नई दिल्ली (Action Bharat) | BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भारत मंडपम में आयोजित पूरी तरह शाकाहारी गाला डिनर को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने इस आयोजन के मेन्यू को लेकर केंद्र सरकार की सांस्कृतिक सोच पर सवाल उठाया और भाजपा पर देश की विविध खान-पान परंपराओं पर अपनी पसंद थोपने का आरोप लगाया।
कार्ति चिदंबरम ने भाजपा को “अगड़ी जाति के शाकाहारी हिंदुओं की पार्टी” बताते हुए कहा कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में राष्ट्रीय मेहमाननवाजी के दौरान देश के अलग-अलग खान-पान को प्रदर्शित किया जाना चाहिए था।
कार्ति चिदंबरम ने क्या कहा?
कांग्रेस सांसद के मुताबिक, भारत में खान-पान की आदतों में काफी विविधता है। उन्होंने इसी आधार पर BRICS जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन में केवल शाकाहारी भोजन परोसे जाने को लेकर सवाल उठाया।
उनकी प्रमुख बातें:
- उन्होंने भाजपा को अगड़ी जाति के शाकाहारी हिंदुओं की राजनीतिक पार्टी बताया।
- आरोप लगाया कि भाजपा अपनी खास खान-पान की पसंद देश पर थोपना चाहती है।
- कहा कि देश की बड़ी आबादी मांसाहारी है।
- उनके मुताबिक, राष्ट्रीय मेहमाननवाजी में भारत की पूरी खान-पान विविधता दिखाई जानी चाहिए थी।
- उन्होंने यह भी कहा कि शाकाहारी लोग अपनी पसंद के अनुसार भोजन करने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन देश की विविधता को छिपाना उचित नहीं है।
राहुल गांधी भी उठा चुके हैं मुद्दा
इस विवाद पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया दे चुके हैं।
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में देश की खान-पान संबंधी विविधता का जिक्र करते हुए कहा था कि 80 प्रतिशत आबादी मांसाहारी है।
उन्होंने भारतीय मांसाहारी व्यंजनों की तारीफ करते हुए अपनी बहन द्वारा बनाए गए छोले-भटूरे का उदाहरण दिया और उसकी तस्वीर भी साझा की।
हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि छोले-भटूरे शाकाहारी व्यंजन हैं, इसलिए राहुल गांधी की पोस्ट में इसे मांसाहारी भोजन के उदाहरण के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय भोजन की विविधता/स्वाद के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया था।
BRICS डिनर बना राजनीतिक बहस का मुद्दा
BRICS जैसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में आयोजित गाला डिनर सामान्य तौर पर मेहमानों के लिए मेजबान देश की संस्कृति और खान-पान को प्रदर्शित करने का अवसर भी माना जाता है। इसी पहलू को लेकर कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं।
कांग्रेस का तर्क है कि भारत की पहचान उसकी भाषाई, धार्मिक, सांस्कृतिक और खान-पान की विविधता से भी बनती है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के सामने भारतीय व्यंजनों की व्यापक विविधता प्रस्तुत की जानी चाहिए थी।
वहीं, उपलब्ध खबर में केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। इसलिए कांग्रेस नेताओं के आरोपों को राजनीतिक बयान/आलोचना के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
असली सवाल क्या है?
BRICS डिनर को लेकर अब बहस सिर्फ शाकाहारी या मांसाहारी भोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल उठ रहा है कि भारत की अंतरराष्ट्रीय मेहमाननवाजी में देश की विविधता को किस तरह प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
सवाल जो उठते हैं—
- क्या अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के लिए केवल शाकाहारी मेन्यू रखना सांस्कृतिक प्रस्तुति का फैसला था?
- क्या भारतीय खान-पान की पूरी विविधता को ऐसे आयोजनों में जगह मिलनी चाहिए?
- क्या भोजन की पसंद को राजनीतिक पहचान से जोड़ना उचित है?
- और क्या BRICS जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच के डिनर को घरेलू राजनीतिक बहस का मुद्दा बनाना सही है?
इन सवालों पर राजनीतिक दलों के अलग-अलग मत हो सकते हैं, लेकिन इतना स्पष्ट है कि BRICS का शाकाहारी गाला डिनर अब राजनीतिक बयानबाजी का नया मुद्दा बन गया है।
Action Bharat | खबर वही, सवाल जरूरी।
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