नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सेवानिवृत्त हाई कोर्ट न्यायाधीशों को मिलने वाली सुविधाओं में राज्यों के बीच असमानता पर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक सप्ताह के भीतर समिति गठित करने का निर्देश दिया है, जो पूर्व न्यायाधीशों के लिए एक समान राष्ट्रीय नीति और सुविधाओं के मानक तय करने पर विचार करेगी।
🚨 एक हफ्ते में समिति, नहीं तो कोर्ट करेगा गठन
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यदि केंद्र सरकार निर्धारित समय में समिति गठित नहीं करती है तो सुप्रीम कोर्ट स्वयं समिति गठित कर सकता है।
मामले की अगली सुनवाई 10 दिन बाद होगी।
🚗 ड्राइवर, सुरक्षा और सरकारी आवास का मुद्दा
सुप्रीम कोर्ट के सामने सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जजों को मिलने वाली कई सुविधाओं का मुद्दा है, जिनमें प्रमुख रूप से:
- ड्राइवर की सुविधा
- सुरक्षा कर्मियों की व्यवस्था
- यात्रा के दौरान सरकारी आवास में ठहरने की सुविधा
- इन सुविधाओं के लिए राज्यों द्वारा दी जाने वाली आर्थिक सहायता
शामिल हैं।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने राज्यों द्वारा दी जा रही आर्थिक सहायता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि 45-50 हजार रुपये में ड्राइवर और सुरक्षा अधिकारी की व्यवस्था कैसे हो सकती है।
⚖️ राज्यों में अलग-अलग नियमों पर आपत्ति
कोर्ट ने कहा कि अलग-अलग राज्यों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को मिलने वाली सुविधाओं में एकरूपता नहीं है। इसी वजह से केंद्र के स्तर पर एक समिति बनाकर समान राष्ट्रीय मानक तय करने का सुझाव दिया गया है।
कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि केंद्र सरकार अनुदान में अपनी हिस्सेदारी कर सकती है, ताकि राज्यों पर पूरा वित्तीय बोझ न पड़े।
📌 पहले भी दिया था निर्देश
इससे पहले 20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दो सप्ताह के भीतर समिति गठित करने और तीन महीने में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। अब कोर्ट ने केंद्र को फिर से एक सप्ताह की समय-सीमा दी है।
मामला सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की सुरक्षा और अन्य सुविधाओं से संबंधित एक अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया है।
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