कोलाथुर चुनाव परिणाम पर एमके स्टालिन को मद्रास हाई कोर्ट से झटका, 100% VVPAT गिनती की मांग खारिज

राजनीति

EVM में गड़बड़ी का आरोप लगाकर दाखिल की थी याचिका, चुनाव रद्द कर खुद को विजेता घोषित करने की भी मांग

चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। डीएमके प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को कोलाथुर विधानसभा सीट के चुनाव परिणाम को चुनौती देने के मामले में मद्रास हाई कोर्ट से झटका लगा है। हाई कोर्ट ने स्टालिन की चुनाव याचिका को सुनवाई योग्य नहीं मानते हुए खारिज कर दिया।

स्टालिन की ओर से दाखिल याचिका में कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र में इस्तेमाल हुई इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) को लेकर सवाल उठाए गए थे। याचिका में निर्वाचन क्षेत्र की सभी VVPAT पर्चियों की 100 प्रतिशत गिनती कराने तथा चुनाव में इस्तेमाल की गई मशीनों की जांच और सत्यापन कराने की मांग की गई थी।

चुनाव परिणाम को दी गई थी चुनौती

याचिका के मुताबिक, 2026 के विधानसभा चुनाव में कोलाथुर सीट पर स्टालिन को TVK के वीएस बाबू से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद स्टालिन की ओर से चुनाव प्रक्रिया और EVM को लेकर आपत्तियां उठाते हुए हाई कोर्ट का रुख किया गया।

याचिका में आरोप लगाया गया कि चुनाव के दौरान EVM में खराबी अथवा गड़बड़ी की संभावना थी। इसी आधार पर चुनाव परिणाम की दोबारा जांच कराने की मांग की गई।

स्टालिन की ओर से अदालत से यह भी अनुरोध किया गया था कि वीएस बाबू के निर्वाचन को अमान्य घोषित किया जाए और उन्हें कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित उम्मीदवार घोषित किया जाए।

286 मशीनों की जांच की मांग

मामले में स्टालिन की याचिका का एक प्रमुख हिस्सा निर्वाचन क्षेत्र में इस्तेमाल की गई EVM और VVPAT से संबंधित था।

याचिका में निर्वाचन आयोग को निर्देश देने की मांग की गई थी कि:

  • कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र की 100 प्रतिशत VVPAT पर्चियों की गिनती कराई जाए।
  • चुनाव में इस्तेमाल की गई सभी 286 मशीनों की जांच और सत्यापन किया जाए।
  • चुनाव परिणाम की दोबारा जांच के बाद वास्तविक परिणाम निर्धारित किया जाए।
  • वीएस बाबू के निर्वाचन को रद्द कर स्टालिन को निर्वाचित घोषित किया जाए।

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

मामले की सुनवाई मद्रास हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एसए धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की पीठ ने की।

पीठ ने स्टालिन की चुनाव याचिका को सुनवाई योग्य नहीं माना और इसी आधार पर उसे खारिज कर दिया। इस फैसले के साथ कोलाथुर चुनाव परिणाम को लेकर स्टालिन की ओर से हाई कोर्ट में की गई चुनौती को फिलहाल राहत नहीं मिल सकी।

VVPAT क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?

VVPAT यानी Voter Verifiable Paper Audit Trail ऐसी व्यवस्था है, जिसमें मतदाता द्वारा डाले गए वोट की पुष्टि के लिए एक पेपर स्लिप तैयार होती है। यह स्लिप कुछ समय के लिए पारदर्शी बॉक्स में दिखाई देती है और बाद में सुरक्षित रखी जाती है।

चुनावी प्रक्रिया में VVPAT का इस्तेमाल EVM से जुड़े परिणामों के ऑडिट और सत्यापन के लिए किया जाता है। हालांकि किसी निर्वाचन क्षेत्र में सभी VVPAT पर्चियों की गिनती सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होती और इसके लिए निर्धारित कानूनी एवं चुनावी प्रक्रिया लागू होती है।

अब आगे क्या?

मद्रास हाई कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद कोलाथुर सीट के चुनाव परिणाम को चुनौती देने की स्टालिन की मौजूदा कानूनी कोशिश को झटका लगा है। हालांकि अदालत के इस आदेश के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की कोई संभावना है या नहीं, यह स्टालिन की ओर से लिए जाने वाले अगले निर्णय और उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर निर्भर करेगा।

फिलहाल हाई कोर्ट का फैसला कोलाथुर विधानसभा चुनाव से जुड़े विवाद में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि याचिका में न केवल चुनाव परिणाम को चुनौती दी गई थी बल्कि 100 प्रतिशत VVPAT सत्यापन और 286 EVM की जांच की मांग भी की गई थी।

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