी सड़कों पर भारी वाहनों की आवाजाही से समस्या बढ़ती है।
शास्त्री पार्क: प्रमुख सड़कों के जंक्शन पर ट्रैफिक जाम, निर्माण गतिविधियों और खुले क्षेत्रों से उड़ने वाली धूल प्रदूषण के कारण हैं।
नजफगढ़: कच्ची सड़कें, भारी वाहनों की आवाजाही और कृषि अवशेष जलाने से आने वाला धुआं चुनौती बना हुआ है।
भलस्वा और आसपास के इलाके: लैंडफिल से निकलने वाला धुआं, कचरे में आग और अनधिकृत कबाड़ गतिविधियां स्थानीय वायु गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं।
सरकारी योजनाएं बनाम जमीनी हकीकत
दिल्ली सरकार ने इस बार विंटर एक्शन प्लान के तहत प्रत्येक यातायात और वायु प्रदूषण हॉटस्पॉट के लिए अलग-अलग कार्ययोजना तैयार की है। संबंधित जिलों के नोडल सचिवों और आयुक्तों को निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।
इसके अलावा, कार्रवाई को केवल चिह्नित हॉटस्पॉट तक सीमित न रखते हुए उसके आसपास के तीन किलोमीटर के क्षेत्र को भी योजना में शामिल किया गया है।
हालांकि, रिपोर्ट में सामने आए हालात यह सवाल खड़ा करते हैं कि योजनाओं और घोषणाओं का असर जमीन पर कब दिखाई देगा।
विभागों के बीच तालमेल की कमी भी बड़ी चुनौती
प्रदूषण नियंत्रण में देरी के पीछे कई प्रशासनिक और बुनियादी कारण बताए गए हैं।
- MCD, DDA, PWD और ट्रैफिक पुलिस के बीच बेहतर समन्वय की कमी।
- सड़कों की मरम्मत और री-कार्पेटिंग में देरी।
- बजट और मानसून के कारण बुनियादी ढांचे के कार्य प्रभावित होना।
- कई इलाकों में एंटी-स्मॉग गन और मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनों की पर्याप्त उपलब्धता न होना।
- खुले में कचरा जलाने और औद्योगिक प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण की चुनौती।
सिर्फ पानी छिड़कने से नहीं बदलेगी तस्वीर
विशेषज्ञों और अधिकारियों के अनुसार, इन 12 हॉटस्पॉट पर केवल मौसमी उपाय पर्याप्त नहीं होंगे। इसके लिए कच्ची सड़कों का पक्कीकरण, अनधिकृत औद्योगिक गतिविधियों पर कार्रवाई, भारी वाहनों के लिए बेहतर वैकल्पिक मार्ग और लैंडफिल का वैज्ञानिक प्रबंधन जरूरी है।
साथ ही, दिल्ली के सीमावर्ती इलाकों में हरियाणा और उत्तर प्रदेश के साथ अंतरराज्यीय समन्वय भी महत्वपूर्ण होगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दिल्ली सरकार इस सर्दी से पहले इन 12 प्रदूषण हॉटस्पॉट पर ठोस बदलाव ला पाएगी, या राजधानी के लोगों को एक बार फिर जहरीली हवा और स्मॉग के बीच सांस लेने को मजबूर होना पड़ेगा?
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