Sugar Price Hike: चीनी महंगी होने पर इथेनॉल नहीं ये 6 कारण जिम्मेदार; कीमतों पर काबू के लिए उठाए बड़े कदम

कारोबार

नई दिल्ली: देश में चीनी की कीमतों में पिछले एक महीने में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। 20 जुलाई 2026 को करीब ₹48.18 प्रति किलो रही चीनी की कीमत 20 अगस्त को बढ़कर ₹55.70 प्रति किलो पहुंच गई। यानी करीब एक महीने में कीमतों में लगभग 15.6 प्रतिशत का इजाफा हुआ।

चीनी की कीमतों में इस तेजी के बीच इथेनॉल उत्पादन को लेकर भी सवाल उठ रहे थे। अब केंद्र सरकार ने साफ किया है कि मौजूदा तेजी को इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी डायवर्ट किए जाने से जोड़ना सही नहीं है।

इथेनॉल को लेकर सरकार ने क्या कहा?

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के मुताबिक, इथेनॉल के लिए डायवर्ट की जाने वाली चीनी की हिस्सेदारी वास्तव में पिछले कुछ वर्षों में कम हुई है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2022-23 में करीब 12 प्रतिशत चीनी इथेनॉल के लिए डायवर्ट की गई थी, जबकि 2025-26 में यह हिस्सेदारी करीब 9 प्रतिशत रह गई।

सरकार ने यह भी बताया कि देश में बनने वाले इथेनॉल का करीब तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज, खासकर मक्का, से आता है। ऐसे में सरकार का कहना है कि मौजूदा चीनी महंगाई का प्रमुख कारण इथेनॉल नहीं है।

चीनी की कीमत बढ़ने के 6 बड़े कारण

सरकार ने चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे मुख्य रूप से छह कारण बताए हैं।

1. अनुमान से कम चीनी उत्पादन

मौजूदा सीजन में देश का चीनी उत्पादन करीब 306 लाख टन (LMT) रहने का अनुमान है। यह शुरुआती अनुमान करीब 343 LMT से काफी कम है।

उत्पादन में कमी ने बाजार में उपलब्धता को प्रभावित किया है।

2. त्योहारों से पहले बढ़ी मांग

देश में त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले चीनी की मांग बढ़ रही है। मिठाई, खाद्य उत्पाद और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं में चीनी की खपत बढ़ने से बाजार पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।

3. बारिश और मौसम से फसल को नुकसान

कई गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में ज्यादा बारिश और प्रतिकूल मौसम ने गन्ने की फसल को प्रभावित किया है। इसका सीधा असर चीनी उत्पादन पर पड़ने की आशंका है।

4. फसल में बीमारियां

गन्ने की फसल में रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों ने भी उत्पादन को प्रभावित किया है। इससे गन्ने की पैदावार और उससे मिलने वाली चीनी दोनों पर असर पड़ा।

5. वैश्विक सप्लाई में कमजोरी

चीनी की कीमतों में तेजी केवल भारत तक सीमित नहीं है। वैश्विक बाजार में भी सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है।

2026-27 के लिए वैश्विक चीनी बाजार में करीब 33 LMT के घाटे का अनुमान है। मौसम संबंधी चिंताओं ने भी वैश्विक सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ाई है।

6. जमाखोरी और सट्टेबाजी

सरकार ने कुछ मिलों और कारोबारियों द्वारा जमाखोरी तथा सट्टेबाजी को भी कीमतों में तेजी का एक कारण बताया है। सरकार का मानना है कि सीमित उपलब्धता के बीच स्टॉक रोककर रखने से बाजार में कृत्रिम दबाव बन सकता है।

वैश्विक बाजार में भी चीनी महंगी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चीनी की कीमतों में तेज उछाल आया है।

आंकड़ों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय चीनी की कीमत 30 जून को करीब 474 डॉलर प्रति टन थी, जो 20 अगस्त को बढ़कर 552 डॉलर प्रति टन हो गई। यानी दो महीने से भी कम समय में कीमत करीब 16 प्रतिशत बढ़ी

इससे भारत में भी आयात और घरेलू बाजार की कीमतों पर असर पड़ सकता है।

सरकार ने उठाए ये बड़े कदम

चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने और घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं।

1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक चीनी डीलरों के लिए 400 टन की स्टॉक लिमिट लागू की गई है।

इसके अलावा 1 सितंबर से थोक खरीदार 15 दिनों की खपत से अधिक चीनी स्टॉक नहीं कर सकेंगे।

केंद्र और राज्य सरकार की टीमें चीनी मिलों में उपलब्ध स्टॉक की फिजिकल जांच भी कर रही हैं।

10 लाख टन कच्ची चीनी का ड्यूटी-फ्री आयात

घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी है।

इसका उद्देश्य घरेलू सप्लाई को मजबूत करना और कीमतों पर दबाव कम करना है।

अक्टूबर से बढ़ सकती है सप्लाई

सरकार ने चीनी मिलों को 15 अक्टूबर 2026 से क्रशिंग शुरू करने की सलाह दी है।

सरकारी अनुमान के मुताबिक, अक्टूबर में सामान्य तौर पर 3-4 LMT के आसपास उत्पादन होता है, लेकिन क्रशिंग जल्दी शुरू होने पर अक्टूबर का उत्पादन 10 LMT से ज्यादा हो सकता है।

इससे नई फसल की चीनी बाजार में आने के बाद सप्लाई बढ़ने और कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है।

आम आदमी पर क्या असर?

चीनी की कीमतों में तेजी का असर केवल घर के बजट तक सीमित नहीं रहता। मिठाई, बेकरी उत्पाद, पैकेज्ड फूड, पेय पदार्थ और अन्य खाद्य वस्तुओं की लागत पर भी इसका असर पड़ सकता है।

हालांकि सरकार के मुताबिक घरेलू मांग पूरी करने के लिए अक्टूबर में नई क्रशिंग शुरू होने तक पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और सरकार स्टॉक लिमिट, आयात तथा मिलों की निगरानी जैसे कदमों के जरिए कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है।

Bottom Line

चीनी की कीमतों में तेजी को सरकार ने इथेनॉल से जोड़ने से इनकार किया है। सरकार के मुताबिक कम उत्पादन, त्योहारी मांग, मौसम से फसल को नुकसान, फसल की बीमारियां, वैश्विक सप्लाई की कमी और जमाखोरी-सट्टेबाजी मौजूदा तेजी के प्रमुख कारण हैं।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि ड्यूटी-फ्री आयात और अक्टूबर में शुरू होने वाली नई क्रशिंग के बाद चीनी की कीमतों में कितनी राहत मिलती है।

स्रोत: उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय / PTI / उपलब्ध सरकारी आंकड़े

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