दिल्ली (Action Bharat) | नरेला हिंद अपार्टमेंट में EWS वर्ग के लिए बनाए गए 2860 फ्लैट आवंटन के महज चार साल बाद ही जर्जर होने की शिकायतें सामने आई हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, कहीं बीम और स्लैब के हिस्से गिर रहे हैं तो कहीं दीवारों में लगातार सीलन बनी हुई है।
निवासियों का आरोप है कि बिजली की लाइनों से पानी टपकने के कारण करंट उतरने का खतरा भी बना हुआ है। उनका कहना है कि डीडीए से कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
स्थानीय निवासी अतुल यादव के अनुसार, हाल ही में उनकी रसोई में बीम का हिस्सा टूटकर गिर गया। उन्होंने दावा किया कि टूटे हिस्से में सरिया दिखाई नहीं दिया, जिस पर उन्होंने निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए।
अपार्टमेंट में करीब 2400 परिवारों के रहने की जानकारी दी गई है, जबकि बाकी फ्लैटों का आवंटन अभी होना बाकी बताया गया है।
निवासियों ने सीवर व्यवस्था, फायर फाइटिंग सिस्टम, पाइपलाइन से होने वाली सीलन और फर्श धंसने जैसी समस्याओं की भी शिकायत की है। कुछ लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान दीवारों की सफेदी झड़ने लगती है और कई हिस्सों में रहना मुश्किल हो जाता है।
एक निवासी ने बताया कि बाथरूम में बीम का प्लास्टर गिरने की घटना में उनका बच्चा बाल-बाल बचा। वहीं RWA पदाधिकारियों के अनुसार, 200 से अधिक लोगों ने सीलन समेत अन्य समस्याओं को लेकर डीडीए को लिखित शिकायतें दी हैं।
स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने और भवन की सुरक्षा का तकनीकी निरीक्षण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो किसी गंभीर दुर्घटना का खतरा बना रह सकता है।
निवासियों द्वारा लगाए गए निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा संबंधी आरोपों की स्वतंत्र तकनीकी जांच से पुष्टि होना बाकी है।
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