‘अमेरिका फर्स्ट’ समर्थकों के गुस्से के बीच भारत पहुंचे मोंटाना के गवर्नर, बेचेंगे दाल

विदेश

वॉशिंगटन (Action Bharat) | अमेरिका के मोंटाना राज्य के गवर्नर ग्रेग जियानफोर्ट इन दिनों भारत दौरे पर हैं। उनकी यात्रा का प्रमुख उद्देश्य मोंटाना के किसानों की दालों—खासकर मसूर, चना और मटर—के लिए भारतीय बाजार में नए अवसर तलाशना है। हालांकि, भारत के साथ व्यापार बढ़ाने की इस कोशिश ने अमेरिका में ‘अमेरिका फर्स्ट’ और MAGA समर्थकों के एक वर्ग के बीच राजनीतिक बहस छेड़ दी है।

मोंटाना अमेरिका के प्रमुख दाल उत्पादक राज्यों में शामिल है, जबकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दाल उपभोक्ता और आयातक बाजार है। ऐसे में मोंटाना के किसानों के लिए भारत एक बड़ा संभावित बाजार माना जा रहा है।

भारत क्यों पहुंचना चाहते हैं मोंटाना के किसान?

मोंटाना की आबादी करीब 10 लाख है, जबकि राज्य में कृषि उत्पादन की क्षमता काफी बड़ी है। ऐसे में स्थानीय किसानों के लिए राज्य की सीमाओं से बाहर और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाना महत्वपूर्ण है।

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में भारत ने मोंटाना से मटर, मसूर और चने की खरीद की थी, जिसकी कीमत करीब 1.4 करोड़ डॉलर बताई गई है। जियानफोर्ट की मौजूदा यात्रा का उद्देश्य इसी व्यापारिक संबंध को और मजबूत करना तथा मोंटाना के किसानों के लिए भारतीय बाजार का विस्तार करना है।

MAGA समर्थकों को क्यों है आपत्ति?

गवर्नर की भारत यात्रा को लेकर अमेरिका में MAGA समर्थकों के एक वर्ग ने सवाल उठाए हैं। आलोचकों का तर्क है कि जब ‘America First’ नीति के तहत घरेलू उत्पादों और अमेरिकी कारोबार को प्राथमिकता देने की बात की जाती है, तो अमेरिकी राज्य का गवर्नर विदेश जाकर अपने किसानों के उत्पादों के लिए बाजार क्यों तलाश रहा है।

यही विरोध अब अमेरिका में घरेलू राजनीति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति के बीच तनाव का उदाहरण बन गया है। एक तरफ अमेरिकी राज्य अपने किसानों और कारोबारियों के लिए वैश्विक बाजार तलाश रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ MAGA आंदोलन का एक वर्ग विदेशी व्यापार और वैश्वीकरण को लेकर अधिक संरक्षणवादी रुख अपनाता रहा है।

भारतीय मूल के प्रोफेसरों को भी बनाया निशाना

रिपोर्ट के अनुसार, इस विवाद का असर मोंटाना स्टेट यूनिवर्सिटी से जुड़े कुछ भारतीय मूल के प्रोफेसरों और शोधकर्ताओं पर भी पड़ा। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने भारतीय मूल के अकादमिक और कृषि विशेषज्ञों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं और गवर्नर की भारत-केंद्रित व्यापार नीति पर सवाल उठाए।

रिपब्लिकन गवर्नरों के सामने बढ़ी चुनौती

मोंटाना के गवर्नर जियानफोर्ट अकेले ऐसे रिपब्लिकन गवर्नर नहीं हैं जिन्हें आर्थिक हितों और MAGA की राजनीतिक विचारधारा के बीच संतुलन बनाने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। टेक्सास के गवर्नर ग्रेग एबॉट को लेकर भी हाल के समय में इसी तरह की राजनीतिक बहस देखने को मिली है।

राज्य सरकारों के लिए विदेशी निवेश, निर्यात, व्यापार और कुशल श्रम के जरिए रोजगार तथा टैक्स राजस्व बढ़ाना महत्वपूर्ण है। वहीं, MAGA की राजनीति में आव्रजन और विदेशी निर्भरता को लेकर कड़ा रुख दिखाई देता है। ऐसे में रिपब्लिकन गवर्नरों के सामने ‘अमेरिका फर्स्ट’ की राजनीतिक मांगों और अपने राज्यों के आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

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