नई दिल्ली: सावन महीने के मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत माता गौरी को समर्पित है। सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से यह व्रत करती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की कामना से माता गौरी का पूजन करती हैं।
सावन का तीसरा मंगला गौरी व्रत 18 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाओं के लिए सोलह श्रृंगार और माता गौरी की विशेष पूजा का महत्व बताया गया है।
16 श्रृंगार क्यों माना जाता है शुभ?
धार्मिक मान्यताओं में माता गौरी को सौभाग्य और दांपत्य सुख से जोड़ा जाता है। इसी वजह से मंगला गौरी व्रत के दिन सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करके माता गौरी की पूजा करती हैं।
पूजन के दौरान माता गौरी को भी श्रृंगार की सामग्री अर्पित करने की परंपरा है। इसमें चुनरी, सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां, मेहंदी और अन्य श्रृंगार सामग्री शामिल की जाती हैं।
कुछ परंपराओं में माता को 16 फल, 16 फूल और 16 मिठाइयां अर्पित करने को भी शुभ माना जाता है। हालांकि पूजा की परंपराएं क्षेत्र और परिवार के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।
मंगला गौरी व्रत की धार्मिक मान्यता
मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी कथा से जुड़ी आस्था के कारण अविवाहित कन्याएं मंगला गौरी व्रत के दिन अच्छे जीवनसाथी की कामना करती हैं।
वहीं, विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु, परिवार की सुख-शांति और अखंड सौभाग्य की कामना से माता गौरी का पूजन करती हैं।
मंगला गौरी व्रत पर ऐसे करें पूजा
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
- पूजा स्थल की सफाई करके चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।
- माता गौरी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- व्रत का संकल्प लें।
- सुहागिन महिलाएं अपनी परंपरा के अनुसार सोलह श्रृंगार करें।
- माता गौरी को फूल, फल, मिठाई और श्रृंगार सामग्री अर्पित करें।
- मंगला गौरी व्रत की कथा का पाठ करें।
- माता की आरती करें और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।
- पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटें।
- व्रत रखने वाले लोग अपनी परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार कर सकते हैं।
व्रत से जुड़े क्या हैं धार्मिक लाभ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगला गौरी व्रत से अखंड सौभाग्य, वैवाहिक सुख और परिवार की सुख-शांति की कामना की जाती है। अविवाहित कन्याएं भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत करती हैं।
कुछ मान्यताओं में इस व्रत को वैवाहिक जीवन की परेशानियों और कुंडली से जुड़े दोषों के निवारण से भी जोड़ा जाता है। हालांकि ये धार्मिक मान्यताएं हैं, इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
मंगला गौरी व्रत का संदेश
मंगला गौरी व्रत केवल पूजा-पाठ की परंपरा ही नहीं, बल्कि परिवार, दांपत्य जीवन, प्रेम और सुख-शांति के लिए प्रार्थना से जुड़ी आस्था भी है। श्रद्धालु अपनी पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार पूजा-विधि अपना सकते हैं।
Action Bharat News | धर्म-अध्यात्म डेस्क
