JNU यौन उत्पीड़न मामला: कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजम को दिल्ली पुलिस का नोटिस, 15 अक्टूबर को पूछताछ के लिए बुलाया

दिल्ली

नई दिल्ली (Action Bharat) | जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में छात्राओं के कथित यौन उत्पीड़न से जुड़े मामले में दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस सांसद और बर्खास्त प्रोफेसर आंगोमचा बिमोल अकोइजम को नोटिस जारी किया है। पुलिस ने उन्हें 15 अक्टूबर 2026 को पूछताछ के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया है। यह मामला विश्वविद्यालय की छात्राओं की ओर से लगाए गए गंभीर आरोपों से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है और संबंधित तथ्यों की पड़ताल की जा रही है।

आवास के बाहर नोटिस चस्पा कर जांच में शामिल होने का निर्देश

प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, वसंत कुंज नॉर्थ थाना पुलिस ने बिमोल अकोइजम को पूछताछ के लिए बुलाया है। उन्हें जारी नोटिस उनके आवास के बाहर चस्पा किया गया, जिसमें 15 अक्टूबर को जांच में शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, JNU के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की शिकायत के आधार पर 11 अक्टूबर को वसंत कुंज नॉर्थ थाने में FIR दर्ज की गई थी। पुलिस अब शिकायतों से जुड़े तथ्यों, घटनाक्रम और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है।

इस मामले में सांसद को पूछताछ के लिए बुलाया जाना जांच की प्रक्रिया का हिस्सा है। फिलहाल पुलिस की ओर से जांच के अंतिम निष्कर्ष या किसी आपराधिक अदालत के फैसले की जानकारी सामने नहीं आई है।

11 छात्राओं ने लगाए थे यौन उत्पीड़न के आरोप

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मई 2026 में कम से कम 11 छात्राओं ने बिमोल अकोइजम के खिलाफ यौन उत्पीड़न से संबंधित शिकायतें दर्ज कराई थीं। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि उन्हें बैठकों या अन्य कार्यक्रमों के बहाने विश्वविद्यालय परिसर में स्थित आवास पर बुलाया जाता था, जहां उनके साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न की कोशिश की गई।

कुछ छात्राओं ने कक्षा के दौरान अश्लील और अनुचित टिप्पणियां किए जाने के आरोप भी लगाए थे। इन शिकायतों के बाद मामला विश्वविद्यालय प्रशासन के संज्ञान में आया और संस्थान के स्तर पर भी जांच की प्रक्रिया शुरू हुई।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये आरोप शिकायतकर्ताओं की ओर से लगाए गए हैं। इनकी आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण संबंधित साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।

विश्वविद्यालय की जांच के बाद प्रोफेसर पद से बर्खास्तगी

छात्राओं की शिकायतों के बाद विश्वविद्यालय स्तर पर भी मामले की जांच की गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, आंतरिक समिति की जांच के बाद प्रमुख अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई।

इसके बाद JNU ने 9 अक्टूबर 2026 को अकोइजम को प्रोफेसर के पद से बर्खास्त कर दिया। विश्वविद्यालय की यह कार्रवाई पुलिस की आपराधिक जांच से अलग संस्थागत अनुशासनात्मक प्रक्रिया का हिस्सा है।

बर्खास्तगी के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया। अब दिल्ली पुलिस की जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि शिकायतों में लगाए गए आरोपों के संबंध में कौन-कौन से तथ्य और साक्ष्य सामने आते हैं।

अकोइजम ने आरोपों को बताया था ‘विच हंट’

बिमोल अकोइजम ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने इस कार्रवाई को ‘विच हंट’ बताते हुए अपने खिलाफ मौजूद साक्ष्यों को सार्वजनिक करने की मांग की थी।

उनके इस रुख के बावजूद पुलिस ने मामले में जांच आगे बढ़ाते हुए उन्हें पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। अब 15 अक्टूबर को उनकी ओर से जांच में शामिल होने और पुलिस के सवालों के जवाब दिए जाने को लेकर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

फिलहाल, मामले में आरोपों की सत्यता को लेकर कोई अंतिम आपराधिक न्यायिक फैसला सामने नहीं आया है। इसलिए जांच पूरी होने और अदालत के निष्कर्ष आने तक आरोपों को सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

भाजपा ने राहुल गांधी और कांग्रेस से मांगा जवाब

JNU मामले को लेकर राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। भाजपा ने कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से सवाल किया है कि महिलाओं के अधिकारों और पितृसत्ता के खिलाफ आवाज उठाने वाली कांग्रेस अपने सांसद के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर क्या रुख अपना रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 13 अक्टूबर 2026 को भाजपा की महिला सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर मामले में कार्रवाई की मांग की थी।

भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष रूप कुमारी चौधरी ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से शिकायत करने वाली छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया। इस तरह मामला अब पुलिस जांच के साथ-साथ राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है।

अब 15 अक्टूबर की पूछताछ पर नजर

JNU के इस मामले में तीन प्रमुख घटनाक्रम सामने आए हैं—छात्राओं की शिकायतें, विश्वविद्यालय की ओर से प्रोफेसर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई और दिल्ली पुलिस की FIR के बाद पूछताछ के लिए नोटिस।

अब पुलिस की पूछताछ और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों पर नजर रहेगी। शिकायतकर्ता छात्राओं की सुरक्षा, उपलब्ध साक्ष्यों की जांच और निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया इस मामले के महत्वपूर्ण पहलू होंगे।

नोट: FIR दर्ज होना या पूछताछ के लिए बुलाया जाना अपने आप में आरोप सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।

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